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देश के एकमात्र नर्मदा उद्गम स्थल अमरकंटक में महाआरती के दौरान श्रद्धालुओं को मूलभूत सुविधाओं के अभाव का सामना करना पड़ रहा है। नर्मदा मंदिर ट्रस्ट के गठन को 25 वर्ष से अधिक समय बीत चुका है और ट्रस्ट के पास करीब डेढ़ करोड़ रुपए की निधि भी उपलब्ध है, लेकिन उद्गम कुंड से मुख्य मंदिर तक श्रद्धालुओं के लिए आज तक स्थायी शेड नहीं बन पाया है। बारिश के मौसम में श्रद्धालुओं को भीगकर महाआरती करनी पड़ती है, जबकि गर्मी में तेज धूप के बीच घंटों कतार में खड़ा रहना पड़ता है। बारिश में भीगकर करनी पड़ रही महाआरती प्रतिदिन होने वाली महाआरती में मध्यप्रदेश समेत देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। बारिश के दौरान महाआरती स्थल पर शेड नहीं होने से श्रद्धालु खुले आसमान के नीचे आरती करने को मजबूर हैं। पुजारियों ने अपने स्तर पर तिरपाल लगाकर अस्थायी व्यवस्था की है, लेकिन इससे सीमित लोगों को ही राहत मिलती है। उद्गम कुंड से मंदिर तक भी नहीं है शेड श्रद्धालुओं को उद्गम कुंड से मुख्य मंदिर तक बिना किसी शेड के पैदल जाना पड़ता है। बारिश और तेज धूप दोनों ही मौसम में यह मार्ग श्रद्धालुओं के लिए परेशानी का कारण बनता है। बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे सबसे अधिक प्रभावित होते हैं। नर्मदा मंदिर ट्रस्ट के गठन को ढाई दशक से अधिक समय हो चुका है। ट्रस्ट के अध्यक्ष शहडोल संभाग के कमिश्नर और सचिव अनूपपुर कलेक्टर हैं। स्थानीय सांसद और विधायक भी समिति के सदस्य हैं। इसके बावजूद श्रद्धालुओं की इस मूलभूत सुविधा के लिए अब तक कोई स्थायी व्यवस्था नहीं हो सकी। विधायक की घोषणा भी नहीं हो सकी जमीन पर मां नर्मदा मंदिर के पुजारी पंडित रुपेश द्विवेदी ने बताया कि शेड निर्माण की मांग कई बार ट्रस्ट के समक्ष रखी गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने बताया कि स्थानीय विधायक फुन्देलाल सिंह मार्को ने विधायक निधि से शेड निर्माण की घोषणा भी की थी, लेकिन नगर परिषद द्वारा अब तक एस्टीमेट तैयार नहीं किए जाने से राशि जारी नहीं हो सकी और निर्माण शुरू नहीं हो पाया।
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नर्मदा उद्गम पर बारिश में भीगकर श्रद्धालु कर रहे महाआरती:25 साल में ट्रस्ट नहीं बना पाया शेड; पुजारियों ने तिरपाल से की अस्थायी व्यवस्था
