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छत्तीसगढ़ जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन ने गुरुवार से OPD सेवाओं का बहिष्कार किया। डॉक्टर मेडिकल कॉलेज कैंपस में हड़ताल पर बैठ गए हैं। अंबेडकर अस्पताल आने वाले मरीज परेशान न हों, इसके लिए डॉक्टरों ने धरना स्थल पर ही OPD शुरू कर दी है। यहां विरोध प्रदर्शन के साथ मरीजों की जांच के साथ प्रिस्किप्शन लिखा जा रहा है। JDA प्रेसिडेंट ने कहा कि सरकार से बातचीत हो चुकी है। स्वास्थ्य मंत्री के साथ हुई चर्चा के बाद अब डॉक्टर आश्वासन नहीं, बल्कि लिखित आदेश चाहते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर जल्द निर्णय नहीं हुआ तो 28 सितंबर से इमरजेंसी सेवाएं भी बंद की जाएंगी। JDA की तीन प्रमुख मांगें क्या हैं? हम जायज मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे जूडा प्रेसीडेंट डॉ पीयूष श्रीवास्तव ने कहा कि यहां बैठे किसी भी डॉक्टर को अपना समय और सेवा भाव छोड़कर जमीन पर बैठकर सरकार के खिलाफ लड़ाई लड़ने का शौक नहीं है। हम अपनी जायज मांगों को लेकर यहां बैठे हैं। हमारी मांग सिर्फ स्टाइपेंड को लेकर नहीं है। हमारी मांगों का सीधा फायदा आम जनता को मिलेगा। हम बार-बार कहते हैं कि हम प्रदेश में मेडिकल रिफॉर्म्स की लड़ाई लड़ रहे हैं। मेडिकल रिफॉर्म्स इसलिए जरूरी हैं, क्योंकि जैसे-जैसे बॉन्ड की अवधि कम होगी, प्रदेश को उतनी जल्दी सुपर स्पेशलिटी और विशेषज्ञ चिकित्सक मिल सकेंगे। इसका फायदा सरकार के साथ-साथ आम जनता को भी मिलेगा। 75 लाख के बॉन्ड पर सवाल- गरीब परिवार का बच्चा कहां से लाएगा इतनी रकम? जूडा के डॉक्टर रेशम सिंह ने कहा कि आंदोलन की सबसे प्रमुख मांग है कि बांड व्यवस्था खत्म की जाए। डॉक्टर के लिए करीब 75 लाख रुपए की बॉन्ड राशि का प्रावधान है। अगर किसी गरीब परिवार का बच्चा मेरिट में आकर एमसीएच में चयनित होता है तो वह 75 लाख रुपए कहां से लाएगा। उन्होंने कहा कि देश में 1947 के बाद से बंधवा मजदूरी खत्म हो गई है। लेकिन यहां बॉन्ड के जरिए डॉक्टरों से बंधवा मजदूरी करवाई जा रही है। छत्तीसगढ़ ही ऐसा राज्य है जहां इतनी बड़ी राशि जमा बांड के नाम पर जमा करवाई जी है। 200 करोड़ के सुपर स्पेशलिटी सेंटर, फिर भी डॉक्टरों की भर्ती नहीं JDA ने कहा कि सरकार ने सुपर स्पेशलिटी सेंटरों पर बड़ी राशि खर्च की है, लेकिन वहां डॉक्टरों की पर्याप्त भर्ती और कैडर की स्थापना नहीं हो पा रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि डॉक्टर ही नहीं होंगे तो सुपर स्पेशलिटी सेवाएं कैसे शुरू होंगी। उन्होंने Super Specialty Cadre बनाने की मांग करते हुए कहा कि इससे लिवर ट्रांसप्लांट, किडनी ट्रांसप्लांट, गंभीर कैंसर समेत जटिल बीमारियों के इलाज की सुविधाएं प्रदेश में विकसित की जा सकेंगी। इससे मरीजों को इलाज के लिए दूसरे राज्यों में जाने की जरूरत कम होगी। 15,900 रुपए मानदेय JDA ने कहा कि डॉक्टरों कि प्रदेश में कई डॉक्टर लंबे समय तक काम कर रहे हैं और इसके बावजूद उन्हें करीब 15,900 रुपए का भुगतान मिल रहा है।अन्य राज्यों में भी डॉक्टर का मानदेय छत्तीसगढ़ राज्य कि तुलना में अधिक है। जूडा की मांग है कि इंटर्न, रेजिडेंट, PG बॉन्डेड, MBBS बॉन्डेड और अन्य डॉक्टरों को उनकी जिम्मेदारी और काम के अनुरूप उचित एवं सम्मानजनक मानदेय दिया जाए। आज OPD बंद, लेकिन धरना स्थल पर मरीजों का इलाज JDA ने कहा कि गुरुवार को OPD बहिष्कार किया गया, लेकिन मरीजों को वापस नहीं भेजा गया। धरना स्थल पर समानांतर OPD लगाकर मरीजों की जांच और इलाज किया गया। JDA प्रेसिडेंट ने कहा कि आंदोलन मरीजों के खिलाफ नहीं है। मरीज उनके विरोध का कारण नहीं, बल्कि जिम्मेदारी और प्राथमिकता हैं। 28 सितंबर से इमरजेंसी बंद करने की चेतावनी JDA प्रेसिडेंट ने कहा कि अभी आंदोलन प्रदर्शनात्मक है। रायपुर के अलावा बिलासपुर, अंबिकापुर और जगदलपुर मेडिकल कॉलेजों में भी रेजिडेंट डॉक्टर, इंटर्न डॉक्टर, PG बॉन्डेड, MBBS बॉन्डेड और अन्य डॉक्टर आंदोलन में शामिल हैं। उन्होंने कहा कि यदि मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो 28 सितंबर से आंदोलन और तेज किया जाएगा और इमरजेंसी समेत सभी स्वास्थ्य सुविधाएं बंद करने की चेतावनी दी गई है।
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छत्तीसगढ़ जूनियर डॉक्टर्स की हड़ताल:OPD सेवा प्रभावित, JDA ने कहा- बॉन्ड खत्म हो, मांग पुरी नहीं हुई तो 28 से इमरजेंसी बंद करेंगे
