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हिट एंड रन मामलों में कितनों को मुआवजा मिला?:हाईकोर्ट ने पंजाब-हरियाणा और चंडीगढ़ से मांगा हिसाब; लंबित केसों की जानकारी तलब




सड़क हादसे के बाद टक्कर मारने वाला वाहन चालक फरार हो जाए और वाहन की पहचान न हो सके, ऐसे हिट एंड रन मामलों में पीड़ितों और उनके परिवारों को कितना मुआवजा मिला, अब इसका हिसाब देना होगा। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ प्रशासन को 30 सितंबर 2026 तक दर्ज ऐसे मामलों का पूरा ब्योरा पेश करने के निर्देश दिए हैं। इसमें यह भी बताना होगा कि कितने मामलों का निपटारा हो चुका है, कितने अभी लंबित हैं और जिन मामलों में फैसला हो चुका है, उनमें मुआवजे की राशि बांटी गई है या नहीं। जस्टिस हर्ष बुंगर ने यह निर्देश मोटर दुर्घटना मुआवजे से जुड़ी एक अपील पर सुनवाई के दौरान दिए। यह अपील एक महिला ने अपने पति की सड़क हादसे में मौत के बाद मुआवजे का दावा खारिज किए जाने के खिलाफ दायर की है। महिला के पति की मौत वर्ष 2017 में हिट एंड रन हादसे में हुई थी। मामले की अगली सुनवाई 28 अक्टूबर 2026 को होगी। 2022 योजना लागू होने के बाद के आंकड़े मांगे हाईकोर्ट ने तीनों पक्षों के वकीलों को निर्देश दिया कि वे 1 अप्रैल 2022 से लागू हिट एंड रन मोटर दुर्घटना पीड़ित मुआवजा योजना के तहत दर्ज मामलों की जानकारी रिकॉर्ड पर रखें। अदालत ने 30 सितंबर 2026 तक के आंकड़े मांगे हैं। इस योजना के तहत उन सड़क हादसों के पीड़ितों या उनके कानूनी वारिसों को आर्थिक सहायता दी जाती है, जिनमें दुर्घटना करने वाले वाहन की पहचान नहीं हो पाती। यह योजना मोटर वाहन अधिनियम के तहत बनाई गई है और इसने 1989 की पुरानी मुआवजा योजना की जगह ली है। इसका उद्देश्य पीड़ितों और उनके परिवारों को तय समय के भीतर आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है। हाईकोर्ट ने खास तौर पर मुआवजा बांटने की स्थिति बताने को कहा है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि योजना के तहत दर्ज मामलों में पीड़ित परिवारों को कितनी राहत मिली है। 2017 में पति की मौत-ट्रिब्यूनल ने खारिज किया यह मामला सोनीपत के कुंडली थाना क्षेत्र में हुए एक सड़क हादसे से जुड़ा है। अपीलकर्ता महिला के पति रघबीर उर्फ सुनील की कथित तौर पर 19 नवंबर 2017 को सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी। आरोप है कि जीटी रोड पर एक मॉल के पास किसी अज्ञात वाहन ने उन्हें टक्कर मार दी थी। हादसे के बाद चालक वाहन समेत मौके से फरार हो गया और वाहन का पता नहीं चल सका। इस मामले में 5 अप्रैल 2018 को कुंडली थाने में आईपीसी की धारा 279 (लापरवाही से वाहन चलाना) और 304-ए (लापरवाही के कारण मौत) के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी। महिला ने अपने पति की मौत के बाद मुआवजे के लिए दावा किया था। हालांकि, सोनीपत मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण ने 31 मई 2019 को उसकी याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद महिला ने हाईकोर्ट में अपील दायर की। चंडीगढ़ पुलिस अधिकारी का हलफनामा रिकॉर्ड पर लिया सुनवाई के दौरान चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से पेश वकील ने 28 सितंबर 2026 का एक अतिरिक्त हलफनामा अदालत में दिया। यह हलफनामा चंडीगढ़ ट्रैफिक, रोड सेफ्टी और रिसर्च एंड डेवलपमेंट से जुड़े डीएसपी लक्ष्य पांडे ने दाखिल किया था। हाईकोर्ट ने इसे रिकॉर्ड पर ले लिया। वहीं, हरियाणा सरकार की ओर से वकील ने अपीलकर्ता महिला के मुआवजे के दावे के संबंध में हलफनामा दाखिल करने के लिए समय मांगा। अदालत ने संबंधित पक्षों को अगली सुनवाई से पहले जरूरी कार्रवाई पूरी करने के निर्देश दिए हैं।



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