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बोकारो, हजारीबाग समेत कई ट्रेजरी से फर्जीवाड़े के जरिए पैसे की निकासी के मामलों के बाद झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद (जेईपीसी) ने फंड के संचालन और निकासी की व्यवस्था कड़ी करने का फैसला लिया है। वित्तीय प्रबंधन को ज्यादा पारदर्शी, अनुशासित और त्रुटिमुक्त बनाने के लिए ज्वाइंट सिग्नेचर की व्यवस्था खत्म की जा रही है। पहले संविदा कर्मचारी भी ज्वाइंट सिग्नेचर कर सकते थे, लेकिन अब अंतिम रूप से सिर्फ सरकारी अधिकारी के हस्ताक्षर से ही भुगतान होगा। छोटे खर्चों के लिए भी वाउचर जरूरी होगा। ट्रेजरी में रहेगा पूरा फंड नए नियम के तहत जेईपीसी का फंड अब बैंकों में नहीं रखा जाएगा। चेक की व्यवस्था भी खत्म होगी। पूरी राशि ट्रेजरी में रहेगी। ट्रेजरी-पोर्टल के माध्यम से इसकी मॉनिटरिंग होगी। सभी भुगतान और निकासी डिजिटल माध्यम से वित्तीय नियमों के दायरे में होंगे, ताकि हर राशि का हिसाब हो। 800 करोड़ पर निगरानी केंद्र सरकार ने झारखंड को 445 करोड़ रु. और पीएमश्री स्कूलों के लिए 88 करोड़ रु. दिए हैं। राज्यांश जोड़ने पर दोनों योजनाओं की राशि मिलाकर करीब 800 करोड़ रुपए हो जाती है। यह राशि किताब-कॉपी, साइकिल, पारा शिक्षक वेतन समेत अन्य मदों पर खर्च होगी। एसएनए स्पर्श से होगा भुगतान फंड के दुरुपयोग को रोकने और उसकी रीयल-टाइम मॉनिटरिंग के लिए वित्त मंत्रालय के दिशा-निर्देशों पर एसएनए स्पर्श प्रणाली लागू की गई है। सभी वित्तीय लेन-देन ‘स्पर्श’ पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन होंगे। सभी खर्चों का भुगतान इसी से होगा।
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ट्रेजरी में फर्जी निकासी के बाद नई व्यवस्था:जेईपीसी में अब ट्रेजरी से भुगतान, डीईओ, बीईईओ और एसपीडी बन सकेंगे डीडीओ
