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राज्य सरकार ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत खरीफ 2026 के लिए अधिसूचना जारी कर दी है। टोंक जिले के लिए एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी ऑफ इंडिया लिमिटेड (AIC) को बीमा कंपनी नामित किया गया है। जिले के किसान 31 जुलाई तक खरीफ फसलों और 31 दिसंबर तक रबी फसलों का बीमा केंद्रीय सहकारी बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक, वाणिज्यिक बैंक, डाकघर, कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी), अधिकृत बीमा एजेंट अथवा राष्ट्रीय फसल बीमा पोर्टल के माध्यम से करा सकेंगे। कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक वीरेन्द्र सिंह सोलंकी ने बताया कि खरीफ फसलों के लिए प्राकृतिक आपदा से होने वाले नुकसान पर जोखिम स्तर 80 प्रतिशत निर्धारित किया गया है। कटाई के बाद अधिकतम 14 दिन तक प्राकृतिक आपदा से हुई क्षति भी योजना के दायरे में रहेगी। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में शामिल होना पूरी तरह स्वैच्छिक है। हालांकि ऋणी किसानों के ऋण खातों से प्रीमियम स्वतः कट जाएगा। यदि कोई ऋणी किसान योजना से बाहर रहना चाहता है तो उसे अंतिम तिथि से सात दिन पहले बैंक में घोषणा-पत्र जमा करना होगा, अन्यथा बैंक उसके खाते से प्रीमियम काट लेगा। गैर ऋणी किसानों के लिए एग्री स्टेक आईडी जरूरी गैर ऋणी एवं बंटाईदार किसान स्वैच्छिक आधार पर योजना में शामिल हो सकते हैं। इसके लिए भूमि स्वामित्व या कब्जे का प्रमाण, बैंक खाते का विवरण, आधार कार्ड, एग्री स्टेक आईडी और राज्य सरकार द्वारा निर्धारित अन्य दस्तावेज ऑनलाइन जमा कराने होंगे। जिन गांवों के भूमि रिकॉर्ड राष्ट्रीय फसल बीमा पोर्टल से एकीकृत हैं, वहां डिजिटल हस्ताक्षरयुक्त स्वयं प्रमाणित जमाबंदी मान्य होगी। जिन क्षेत्रों में रिकॉर्ड का एकीकरण नहीं हुआ है, वहां पटवारी, गिरदावर या तहसीलदार से सत्यापित जमाबंदी प्रस्तुत करनी होगी। 29 जुलाई तक बदल सकेंगे बीमित फसल का नाम संयुक्त निदेशक ने बताया कि यदि ऋणी किसान बीमित फसल में परिवर्तन कराना चाहते हैं तो उन्हें 29 जुलाई अथवा अंतिम तिथि से दो दिन पहले तक संबंधित बैंक को इसकी सूचना देनी होगी। इन फसलों का कराया जा सकेगा बीमा टोंक जिले में खरीफ मौसम के लिए उड़द, मूंग, मूंगफली, ग्वार, मक्का, बाजरा, तिल और ज्वार अधिसूचित फसलें हैं। इनके लिए प्रति हेक्टेयर बीमित राशि क्रमशः 46,833 रुपए, 49,082 रुपए, 1,00,877 रुपए, 53,585 रुपए, 40,483 रुपए, 45,282 रुपए, 44,119 और 34,669 रुपए निर्धारित की गई है। 72 घंटे में देनी होगी नुकसान की सूचना सोलंकी ने बताया कि फसल क्षति होने पर प्रभावित किसान को 72 घंटे के भीतर कृषि रक्षक पोर्टल, हेल्पलाइन नंबर 14447 या क्रॉप इंश्योरेंस ऐप पर सूचना दर्ज करानी होगी। यदि निर्धारित समय में पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं हो पाती है, तो सात दिन के भीतर निर्धारित प्रपत्र में बीमा कंपनी को पूर्ण विवरण देना होगा। हालांकि 72 घंटे के भीतर प्रारंभिक सूचना देना अनिवार्य रहेगा।
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टोंक में 31 जुलाई तक होंगे खरीफ फसलों के बीमा:उड़द, मूंग, मूंगफली समेत 8 खरीफ फसलें दायरे में शामिल
