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जमुई-नक्सल प्रभावित गांवों की 5 बेटियों ने पास की मैट्रिक:8वीं के बाद छूटी थी पढ़ाई, अब नर्स-पुलिस अधिकारी बनने का सपना




जमुई में नक्सली गतिविधियों के दौर में जिन गांवों में स्कूल तक की राह मुश्किल हो गई थी, अब वहीं की बेटियां मैट्रिक पास कर शिक्षा की नई कहानी लिख रही हैं। बरहट प्रखंड के चोरमारा और गुरमाहा गांव की सोनिया, सपना, जूली, खुशबू और सूरज ने बिहार बोर्ड ओपन स्कूलिंग की मैट्रिक परीक्षा सेकंड डिविजन से पास की है। इनमें ज्यादातर विद्यार्थियों की पढ़ाई आठवीं के बाद रुक गई थी। आर्थिक तंगी और आगे की पढ़ाई की व्यवस्था नहीं होने के कारण मैट्रिक तक पहुंचना इनके लिए सपना बन गया था। संस्था की पहल से दोबारा शुरू हुई पढ़ाई चार साल पहले एक संस्था की पहल से गांव के आठवीं पास बच्चों को दोबारा पढ़ाई से जोड़ा गया। सामुदायिक सांस्कृतिक शिक्षण केंद्र में नौवीं और दसवीं की तैयारी कराई गई। इसके बाद विद्यार्थियों को बिहार बोर्ड ओपन स्कूलिंग से जोड़कर मैट्रिक परीक्षा की तैयारी कराई गई। इस पहल से दर्जनभर से अधिक बच्चों को दोबारा पढ़ाई का मौका मिला। स्कूल ध्वस्त होने से प्रभावित हुई थी शिक्षा व्यवस्था चोरमारा में नक्सली गतिविधियों के दौर में सरकारी प्राथमिक विद्यालय को विस्फोट कर ध्वस्त कर दिया गया था। इससे गांव की शिक्षा व्यवस्था लंबे समय तक प्रभावित रही। बाद में कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय, बरहट के जरिए बच्चियों को आठवीं तक पढ़ने का अवसर मिला। लेकिन इसके बाद आगे की पढ़ाई के लिए गांव में व्यवस्था नहीं होने से कई बच्चों की शिक्षा रुक जाती थी। अब उसी इलाके में शिक्षा को लेकर तस्वीर बदल रही है। सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होने और सीआरपीएफ कैंप स्थापित होने के बाद इलाके में धीरे-धीरे बदलाव आया। गांव के बच्चे अब किताब-कॉपी और परीक्षा की तैयारी को लेकर चर्चा कर रहे है। सोनिया नर्स, खुशबू पुलिस अधिकारी बनना चाहती हैं गुरमाहा की सोनिया कुमारी आगे पढ़कर नर्स बनना चाहती हैं। उनका कहना है कि परिवार मजदूरी करता है और आगे पढ़ाई की सुविधा नहीं थी। संस्था की पहल से दोबारा पढ़ाई शुरू हुई और अब मैट्रिक पास करने के बाद उनका हौसला बढ़ा है। चोरमारा की खुशबू कुमारी पुलिस अधिकारी बनकर देश की सेवा करना चाहती हैं। वहीं सपना कुमारी बिहार पुलिस में शामिल होकर अपने गांव के लोगों की सेवा करने का सपना देखती हैं। इन बेटियों की सफलता अब गांव के दूसरे बच्चों के लिए भी आगे पढ़ने की उम्मीद बन रही है।



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