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छत्तीसगढ़ में बसों का सफर महंगा…किराए की नई दरें जारी:साधारण बस से लक्जरी बस का किराया जानिए, हड़ताल की चेतावनी के बाद आया फैसला




छत्तीसगढ़ में यात्री बसों के किराए की नई दरें तय कर दी गई हैं। परिवहन विभाग ने अलग-अलग श्रेणी की बसों का किराया निर्धारित किया है। साधारण बस में पहले 5 किलोमीटर के लिए प्रति यात्री 10 रुपए और इसके बाद हर किलोमीटर के लिए 1.75 रुपए किराया देना होगा। डीलक्स बस में पहले 5 किमी के 12 रुपए और इसके बाद प्रति किमी 2.20 रुपए तय किए गए हैं। सुपर लग्जरी वातानुकूलित बसों में पहले 5 किलोमीटर के लिए प्रति यात्री 12 रुपए और इसके बाद हर किलोमीटर के लिए 3.30 रुपए किराया लगेगा। अर्द्ध-शयनयान और शयनयान श्रेणी की वातानुकूलित बसों के लिए भी यही दर निर्धारित की गई है। वहीं, डीलक्स बसों की रात्रिकालीन सेवा के लिए प्रति किलोमीटर 2.20 रुपए की दर तय की गई है। साधारण रात्रिकालीन बस सेवा का किराया सामान्य बस सेवा से 10 प्रतिशत अधिक होगा। हड़ताल की चेतावनी के बाद सरकार से बनी थी सहमति किराया बढ़ाने समेत 9 मांगों को लेकर छत्तीसगढ़ यातायात महासंघ ने प्रदेशव्यापी अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी दी थी। इसके बाद परिवहन मंत्री केदार कश्यप और अधिकारियों के साथ हुई चर्चा में किराया बढ़ाने के प्रस्ताव पर सहमति बनी। सरकार की ओर से सकारात्मक आश्वासन मिलने के बाद महासंघ ने प्रस्तावित हड़ताल स्थगित कर दी थी। उस समय किराया वृद्धि के अंतिम फैसले के लिए कैबिनेट की मंजूरी का इंतजार था। अब परिवहन विभाग ने नई दरों की अधिसूचना जारी कर दी है। कांग्रेस बोली-महंगाई चरम पर कांग्रेस प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा भाजपा की सरकार में महंगाई चरम पर है। सरकार का यह निर्णय जनता में महंगाई का बोझ और बढ़ाएगा। सरकार को पेट्रोल के दामों में कमी करके ट्रांसपोर्टर और जनता दोनों को राहत देना था। हम इस निर्णय का विरोध करते है। महासंघ ने रखी थीं 9 मांगें महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष अनवर अली ने आरोप लगाया था कि बस संचालक लंबे समय से अपनी समस्याएं सरकार और परिवहन विभाग के सामने रख रहे हैं, लेकिन सुनवाई नहीं हो रही। उनके मुताबिक, किराया बढ़ाने समेत अन्य मांगों का प्रस्ताव करीब चार महीने पहले भेजा गया था। उन्होंने यह भी कहा था कि करीब तीन साल से महासंघ के साथ अधिकारियों की बैठक नहीं हुई है। बस संचालकों का तर्क था कि डीजल और संचालन से जुड़े अन्य खर्च बढ़ने के बावजूद किराए में लंबे समय से बढ़ोतरी नहीं हुई थी। महासंघ की अन्य मांगों में सिंगल स्लीपर सीट पर सिंगल टैक्स लागू करना, ई-बसों का संचालन शहर की सीमा तक सीमित रखना और ऑल इंडिया टूरिस्ट परमिट वाली बसों के ग्रामीण क्षेत्रों व बस स्टैंडों से संचालन पर रोक लगाना शामिल था। इसके अलावा स्टेज कैरिज बसों के समयचक्र में उचित अंतराल तय करने, VLTD डिवाइस के नवीनीकरण शुल्क में कमी, मैनुअल फिटनेस की सुविधा और ऑनलाइन परमिट शुरू करने की मांग भी की गई थी। दूसरे जिले या राज्य में बस चलाने के लिए परमिट की दोबारा मंजूरी लेने की प्रक्रिया आसान करने की मांग भी रखी गई थी।



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