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बगोदर में 15 दिनों से हाथियों का आतंक:खेतों में खड़ी फसलें रौंदकर कर रहे बर्बाद, घर क्षतिग्रस्त कर रहे, ग्रामीणों में भय




गिरिडीह जिले के बगोदर प्रखंड क्षेत्र में पिछले 15 दिनों से जंगली हाथियों के झुंड का उत्पात जारी है। हाथियों का झुंड रात के समय गांवों और खेतों में पहुंचकर घरों और फसलों को नुकसान पहुंचा रहा है। दोनदलो, खरी टोंगरी और पोखरियाडीह टोला में हाथियों की आवाजाही से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। दोनदलो निवासी भोला महतो के घर में घुसकर हाथियों ने चावल, आलू, प्याज सहित अन्य खाद्य सामग्री खा ली। इसके बाद घर को भी क्षतिग्रस्त कर दिया। अचानक हाथियों के घर में घुसने से परिवार के सदस्य भयभीत हो गये। ग्रामीणों के अनुसार, हाथियों का झुंड लगातार रात में गांवों और आसपास के खेतों की ओर पहुंच रहा है। इससे ग्रामीणों को जान-माल के नुकसान की आशंका बनी हुई है। हाथियों के गांव के आसपास मौजूद रहने के कारण लोग रात में घरों से बाहर निकलने से भी कतरा रहे हैं। किसानों की बढ़ी चिंता हाथियों के झुंड ने पिछले कई दिनों से किसानों की फसलों को भी भारी नुकसान पहुंचाया है। खेतों में लगी फसलों को हाथी रौंदकर बर्बाद कर रहे हैं। इससे किसानों के सामने आर्थिक नुकसान का संकट खड़ा हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि खेती उनकी आजीविका का प्रमुख साधन है। हाथियों के लगातार खेतों में पहुंचने से उनकी मेहनत पर पानी फिर रहा है। दूसरी ओर, हाथियों के गांवों में घुसने से घर और अन्य संपत्तियों के नुकसान का खतरा भी बना हुआ है। ग्रामीणों के मुताबिक, हाथियों को भगाने के लिए वन विभाग की ओर से प्रयास किये जा रहे हैं, लेकिन अब तक उनके उत्पात पर पूरी तरह अंकुश नहीं लग पाया है। झुंड के बार-बार आबादी वाले क्षेत्रों के आसपास पहुंचने से ग्रामीणों में भय बना हुआ है। आबादी से दूर भगाने की मांग ग्रामीणों ने वन विभाग और जिला प्रशासन से हाथियों के झुंड को जल्द से जल्द आबादी वाले इलाकों से दूर भगाने की मांग की है। उनका कहना है कि हाथियों की लगातार मौजूदगी से किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है। ग्रामीणों ने घरों और फसलों को हुए नुकसान का आकलन कराने तथा प्रभावित परिवारों और किसानों को उचित मुआवजा देने की भी मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि हाथियों के हमले में जिले में पहले भी कई लोगों की जान जा चुकी है। इसके बावजूद हाथियों के उत्पात की घटनाएं थम नहीं रही हैं। ऐसे में केवल हाथियों को तत्काल भगाने के बजाय समस्या के स्थायी समाधान के लिए प्रभावी योजना बनाये जाने की जरूरत है, ताकि ग्रामीणों की जान-माल और किसानों की फसल सुरक्षित रह सके। डुमरी से गावां तक हाथियों का आतंक ग्रामीणों के अनुसार, जंगली हाथियों की समस्या केवल बगोदर प्रखंड तक सीमित नहीं है। गिरिडीह जिले के डुमरी, बिरनी, सरिया, तिसरी और गावां प्रखंडों में भी समय-समय पर हाथियों का उत्पात देखने को मिलता है। इन क्षेत्रों में भी हाथियों के झुंड आबादी वाले इलाकों में पहुंचकर घरों और फसलों को नुकसान पहुंचाते रहे हैं। कई जगहों पर हाथियों ने बाउंड्रीवाल समेत अन्य संपत्तियों को भी क्षतिग्रस्त किया है। इससे ग्रामीणों के बीच लगातार भय का माहौल बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि हाथियों की आवाजाही को रोकने और लोगों को सुरक्षित रखने के लिए वन विभाग को संवेदनशील इलाकों की पहचान कर स्थायी व्यवस्था करनी चाहिए। साथ ही, हाथियों के कारण होने वाले नुकसान का समय पर आकलन कर पीड़ितों को मुआवजा दिया जाना चाहिए। ग्रामीणों ने प्रशासन से ऐसी व्यवस्था की मांग की है, जिससे इंसानों और हाथियों के बीच बढ़ रहे टकराव को कम किया जा सके।



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