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धान की कटाई से पहले किसानों को विभाग की सलाह:80-85% बालियां सुनहरी होने पर ही काटें फसल




धान की कटाई का समय नजदीक आने के साथ कृषि विभाग ने किसानों को कटाई, मड़ाई और भंडारण में सावधानी बरतने की सलाह दी है। जिला कृषि पदाधिकारी राजीव कुमार ने कहा कि किसान केवल कैलेंडर के आधार पर कटाई न करें, बल्कि फसल की परिपक्वता, दानों की स्थिति और नमी देखकर ही कटाई का निर्णय लें। उन्होंने बताया कि जब धान की 80 से 85 प्रतिशत बालियां पीली या सुनहरी हो जाएं और दाने पूरी तरह विकसित व सख्त हो जाएं, तब फसल कटाई के लिए तैयार मानी जाती है। कटाई के समय दानों में 20 से 25 प्रतिशत तक नमी हो सकती है। सुरक्षित भंडारण के लिए धान को सुखाकर नमी का स्तर 12 से 14 प्रतिशत तक लाना जरूरी है। समय से पहले कटाई करने पर कच्चे और हल्के दानों की संख्या बढ़ सकती है। मड़ाई के बाद अच्छी तरह सुखाएं मड़ाई के बाद धान को साफ जगह या तिरपाल पर फैलाकर सुखाने की सलाह दी गई है। धान को समय-समय पर पलटते रहें और रात में ओस से बचाने के लिए ढक दें। कृषि विभाग के अनुसार, गीले धान को सीधे बोरी में रखने से फफूंद लगने और बदबू आने की समस्या हो सकती है। भंडारण से पहले भूसा, मिट्टी और खराब दानों को अलग कर लेना चाहिए। बोरियों को सीधे फर्श पर रखने के बजाय पैलेट या लकड़ी के प्लेटफॉर्म पर रखने और दीवार से कुछ दूरी बनाए रखने की सलाह दी गई है। भंडारित धान की नियमित जांच भी जरूरी है। कीट या फफूंद से प्रभावित धान को स्वस्थ अनाज से अलग रखना चाहिए। मनमाने तरीके से न करें कीटनाशी का प्रयोग कृषि विभाग ने किसानों को कीटनाशी का मनमाने तरीके से प्रयोग नहीं करने की सलाह दी है। फ्यूमिगेशन जैसे उपाय निर्धारित तकनीकी प्रोटोकॉल के तहत प्रशिक्षित या अधिकृत व्यक्ति की देखरेख में ही कराने को कहा गया है। बीज के लिए धान रखने वाले किसान स्वस्थ, पूर्ण विकसित और रोगमुक्त दानों का चयन करें। जिला कृषि पदाधिकारी ने कहा कि अच्छी उपज के साथ उसका सुरक्षित भंडारण भी जरूरी है। सही परिपक्वता पर कटाई, उचित तरीके से सुखाने और वैज्ञानिक भंडारण से नुकसान कम किया जा सकता है। इससे धान की गुणवत्ता और बाजार मूल्य बनाए रखने में भी मदद मिलेगी।



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