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जालंधर में स्थित कांग्रेस भवन और उसके बाहर बनी मार्केट को तोड़ने का रास्ता साफ हो गया है। अदालत ने इस मामले में दुकानदारों की याचिका खारिज कर दी है। इसके बाद अब नगर निगम को संबंधित निर्माण गिराने के आदेश दिए गए हैं। यह मामला लंबे समय से अदालत में विचाराधीन था। मिली जानकारी के अनुसार, कांग्रेस भवन का निर्माण कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के दौरान किया गया था। आरोप है कि कागजों में खाली प्लॉट के रूप में दर्ज जमीन पर अवैध निर्माण किया गया और इसके बाहर मार्केट भी बना दी गई। इसी निर्माण को लेकर लंबे समय से कानूनी विवाद चल रहा था। बताया जा रहा है कि अदालत ने वर्ष 2016 में ही कांग्रेस भवन को ध्वस्त करने के आदेश जारी कर दिए थे। हालांकि, इसके बाद मामले में कोई अपील दायर नहीं की गई। इसके बावजूद निर्माण को लेकर विवाद जारी रहा और मामला दोबारा अदालत पहुंचा। निर्माण को गिराने की कार्रवाई का रास्ता साफ अब दुकानदारों की ओर से दायर याचिका को अदालत ने खारिज कर दिया है। इसके साथ ही संबंधित निर्माण को गिराने की कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया है। अदालत के आदेश के बाद नगर निगम की भूमिका अहम हो गई है। अब देखना होगा कि निगम इस आदेश को लागू करने के लिए कब तक कार्रवाई शुरू करता है। मार्केट भी कार्रवाई के दायरे में आई इस मामले में कांग्रेस भवन के साथ बाहर बनी मार्केट भी कार्रवाई के दायरे में है। लंबे समय से चल रहे इस विवाद में अदालत के ताजा आदेश को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, निर्माण हटाने की कार्रवाई की तारीख और निगम की ओर से आगे उठाए जाने वाले कदमों की जानकारी अभी स्पष्ट नहीं है।
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जालंधर में कांग्रेस भवन और मार्केट पर चलेगा बुलडोजर:कोर्ट ने निर्माण गिराने के आदेश दिए; 2016 के आदेश के बाद फिर कार्रवाई तेज
