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नरवर किले की पुरानी ऐतिहासिक तोप चोरी में बड़ा खुलासा:पहले भी हुई थी चोरी की कोशिश; राजस्थान कनेक्शन आया सामने




शिवपुरी जिले के नरवर किले से 15-16 जुलाई की दरम्यानी रात चोरी हुई सिंधिया रियासत की करीब 400 साल पुरानी और साढ़े तीन टन वजनी ऐतिहासिक तोप का अब तक कोई सुराग नहीं मिल पाया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस की कई टीमें लगातार राजस्थान में सर्च ऑपरेशन चला रही हैं। जांच के दौरान सामने आए नए इनपुट ने इस हाई-प्रोफाइल चोरी की गुत्थी को और भी उलझा दिया है। पहले भी हुई थी तोप चोरी करने की कोशिश जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, 3 जुलाई को राजस्थान से तीन वाहनों में करीब 25 लोग नरवर किले पहुंचे थे। बताया जा रहा है कि आरोपियों ने ऐतिहासिक तोप को उसके मूल स्थान से हटाने में सफलता हासिल कर ली थी, लेकिन साढ़े तीन टन वजन होने के कारण वे उसे अपने साथ नहीं ले जा सके और वापस लौट गए। इसके बाद 5 जुलाई की सुबह तोप अपने निर्धारित स्थान से कुछ फीट दूर मिली थी। इस घटना की सूचना नरवर थाने में लिखित रूप से दी गई थी, लेकिन उस समय यह अंदेशा नहीं लगाया गया कि आरोपी दोबारा बड़ी तैयारी के साथ लौट सकते हैं। जुलाई की रात दूसरी बार पहुंचे आरोपी सूत्रों का दावा है कि पहली कोशिश नाकाम रहने के बाद आरोपियों ने पूरी योजना के साथ दोबारा रेकी की। 15-16 जुलाई की रात भारी संसाधनों और वाहनों के साथ आरोपी फिर नरवर किले पहुंचे और इस बार ऐतिहासिक तोप को चोरी कर ले गए। सबसे हैरानी की बात यह रही कि इतनी बड़ी और भारी तोप को ले जाने के बावजूद किसी को इसकी भनक तक नहीं लगी। राजस्थान के करौली से जुड़ रहे तार पुलिस की तकनीकी जांच में बड़ा सुराग मिला है। जांच अधिकारियों के अनुसार, जिस दिन किले की रेकी की गई और जिस रात चोरी हुई, उन दोनों दिनों करीब 15 से 20 संदिग्ध मोबाइल नंबरों की लोकेशन एक जैसी मिली है। तकनीकी विश्लेषण में इन मोबाइल नंबरों की लोकेशन राजस्थान के करौली जिले के हिंडौन क्षेत्र स्थित गांवड़ी मीणा गांव के आसपास ट्रेस हुई है। इसी आधार पर पुलिस की टीमें राजस्थान में लगातार संदिग्धों की तलाश कर रही हैं और कई लोगों से पूछताछ भी की जा चुकी है। पुलिस की कई टीमें कर रहीं जांच मामले की गंभीरता को देखते हुए मध्यप्रदेश और राजस्थान पुलिस के बीच समन्वय बनाकर जांच आगे बढ़ाई जा रही है। पुलिस को संदेह है कि इस चोरी के पीछे संगठित अंतरराज्यीय गिरोह सक्रिय हो सकता है, जिसने पहले रेकी की और बाद में पूरी तैयारी के साथ वारदात को अंजाम दिया। ऐतिहासिक धरोहर की सुरक्षा पर उठे सवाल करीब चार शताब्दी पुरानी यह तोप नरवर किले की ऐतिहासिक पहचान मानी जाती थी। इतनी भारी धरोहर का चोरी हो जाना सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। स्थानीय लोगों ने पुरातात्विक और ऐतिहासिक धरोहरों की सुरक्षा बढ़ाने की मांग की है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। जांच जारी, जल्द खुलासे की उम्मीद पुलिस का कहना है कि तकनीकी साक्ष्यों, मोबाइल लोकेशन, सीसीटीवी फुटेज और संदिग्धों से पूछताछ के आधार पर जांच तेजी से आगे बढ़ रही है। अधिकारियों को उम्मीद है कि जल्द ही चोरी की गई ऐतिहासिक तोप बरामद कर पूरे गिरोह का पर्दाफाश किया जाएगा।



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