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बारां में पर्युषण पर्व के चौथे दिन जैन श्वेताम्बर मूर्ति पूजक संघ की ओर से कल्पसूत्र के महत्व पर विशेष प्रवचन का आयोजन किया गया। ग्राम बमूलिया स्थित श्री गुणवर्धन शंखेश्वर पार्श्वनाथ तीर्थ पर हुए कार्यक्रम में साधर्मिक बंधुओं ने कल्पसूत्र को साक्षात कल्पवृक्ष के समान बताते हुए शनिवार को होने वाले प्रभु के जन्मवाचन की जानकारी दी। संघ के राजेंद्र जैन, अशोक बोरडिया और दिनेश श्रीमाल ने बताया कि अखिल भारतीय श्री वर्धमान जैन नवयुवक मंडल जावरा से आए भावेश जी हरण, ओजस जी सुराणा और रक्षित जी कोचर ने प्रवचन दिए। आराधक जीवों के लिए प्रभु की करुणा अधिक फलदायी प्रवचन के दौरान उन्होंने कहा कि प्रभु की करुणा सभी जीवों पर समान होती है, लेकिन आराधक जीवों के लिए यह ज्यादा फलदायी होती है। साधर्मिक बंधुओं ने कल्पसूत्र के आध्यात्मिक महत्व को समझाते हुए इसे जैन समाज का महापवित्र ग्रंथ बताया। उन्होंने कहा कि जैसे हिन्दुओं में गीता, मुस्लिमों में कुरान और ईसाइयों में बाइबिल पवित्र ग्रंथ हैं, वैसे ही जैन समाज में कल्पसूत्र का विशेष धार्मिक महत्व है। वीरचरित्र से मोक्ष प्राप्ति तक की यात्रा साधर्मिक बंधुओं ने कल्पसूत्र की तुलना कल्पवृक्ष से करते हुए बताया कि इसमें श्री वीरचरित्र बीज, पार्श्वचरित्र अंकुर, नेमचरित्र स्कंध, ऋषभ चरित्र शाखाएं, स्थविरावली पुष्प और मोक्ष प्राप्ति फल के समान है। उन्होंने बताया कि चौदह पूर्वधर आचार्यदेव श्री भद्रबाहु स्वामी ने प्रत्याख्यान नामक पूर्व रूपी सागर से इसका संकलन कर रचना की है। भाया परिवार ने कल्पसूत्र बोहराया, आज से वाचन शुरू चंद्रप्रभु महिला मंडल की पूजा श्रीमाल, रेखा बोरडिया और मेघा मारू ने बताया कि शुक्रवार को हुई स्नात्र पूजा अंता विधायक प्रमोद जैन भाया परिवार की ओर से की गई। भोजन की व्यवस्था जिनेंद्र-कपिल रंगावत परिवार ने की। स्नात्र महोत्सव की पूजा राजेश जी पुजारी ने संपन्न करवाई। जिला प्रमुख उर्मिला जैन भाया ने बताया कि भाया परिवार ने कल्पसूत्र बोहराया है और इसका वाचन आज से शुरू हो गया है। उन्होंने बताया कि शनिवार को प्रभु का जन्मवाचन होगा, जिसे लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह है।
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पर्युषण पर्व में कल्पसूत्र का महत्व बताया:शनिवार को होगा प्रभु का जन्मवाचन, बारां में जैन श्वेताम्बर मूर्ति पूजक संघ ने किया आयोजन
