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पंजाब में नशा इस कदर फैल गया कि अब इसका सोशल और इकोनोमिक इम्पैक्ट सामने आने लगा है। नशे के कारण रिश्ते खत्म हो रहे और परिवारों की आर्थिक हालत बिगड़ती जा रही है। नशे के कारण युवाओं की शादियां नहीं हो रही, जिनकी शादियां हो रही हैं वो बच्चे पैदा करने लायक नहीं बचे यानी वंश वृद्धि पर भी खतरा मंडराने लगा है। पूर्व DGP पंजाब डीआर भट्टी का कहना है कि नशे पर कोई सख्त कदम नहीं उठाया गया तो राज्य के गांवों में सोशल बैलेंस बिगड़ जाएगा। गांव में अगली जनरेशन पैदा होने की दर खत्म हो जाएगी। हाल ही में एक रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें यह बात सामने आई है कि पंजाब में 74 लाख के करीब लोग ऐसे हैं जो नशे का सेवन करते हैं। जिसका मतलब है कि पंजाब की एक तिहाई जनता नशे की चपेट में है। इसमें भी ज्यादातर युवा हैं। वहीं, पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी (PAU) के पूर्व वीसी डॉ किरपाल सिंह औलख का कहना है कि नशे की वजह से रिश्ते भी तार-तार हो रहे हैं। बेटा नशे के लिए मां का कत्ल कर रहा है। नशा करने वाला जो पैसे कमा रहा है वो परिवार की परवरिश में नहीं लग रहा है और सीधे ड्रग डीलरों में पास जा रहा है। जिससे लोगों में गरीबी बढ़ने लगी है। पंजाब में नशा मुद्दा क्यों, एक्सपर्ट से जानिए… पंजाब में नशे पर सियासत का सिलसिला
पॉलिटिकल एक्सपर्ट व सीनियर जर्नलिस्ट वैवस्वत वेंकट का कहना है कि पंजाब की राजनीति में नशा एक अहम मुद्दा बन चुका है। शिरोमणि अकाली दल के खिलाफ 2017 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने नशे को अहम मुद्दा बनाया और जीत हासिल की। कांग्रेस सरकार भी नशे पर कोई ठोस कदम नहीं उठा पाई और 2022 में आम आदमी पार्टी ने भी नशे को मुद्दा बनाया और जीत हासिल की। अब यही कहानी पंजाब में सभी राजनीतिक दल दोहरा रहे हैं। नशे पर लोगों ने शिअद, कांग्रेस और आप का लाइन ऑफ एक्शन देख लिया तो भाजपा अब इसी मुद्दे को लेकर आ रही है। रिटायर्ड कर्नल बोले- पंजाब में नशा कैंसर बन चुका
रिटायर्ड कर्नल जेएस गिल का कहना है कि नशा पंजाब में कैंसर का रूप ले चुका है। हर जगह नशा ही नशा हो गया है। नशा हर घर की समस्या बन गया है। कोई गांव या मोहल्ला ऐसा नहीं है जो इससे अछूता है। ऐसे में नशा हर आदमी की प्रॉब्लम हो गया है। लोगों को डर सता रहा है कि उनके बच्चे कहीं नशे में न फंस जाए। ऐसे में पॉलिटिकल पार्टीज नशे को मुद्दा बनाती हैं। लोगों को भावनात्मक तौर पर अट्रेक्ट करते हैं। लोग उनके पीछे लगते हैं और वो सरकार बना देते हैं। PAU के पूर्व वीसी डॉ किरपाल सिंह औलख का कहना है कि युवा बेरोजगार हैं। उनके पास काम नहीं है। वो नशे की तरफ लग गई और धीरे-धीरे परिवार को गरीबी के दलदल में धकेल रहे हैं। उन्होंने कहा कि हाल ही में सगरूर के गुलजार का केस है। उसने आखिरी वीडियो में यही कहा कि उसके बेटे ने नशे के लिए घर के बर्तन व गेंहू तक बेच दिए। उनका कहना है कि यह मामला तो सामने आ गया। ऐसे कई मामले हैं जिनमें नशा करने वाले घर का सामान तक बेच देते हैं। नशे के लिए घर के बर्तन-गेहूं तक बेच रहे युवा
