![]()
झुंझुनूं नगर परिषद चुनाव में मतदान पार्षदों के लिए होना है, लेकिन भाजपा और कांग्रेस की नजर बोर्ड गठन पर है। भाजपा की रणनीति विधायक राजेन्द्र भाम्बू और कांग्रेस की चुनावी रणनीति सांसद बृजेन्द्र ओला संभाल रहे हैं। दोनों दल कांटे वाले वार्डों और संभावित निर्दलीय विजेताओं पर नजर रख रहे हैं। किसी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने पर निर्दलीय पार्षद बोर्ड गठन में अहम भूमिका निभा सकते हैं। चुनाव के साथ बोर्ड गठन की तैयारी नगर परिषद चुनाव में भाजपा और कांग्रेस ने चुनाव प्रचार के साथ चुनाव बाद के समीकरणों पर भी काम शुरू कर दिया है। दोनों दलों का फोकस ऐसे वार्डों पर है, जहां जीत-हार का अंतर कम रहने की संभावना है या जहां निर्दलीय प्रत्याशी निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। झुंझुनूं नगर परिषद में इस बार भाजपा की पूरी रणनीति की कमान विधायक राजेन्द्र भाम्बू के हाथ में है। वहीं कांग्रेस की चुनावी रणनीति और टिकट वितरण की जिम्मेदारी झुंझुनूं सांसद बृजेन्द्र ओला ने संभाली है। दोनों नेताओं ने टिकट चयन से लेकर चुनावी अभियान तक सीधे हस्तक्षेप किया है। ऐसे में चुनाव परिणाम केवल पार्टी की जीत-हार तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि दोनों नेताओं की राजनीतिक प्रतिष्ठा का भी पैमाना माने जाएंगे। भाजपा का ‘ऑपरेशन बहुमत’, निर्दलियों पर भी नजर भाजपा ने नगर परिषद में बहुमत सुनिश्चित करने के लिए बहुस्तरीय रणनीति बनाई है। पार्टी उन वार्डों की लगातार मॉनिटरिंग कर रही है, जहां मुकाबला कांटे का है। इसके साथ ही ऐसे निर्दलीय प्रत्याशियों की भी सूची तैयार की जा रही है, जिनके जीतने की संभावना है और जो चुनाव परिणाम के बाद भाजपा के साथ आ सकते हैं। पार्टी का मानना है कि यदि कुछ वार्डों में अपेक्षित परिणाम नहीं मिले तो बोर्ड गठन के समय निर्दलीय पार्षद महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इसी वजह से चुनाव खत्म होने से पहले ही स्थानीय राजनीतिक समीकरणों का आकलन किया जा रहा है। चुनाव प्रबंधन से जुड़े पदाधिकारियों को भी लगातार फीडबैक देने के निर्देश दिए गए हैं। कांग्रेस का मजबूत वार्डों पर फोकस कांग्रेस ने नगर परिषद के उन वार्डों को प्राथमिकता दी है, जहां पिछले चुनावों में पार्टी मजबूत रही या मामूली अंतर से हार का सामना करना पड़ा था। ऐसे वार्डों में वरिष्ठ नेताओं की विशेष निगरानी रखी जा रही है। पार्टी ने मजबूत वार्डों की अलग सूची तैयार कर चुनाव संचालन की जिम्मेदारी तय की है। पार्टी ने भीतरघात रोकने और संगठन के सभी नेताओं को सक्रिय रखने पर भी विशेष जोर दिया है। टिकट से लेकर चुनाव तक जिम्मेदारी तय इस चुनाव में भाजपा की ओर से टिकट वितरण और प्रत्याशियों के चयन में विधायक राजेन्द्र भाम्बू की भूमिका सबसे अहम रही। पार्टी के अधिकांश प्रत्याशियों का चयन स्थानीय फीडबैक और उनकी सहमति से हुआ। ऐसे में यदि भाजपा नगर परिषद में बोर्ड बनाने में सफल रहती है तो इसका बड़ा राजनीतिक श्रेय भाम्बू को मिलेगा। वहीं, बहुमत से दूर रहने की स्थिति में सवाल भी उन्हीं पर उठेंगे। दूसरी ओर कांग्रेस में टिकट वितरण और चुनावी रणनीति की कमान सांसद बृजेन्द्र ओला ने संभाली। संगठन और स्थानीय नेताओं के साथ लगातार बैठकों के बाद प्रत्याशी तय किए गए। कांग्रेस यदि नगर परिषद में दोबारा बोर्ड बनाने में सफल होती है तो इसे ओला की रणनीतिक सफलता माना जाएगा। वहीं, अपेक्षित परिणाम नहीं मिलने पर राजनीतिक जिम्मेदारी भी उनके खाते में जाएगी। निर्दलीय बन सकते हैं ‘किंगमेकर’ नगर परिषद चुनाव में बड़ी संख्या में निर्दलीय प्रत्याशी मैदान में हैं। कई वार्ड ऐसे हैं, जहां त्रिकोणीय मुकाबले की स्थिति बनी हुई है। यदि किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलता है तो निर्दलीय पार्षद बोर्ड गठन में ‘किंगमेकर’ साबित हो सकते हैं। यही कारण है कि दोनों प्रमुख दल अभी से संभावित चुनाव बाद की रणनीति पर भी काम कर रहे हैं। दोनों नेताओं की राजनीतिक प्रतिष्ठा दांव पर झुंझुनूं नगर परिषद का चुनाव अब केवल 60 वार्डों तक सीमित नहीं रह गया है। यह चुनाव भाजपा के विधायक राजेन्द्र भाम्बू और कांग्रेस के सांसद बृजेन्द्र ओला की राजनीतिक रणनीति, संगठन क्षमता और नेतृत्व की परीक्षा बन गया है। मतदाता पार्षद चुनेंगे, लेकिन नतीजे यह भी तय करेंगे कि शहर की राजनीति में किस नेता की पकड़ ज्यादा मजबूत साबित हुई।
Source link
झुंझुनूं में भाजपा-कांग्रेस की निर्दलीय प्रत्याशियों पर नजर:60 वार्डों के नतीजों से तय होगी बोर्ड की सत्ता
