जयपुर5 मिनट पहले
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अपेक्स इंटरनेशनल स्कूल में आयोजित ‘अपेक्स फिएस्टा-2026’ इंटर-स्कूल प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। शहर के 40 प्रतिष्ठित विद्यालयों के लगभग 450 विद्यार्थियों ने विभिन्न प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेकर अपनी कला, तकनीकी कौशल और रचनात्मक सोच का प्रभावशाली प्रदर्शन किया। प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए अपेक्स इंटरनेशनल स्कूल ने सर्वाधिक अंक हासिल कर ओवरऑल चैंपियन बनने का गौरव प्राप्त किया।
कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने योग, फैशन शो, एड-मैड शो, रोबोटिक्स एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), गोंड आर्ट और क्विज जैसी छह अलग-अलग प्रतियोगिताओं में भाग लिया। फैशन शो में प्रतिभागियों ने आकर्षक परिधानों के माध्यम से सामाजिक संदेश और रचनात्मकता को प्रस्तुत किया, जबकि एड-मैड शो में विद्यार्थियों ने अपनी अभिनय क्षमता और प्रभावी संप्रेषण कौशल का प्रदर्शन किया।

रोबोटिक्स एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रतियोगिता आयोजन का प्रमुख आकर्षण रही, जहां विद्यार्थियों ने आधुनिक तकनीक, नवाचार और वैज्ञानिक सोच का परिचय देते हुए अपने मॉडल और प्रोजेक्ट प्रस्तुत किए। वहीं गोंड आर्ट प्रतियोगिता में पारंपरिक भारतीय लोक कला को रंगों और कल्पनाशीलता के साथ जीवंत रूप दिया गया। योग प्रतियोगिता में प्रतिभागियों ने संतुलन, अनुशासन और एकाग्रता का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया, जबकि क्विज़ प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने सामान्य ज्ञान और विषयगत जानकारी का परिचय दिया।
प्रतियोगिता के दौरान विद्यालय परिसर में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा, अनुशासन और उत्साह का माहौल बना रहा। विद्यार्थियों के आत्मविश्वास और प्रदर्शन ने उपस्थित अभिभावकों एवं शिक्षकों को भी प्रभावित किया।
विद्यालय की प्रधानाचार्या डॉ. अर्चना सिंह ने कहा कि इस प्रकार की प्रतियोगिताएं विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता, टीमवर्क और रचनात्मक सोच विकसित करने का सशक्त माध्यम हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन बच्चों को कक्षा से बाहर सीखने और अपनी प्रतिभा को पहचानने का अवसर प्रदान करते हैं।
विद्यालय की निदेशक डॉ. शीतल जूनिवाल ने कहा कि वर्तमान समय में केवल शैक्षणिक उपलब्धियां ही सफलता का आधार नहीं हैं, बल्कि नवाचार, रचनात्मक सोच और तकनीकी दक्षता भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को ऐसे मंच उपलब्ध कराना आवश्यक है, जहां वे अपनी छिपी हुई प्रतिभा को निखार सकें और विकसित भारत के निर्माण में अपनी सकारात्मक भूमिका निभा सकें।
कार्यक्रम के समापन समारोह में विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेता और उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को ट्रॉफी, पदक और प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।
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‘उनकी चिट्ठियां’ ने दर्शकों को किया भावुक
वीणा पाणि कला मंदिर समिति की ओर से रवीन्द्र मंच के मिनी थिएटर में वरिष्ठ साहित्यकार तपन भट्ट लिखित नाटक उनकी चिट्ठियाँ का भावपूर्ण मंचन किया गया। डॉ. सौरभ भट्ट के निर्देशन में प्रस्तुत इस नाटक ने मानवीय संवेदनाओं, प्रेम, रिश्तों और चिट्ठियों से जुड़ी भावनाओं को इस तरह जीवंत किया कि पूरा सभागार भावनाओं से सराबोर हो गया।
नाटक की कहानी एक पोस्टमैन के इर्द-गिर्द बुनी गई थी, जो पुरानी चिट्ठियों के माध्यम से दर्शकों को दो अलग-अलग लेकिन बेहद मार्मिक कहानियों की दुनिया में ले जाता है। बदलते दौर में खोती जा रही आत्मीयता, पत्र लेखन की संस्कृति और रिश्तों की गर्माहट को संवेदनशील ढंग से मंच पर प्रस्तुत किया गया।
