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पंजाब में नशे की समस्या को खत्म करने के लिए चलाए जा रहे सरकारी अभियानों के बीच जमीनी हकीकत पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। एक तरफ जहां राज्य सरकार और तरनतारन जिला प्रशासन गांवों में ‘नशे के खिलाफ जंग’ अभियान चलाकर लोगों को जागरूक कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो ने सरकारी दावों की पोल खोल दी है। बच्चे को नशे के धंधे में धकेलने का आरोप, वीडियो की जांच जारी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे इस वीडियो में कथित तौर पर एक छोटे बच्चे को नशे के कारोबार में शामिल देखा जा सकता है। इतना ही नहीं, आरोप है कि जब एक व्यक्ति ने इस स्थिति का विरोध किया और जानकारी साझा करने की कोशिश की, तो नशे के आदी लोगों और संदिग्ध तस्करों ने उसके साथ हाथापाई की। हालांकि, प्रशासनिक स्तर पर इस वायरल वीडियो की सत्यता की जांच की जा रही है। जागरूकता अभियानों के साथ-साथ ठोस कार्रवाई की मांग इस घटना के बाद अब यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या केवल जागरूकता अभियानों से नशे जैसी विकराल समस्या को खत्म किया जा सकता है? स्थानीय निवासियों और विश्लेषकों का मानना है कि नशामुक्त पंजाब के लक्ष्य को पाने के लिए केवल कागजी अभियानों या सभाओं तक सीमित रहना काफी नहीं है। जब तक गांवों के स्तर पर नशे की सप्लाई चेन पर प्रहार नहीं होगा और शिकायत दर्ज कराने वाले नागरिकों की सुरक्षा तय नहीं की जाएगी, तब तक जमीनी बदलाव नामुमकिन है। प्रशासन और समाज की संयुक्त जिम्मेदारी
जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों का कहना है कि नशे के खिलाफ जंग में ग्राम पंचायतों, सामाजिक संगठनों, अभिभावकों और आम नागरिकों को एकजुट होकर आगे आना होगा। इसके साथ ही, स्थानीय पुलिस और प्रशासन पर भी यह जिम्मेदारी बनती है कि वे नशे की बिक्री में संलिप्त अपराधियों पर सख्त और प्रभावी कानूनी कार्रवाई करें ताकि आम लोगों का भरोसा बहाल हो सके।
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