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फिरोजाबाद में ऑपरेशन कन्विक्शन अभियान के तहत पुलिस की प्रभावी जांच, मॉनिटरिंग सेल की निगरानी और सरकारी वकीलों की मजबूत पैरवी के चलते सोमवार को कोर्ट ने दो अलग-अलग मामलों में चार दोषियों को 10-10 साल की जेल की सजा सुनाई। कोर्ट ने सभी दोषियों पर जुर्माना भी लगाया है। पहला मामला जसराना थाना क्षेत्र का है, जो वर्ष 2018 का है। इसमें भूरा उर्फ श्यामलाल पुत्र विजय सिंह, निवासी कनकपुरा, थाना बरनाहल, मैनपुरी को दोषी ठहराया गया। पीठासीन अधिकारी देवदत्त (एएसजे/एफटीसी-2) की अदालत ने सोमवार को उसे आईपीसी की धारा 376 (दुष्कर्म) और 452 के तहत दोषी मानते हुए 10 साल की जेल की सजा सुनाई। कोर्ट ने उस पर 55 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना नहीं भरने पर दोषी को तीन महीने की अतिरिक्त जेल काटनी होगी। लाइनपार के 3 दोषियों को भी 10-10 साल जेल दूसरा मामला लाइनपार थाना क्षेत्र का वर्ष 2017 का है। इसमें तीन दोषियों को 10-10 साल की सजा सुनाई गई। पीठासीन अधिकारी श्रीमती नीलू मोगा (एडीजे-01) की अदालत ने यह फैसला सुनाया। दोषियों में अजय उर्फ बाबा पुत्र अरविंद, निवासी पीर पतंगा विष्णु, थाना लाइनपार; मन्नू उर्फ मनोज पुत्र अरविंद, निवासी नगला विष्णु, थाना लाइनपार और सौतान सिंह पुत्र करन सिंह, निवासी नगला विष्णु, थाना लाइनपार शामिल हैं। हत्या के प्रयास समेत इन धाराओं में दोषी कोर्ट ने तीनों को आईपीसी की धारा 323, 307 (जान से मारने की कोशिश), 504 और 506 के तहत दोषी पाया। तीनों पर 20-20 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है। जुर्माना न भरने पर प्रत्येक दोषी को छह महीने की अतिरिक्त जेल काटनी होगी। पुलिस टीम और पैरवी करने वालों की अहम भूमिका पुलिस के मुताबिक, जसराना मामले में सरकारी वकील मनोज शर्मा, जांच अधिकारी उपनिरीक्षक अनिल कुमार और कोर्ट पैरोकार कैलाश कुमार का खास योगदान रहा। वहीं, लाइनपार मामले में सरकारी वकील शैलेंद्र प्रताप सिंह, जांच अधिकारी उपनिरीक्षक शैलेश निगम और कोर्ट पैरोकार शैलेश कुमार की अहम भूमिका रही। पुलिस ने इन मामलों में प्रभावी पैरवी और लगातार मॉनिटरिंग के जरिए दोषियों को सजा दिलाने की बात कही है।
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फिरोजाबाद में 4 दोषियों को 10-10 साल की सजा:ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत दो मामलों में कोर्ट का फैसला, 2017 और 2018 के केस में हुई कार्रवाई