पहली कहानी में मानसिक रूप से विशेष बालक चिंटू की भूमिका नवीन टेलर ने बेहद प्रभावशाली ढंग से निभाई। उनके बड़े भाई के किरदार में उमेश शर्मा ने भावनात्मक अभिनय किया, जबकि झिलमिल भट्ट ने माँ की भूमिका को संवेदनशीलता के साथ जीवंत बनाया। तीनों कलाकारों के अभिनय ने दर्शकों को भावुक कर दिया।
दूसरी कहानी में टॉम की भूमिका स्वयं डॉ. सौरभ भट्ट ने निभाई। उनके अंतर्मन के रूप में विशाल भट्ट ने सशक्त अभिनय करते हुए कहानी को गहराई प्रदान की। इस कहानी में भी झिलमिल भट्ट ने माँ और अभिषेक झाँकल ने पिता की भूमिका निभाकर दर्शकों की खूब सराहना बटोरी।
नाटक में सिमरन जैन, वीणा उडवाणी, सुरेंद्र, शिवाय, मनीष और पियूषा ने भी अपने प्रभावशाली अभिनय से प्रस्तुति को और सशक्त बनाया। सभी कलाकारों ने अपने-अपने किरदारों के साथ पूरी ईमानदारी से न्याय किया, जिससे कहानी दर्शकों के दिल तक पहुंची।
निर्देशक डॉ. सौरभ भट्ट ने नाटक के माध्यम से यह संदेश देने का प्रयास किया कि आधुनिक दौर में तकनीक ने भले ही संवाद के तरीके बदल दिए हों, लेकिन रिश्तों की सच्ची गर्माहट, अपनापन और भावनाओं की गहराई आज भी सबसे अधिक महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि यह प्रस्तुति दर्शकों को मानवीय संवेदनाओं और रिश्तों की अहमियत का एहसास कराने का प्रयास है।

2 मिनट पहले
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भट्ट मथुरानाथ शास्त्री साहित्य पीठ पर प्रो. विनोद बिहारी शर्मा मनोनीत
जगद्गुरु रामानंदाचार्य राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय ने संस्कृत साहित्य और शोध के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठित ‘भट्ट मथुरानाथ शास्त्री साहित्य पीठ’ पर प्रख्यात साहित्य मर्मज्ञ एवं वरिष्ठ शिक्षाविद् प्रो. विनोद बिहारी शर्मा को मनोनीत किया है। विश्वविद्यालय की कार्य परिषद की हाल ही में आयोजित बैठक में इस प्रस्ताव को सर्वसम्मति से मंजूरी दी गई।
गौरतलब है कि राष्ट्रपति सम्मानित विद्वान देवर्षि कलानाथ शास्त्री के निधन के बाद से यह साहित्य पीठ लंबे समय से रिक्त थी। इस नियुक्ति को संस्कृत साहित्य और शोध गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विश्वविद्यालय के अनुसार, यह पीठ संस्कृत साहित्य के अध्ययन-अध्यापन, शोध, संरक्षण, प्रचार-प्रसार तथा नवीन योजनाओं और नवाचारों को बढ़ावा देने का प्रमुख केंद्र है।
प्रो. विनोद बिहारी शर्मा संस्कृत साहित्य के प्रतिष्ठित विद्वान, ओजस्वी वक्ता, कुशल समन्वयक और अनुभवी प्रशासक के रूप में अपनी पहचान रखते हैं। वे पूर्व में महाराजा संस्कृत कॉलेज, जयपुर के प्राचार्य के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं। शिक्षा, प्रशासन और साहित्य के क्षेत्र में उनके लंबे अनुभव का लाभ अब विश्वविद्यालय की इस महत्वपूर्ण साहित्य पीठ को मिलेगा।
कार्यभार ग्रहण करने के बाद प्रो. विनोद बिहारी शर्मा ने इसे अपने जीवन का गौरवपूर्ण क्षण बताते हुए कहा कि राष्ट्रपति सम्मानित विद्वान देवर्षि कलानाथ शास्त्री जिस पीठ को सुशोभित कर चुके हैं, उस पर कार्य करने का अवसर मिलना उनके लिए बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि वे पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ पीठ के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने तथा संस्कृत भाषा और साहित्य के संवर्धन के लिए कार्य करेंगे।
उन्होंने इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी के लिए विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. मदन मोहन झा तथा कार्य परिषद के सभी सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त किया और विश्वास दिलाया कि साहित्य पीठ के माध्यम से संस्कृत अध्ययन, शोध और नई पीढ़ी को इस समृद्ध परंपरा से जोड़ने के लिए प्रभावी पहल की जाएगी।

3 मिनट पहले
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भारतीय साड़ियों की खूबसूरती को मिलेगा मंच
