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केंद्र सरकार ने चंडीगढ़ प्रशासन से सिंगल विंडो सिस्टम से जुड़े 373 सुधार बिंदुओं पर जानकारी मांगी है। प्रशासन के सभी विभागों को इन सुधारों से संबंधित नोटिफिकेशन, आदेश, दस्तावेज और अन्य जरूरी साक्ष्य उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। इस बार इस प्रक्रिया में ईज ऑफ लिविंग यानी आम लोगों के लिए सरकारी सेवाओं को आसान बनाने वाले पहलुओं को भी शामिल किया गया है। इसके अलावा केंद्र ने बिजनेस रिफॉर्म्स एक्शन प्लान (BRAP) के तहत चंडीगढ़ की स्थिति से जुड़े 130 बिंदुओं की जानकारी भी मांगी है। इसका उद्देश्य शहर में कारोबार के माहौल और प्रशासन की ओर से कारोबार शुरू करने व चलाने की प्रक्रिया को आसान बनाने के प्रयासों का आकलन करना है। 15 सितंबर तक देनी होगी पूरी जानकारी यूटी इंडस्ट्रीज विभाग ने सभी विभागों को पत्र भेजकर संबंधित सुधार बिंदुओं के लिए जरूरी दस्तावेज और साक्ष्य 15 सितंबर तक उपलब्ध कराने को कहा है। विभाग इससे पहले भी यह जानकारी मांग चुका था, लेकिन पूरी जानकारी नहीं मिल पाई थी। अब विभागों को रिकॉर्ड की हार्ड कॉपी के साथ पेन ड्राइव में सॉफ्ट कॉपी भी जमा कराने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग ने अधिकारियों को यह भी सुनिश्चित करने को कहा है कि उपलब्ध कराए जाने वाले दस्तावेज पूरे, प्रमाणित और सही हों, ताकि उनकी जांच के बाद उन्हें तय समयसीमा के भीतर संकलित कर केंद्र को भेजा जा सके। अलग-अलग विभागों के पास सुधारों की अलग जिम्मेदारी सिंगल विंडो सिस्टम के तहत सुधार बिंदुओं की जिम्मेदारी अलग-अलग विभागों को दी गई है। इनमें सबसे ज्यादा 48 सुधार बिंदु लेबर विभाग, 47 एक्साइज एवं टैक्सेशन विभाग और 35 स्वास्थ्य विभाग से जुड़े हैं। नगर निगम के पास 31, चंडीगढ़ पॉल्यूशन कंट्रोल कमेटी के पास 28 और इंजीनियरिंग विभाग के पास 26 सुधार बिंदु हैं। एस्टेट ऑफिस से 21, डीसी ऑफिस से 17, पर्यटन विभाग से 15, रजिस्ट्रार ऑफ फर्म्स एंड सोसाइटीज से 14 और RERA से 10 सुधार बिंदुओं की जानकारी मांगी गई है। इंडस्ट्रीज, कृषि और लीगल मेट्रोलॉजी विभागों के पास 9-9, जबकि तहसीलदार (रेवेन्यू) के पास 8 सुधार बिंदु हैं। आम लोगों को ये फायदा मिलने की उम्मीद सिंगल विंडो सिस्टम और सुधारों की इस प्रक्रिया से सरकारी सेवाएं ज्यादा आसान और तेज होने की उम्मीद है। ज्यादा प्रक्रियाएं ऑनलाइन होने से लोगों को अलग-अलग विभागों के चक्कर कम लगाने पड़ सकते हैं। साथ ही आवेदन की स्थिति की बेहतर ट्रैकिंग, स्पष्ट समयसीमा और कम औपचारिकताओं का फायदा भी मिल सकता है। कारोबारियों के लिए भी कम हो सकती है परेशानी कारोबारियों के लिए सिंगल विंडो क्लीयरेंस और BRAP के तहत सुधारों का मकसद मंजूरी, रजिस्ट्रेशन और परमिशन की प्रक्रिया में देरी कम करना है। विभागों के बीच बेहतर तालमेल होने से कागजी कार्रवाई कम होने और अलग-अलग मंजूरियों के लिए समय बचने की उम्मीद है। उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) वर्ष 2015 से बिजनेस रिफॉर्म्स एक्शन प्लान के जरिए कारोबार करने की प्रक्रिया को आसान बनाने से जुड़े सुधारों को आगे बढ़ा रहा है।
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चंडीगढ़ में 373 सुधार बिंदुओं पर केंद्र की नजर:प्रशासन से 15 सितंबर तक मांगी रिपोर्ट, सिंगल विंडो सिस्टम से जुड़े सुधारों की समीक्षा
