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सुकमा जिला कांग्रेस कमेटी ने जेलों में बंद आदिवासियों की रिहाई की मांग को लेकर हस्ताक्षर अभियान शुरू किया है। जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष हरीश कवासी लखमा ने कोंटा जनपद क्षेत्र की ग्राम पंचायत मिलमपल्ली के तिम्मापुरम गांव से अभियान की शुरुआत की। इस दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने हस्ताक्षर कर जेल में बंद आदिवासियों और उनके परिवारों के समर्थन में अपनी बात रखी। हस्ताक्षर अभियान के दौरान जेल में बंद आदिवासियों के परिवारों की परेशानियां भी सामने आईं। कई परिवारों ने बताया कि उनके पति, बेटे और अन्य परिजन लंबे समय से जेल में बंद हैं। परिवार अब भी उनके घर लौटने का इंतजार कर रहे हैं। कार्यक्रम में कई महिलाओं की आंखें अपने परिजनों को जल्द घर लौटते देखने की उम्मीद में नम हो गईं। निष्पक्ष जांच की मांग सर्व आदिवासी समाज के प्रदेश उपाध्यक्ष बेको हूंगा ने कहा कि नक्सल मामलों के नाम पर बड़ी संख्या में आदिवासियों के जेल में बंद होने की बात सामने आती रही है। ऐसे मामलों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। यदि कोई व्यक्ति निर्दोष है, तो उसे जल्द न्याय और रिहाई मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि लंबे समय से जेल में बंद लोगों के परिवार आर्थिक और सामाजिक परेशानियों का सामना कर रहे हैं। सरकार से हरीश कवासी लखमा का सवाल हरीश कवासी लखमा ने सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि बस्तर नक्सल मुक्त हो गया है, तो निर्दोष आदिवासियों को जेल में बंद रखने का क्या मतलब है। उन्होंने मांग की कि जिन आदिवासियों के खिलाफ गंभीर आरोप साबित नहीं हुए हैं, उनके मामलों की निष्पक्ष जांच कर उन्हें जल्द न्याय दिया जाए। गांव-गांव जाकर जुटाएंगे समर्थन हरीश कवासी लखमा ने कहा कि यह केवल हस्ताक्षर अभियान नहीं, बल्कि उन आदिवासी परिवारों की आवाज है, जिनका कोई अपना आज भी जेल में बंद है। उनकी आवाज को दबने नहीं दिया जाएगा। जेल में बंद निर्दोष आदिवासियों की रिहाई के लिए गांव-गांव जाकर लोगों का समर्थन जुटाया जाएगा और इस मुद्दे को सरकार के सामने मजबूती से उठाया जाएगा। उन्होंने कहा कि आदिवासी परिवार वर्षों से अपने पति, बेटे और परिवार के अन्य सदस्यों के लौटने का इंतजार कर रहे हैं। ऐसे परिवारों को न्याय दिलाना सरकार की जिम्मेदारी है। निर्दोष आदिवासियों को जल्द रिहा किया जाना चाहिए, ताकि वे अपने बीवी-बच्चों, माता-पिता और परिवार के साथ सामान्य जीवन जी सकें। तिम्मापुरम से शुरू हुआ अभियान आगे बढ़ेगा तिम्मापुरम से शुरू हुए हस्ताक्षर अभियान को ग्रामीणों ने आदिवासी समाज के न्याय और अधिकार की लड़ाई की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। ग्रामीणों का कहना है कि अभियान से जेल में बंद अपने परिजनों की रिहाई की उम्मीद लगाए परिवारों में नई उम्मीद जगी है। हरीश कवासी लखमा ने कहा कि अभियान तिम्मापुरम तक सीमित नहीं रहेगा। गांव-गांव जाकर हस्ताक्षर जुटाए जाएंगे। इन हस्ताक्षरों के जरिए आदिवासी समाज की सामूहिक मांग सरकार तक पहुंचाई जाएगी। उन्होंने निर्दोष आदिवासियों की रिहाई के मुद्दे को सड़क से सदन तक मजबूती से उठाने की बात भी कही।
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जेलों में बंद आदिवासियों की रिहाई की मांग:हरीश कवासी लखमा ने शुरू किया हस्ताक्षर अभियान, कहा- सड़क से सदन तक लड़ेंगे