पूर्व डीजीपी डीआर भट्टी का कहना है कि नशे ने गांवों को बर्बाद करके रख दिया है। गांवों में पढ़े लिखे युवकों को नौकरी नहीं मिली तो वो डिप्रेशन में आने लगे। डिप्रेशन से निकलने के लिए नशा करने लगे और अब वो आदी हो गए। उन्होंने बताया कि वो गांवों में जाकर लोगों से बात करते हैं तो वहां पर नई समस्या पैदा होने लगी है। उनका कहना है कि गांवों में नशे के कारण 40-40 साल तक लड़कों की शादियां नहीं हो रही हैं। लड़के कुंवारे घूम रहे हैं। उनका कहना है कि अगर लड़कों की शादियां नहीं होंगी तो सोशल बैलेंस बिगड़ने लग जाएगा। नशे ने बिगाड़ा सोशल सिस्टम
पॉलिटिकल एक्सपर्ट पवनदीप शर्मा ने बताया कि हाल ही में एक रिपोर्ट आई है जिसमें कहा गया है कि पंजाब में 74 लाख लोग नशा करते हैं। उन्होंने बताया कि सिंथेटिक ड्रग के कारण शहरी व ग्रामीण इलाकों में इंजेक्शन से नशा करने का प्रचलन बढ़ गया। इससे एड्स और काला पीलिया के मामले बढ़ने लग गए हैं। उन्होंने बताया क कई परिवार के सभी मेंबर एड्स के शिकार हो गए, क्योंकि सभी एक ही सिरिंज से नशा करते हैं। उनका कहना है कि नशे के कारण सोशल सिस्टम इफेक्ट हो रहा है। पंजाब में 10 हजार करोड़ रुपए का कारोबार
पूर्व डीजीपी डीआर भट्टी का कहना है कि ड्रग्स की कीमत का आंकलन करना मुश्किल है। उनका कहना है कि यह कोई ऐसा कारोबार नहीं है, जिसका कोई हिसाब किताब ऑन रिकॉर्ड होता है। पूर्व की मीडिया रिपोट्स के अनुसार पंजाब में ड्रग्स का कारोबार ₹10,000 करोड़ के करीब है। हालांकि, इसे किसी सरकारी संस्था या स्वतंत्र वैज्ञानिक शोध द्वारा आधिकारिक मार्केट-साइज के रूप में प्रमाणित नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि इस अवैध बाजार के पैमाने को समझने के लिए सबसे प्रासंगिक और वैज्ञानिक आधार पंजाब ओपिओइड डिपेंडेंस सर्वे (PODS) 2015 को माना जाता है। इस सर्वे के अनुसार, पंजाब में केवल ओपिओइड्स (हेरोइन, अफीम, भुक्की आदि) की खपत पर ही सालाना लगभग ₹7,525 करोड़ (यानी ₹20.6 करोड़ रोजाना) खर्च होने का अनुमान लगाया गया था। ड्रग्स के पैटर्न की बात करें तो कुल यूजर्स में हेरोइन का दबदबा 46% से 62% के बीच रहा है। वहीं, NCB की रिपोर्ट दर्शाती है कि अब फार्मास्यूटिकल नशों जैसे कोडीन कफ सिरप, ट्रामाडोल और अल्प्राजोलम का कारोबार तेजी से बढ़ा है। बिक्रम मजीठिया पर लगते रहे आरोप
जगदीश भोला के पकड़े जाने के वक्त उसने शिरोमणि अकाली दल के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया का नाम लिया। हालांकि मजीठिया पर इस मामले में कोई आरोप सिद्ध नहीं हुआ। पॉलिटिकल पार्टियों ने मजीठिया को ड्रग तस्करों से संबंध होने पर घेरा और उनके खिलाफ जमकर प्रचार किया। ड्रग्स के मुद्दे पर किस पार्टी ने क्या किया, जानिए… AAP सरकार के 4 साल में बड़े कदम… पंजाब में नशे के हैरान करने वाले आंकड़े
पवनदीप शर्मा ने बताया कि पंजाब में नशे के फैलते जाल को लेकर संसदीय समिति की ताजा रिपोर्ट और विभिन्न सर्वे में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक पंजाब में 66 लाख लोग ड्रग्स का सेवन करते हैं।
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पंजाब में नशा इतना बड़ा मुद्दा क्यों:एक्सपर्ट बोले- रिश्ते टूट रहे, शादियां रुक रहीं, मां-बाप के कत्ल तक हुए; ₹10 हजार करोड़ का कारोबार