भारतीय साड़ियों की समृद्ध परंपरा, विविधता और सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देने के उद्देश्य से संस्था ‘इंडियन ट्रेलब्लेजर’ की ओर से 22 अगस्त को ‘साड़ी वियर कॉम्पीटिशन’ का आयोजन किया जाएगा। प्रतियोगिता का पोस्टर शनिवार को निर्माण नगर स्थित मातृछाया में आयोजित प्रथम ग्रूमिंग सेशन के दौरान प्रतिभागियों द्वारा विमोचित किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत भगवान श्रीराम की वंदना और रामधुन भजनों के साथ हुई। इस दौरान प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भजनों में भाग लिया और प्रतियोगिता के पोस्टर का अनावरण किया। आयोजन का समन्वय संस्था की आइकन शांति भटनागर ने किया।
संस्था के निदेशक एवं कार्यक्रम संयोजक डॉ. नीरज माथुर ने बताया कि प्रतियोगिता की थीम ‘योर साड़ी, योर आइडेंटिटी, योर स्टाइल, योर एक्सपीरियंस’ रखी गई है। इसका उद्देश्य भारतीय साड़ियों की सांस्कृतिक समृद्धि, पारंपरिक शिल्पकला और महिलाओं की व्यक्तिगत शैली को एक मंच प्रदान करना है। उन्होंने बताया कि प्रतियोगिता में 25 वर्ष से अधिक आयु की महिलाएं भाग ले सकेंगी।
ग्रूमिंग सेशन के दौरान डॉ. चंद्रकला अग्रवाल ने प्रतिभागियों को महिला स्वास्थ्य और व्यक्तित्व विकास से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां दीं। उन्होंने स्वस्थ जीवनशैली, आत्मविश्वास और सकारात्मक व्यक्तित्व के महत्व पर भी प्रकाश डाला।
आयोजकों ने बताया कि प्रतियोगिता का आयोजन पोद्दार इंटरनेशनल कॉलेज में किया जाएगा। इसमें प्रतिभागियों का मूल्यांकन उनकी साड़ी की प्रस्तुति, आत्मविश्वास, व्यक्तित्व और मंच पर प्रदर्शन के आधार पर किया जाएगा। विजेता प्रतिभागियों को आकर्षक पुरस्कारों से सम्मानित किया जाएगा।
डॉ. नीरज माथुर ने कहा कि भारत के प्रत्येक राज्य की अपनी विशिष्ट साड़ी परंपरा है, जो देश की सांस्कृतिक विविधता का प्रतीक है। इस आयोजन के माध्यम से महिलाओं को अपनी पारंपरिक विरासत को गर्व के साथ प्रस्तुत करने और भारतीय संस्कृति से जुड़ने का अवसर मिलेगा।

4 मिनट पहले
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प्रसिद्ध होम्योपैथी विशेषज्ञ डॉ. एस. के. जोशी को मिला राजस्थान गौरव सम्मान
चिकित्सा क्षेत्र में उत्कृष्ट सेवाओं और समाज के प्रति उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रसिद्ध होम्योपैथी विशेषज्ञ डॉ. एस. के. जोशी को ‘राजस्थान गौरव सम्मान-2026’ से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उन्हें राजस्थान के माननीय राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागड़े ने एक गरिमामय समारोह में प्रदान किया।
संस्कृति संस्था के तत्वावधान में आयोजित ‘राजस्थान गौरव सम्मान समारोह-2026’ का आयोजन संस्था के अध्यक्ष पंडित सुरेश मिश्रा के नेतृत्व में किया गया। समारोह में प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य करने वाली कई प्रतिष्ठित हस्तियों को सम्मानित किया गया।
समारोह के दौरान राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने डॉ. एस. के. जोशी को शॉल, स्मृति चिन्ह और प्रशस्ति पत्र भेंट कर सम्मानित किया। उन्होंने चिकित्सा क्षेत्र में उनकी दीर्घकालीन सेवाओं और समाज के प्रति समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे चिकित्सक समाज के लिए प्रेरणा स्रोत हैं।
डॉ. एस. के. जोशी ने इस सम्मान के लिए संस्कृति संस्था और राज्यपाल का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह सम्मान उन्हें समाज सेवा और चिकित्सा के क्षेत्र में और अधिक समर्पण के साथ कार्य करने की प्रेरणा देगा।
समारोह में विभिन्न क्षेत्रों की विशिष्ट हस्तियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, शिक्षाविदों और गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति रही। आयोजन के दौरान प्रदेश के विकास और समाज सेवा में उल्लेखनीय योगदान देने वाले व्यक्तियों को सम्मानित कर उनके कार्यों की सराहना की गई।


