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कोंडागांव में विश्वकर्मा जयंती के अवसर पर शासकीय प्राथमिक शाला खुटपारा सोनाबाल के पहली से पांचवीं कक्षा के बच्चों ने स्थानीय कला और संस्कृति को करीब से समझने के लिए लौह हस्तशिल्प कर्मशाला का शैक्षणिक भ्रमण किया। गुरुवार को आयोजित इस भ्रमण के दौरान बच्चों ने क्राफ्ट सिटी कोंडागांव से जुड़े शिल्पी सुंदरलाल पोयाम की कर्मशाला में लौह हस्तशिल्प बनाने की प्रक्रिया को करीब से देखा और समझा। धातु से कलाकृति बनने की प्रक्रिया जानी भ्रमण के दौरान बच्चों ने सिर्फ तैयार कलाकृतियां नहीं देखीं, बल्कि यह भी समझा कि एक साधारण धातु को मेहनत, हुनर और कल्पना के जरिए आकर्षक कलाकृति में कैसे बदला जाता है। हस्तशिल्पी सुंदरलाल पोयाम ने विद्यार्थियों को स्थानीय हस्तशिल्प की पहचान, उसकी उपयोगिता और सांस्कृतिक महत्व के बारे में बच्चों की समझ के अनुरूप जानकारी दी। स्थानीय बोली में समझाए औजार और तकनीक प्रधान अध्यापक हितेंद्र कुमार श्रीवास ने बच्चों को लौह हस्तशिल्प में इस्तेमाल होने वाले औजार, जरूरी सामग्री और शिल्प बनाने के अलग-अलग चरण स्थानीय बोली में समझाए। बच्चों ने कार्यशाला में मौजूद औजारों और शिल्प निर्माण की तकनीक को उत्सुकता से देखा। उन्होंने कारीगर से कई सवाल पूछकर पारंपरिक कला से जुड़ी बारीकियों को समझने की कोशिश की। मिट्टी से विश्वकर्मा प्रतिमा बनाना भी सीखा विश्वकर्मा जयंती के मौके पर शिल्पी सुंदरलाल पोयाम ने विद्यार्थियों को मिट्टी से भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा बनाने की प्रक्रिया भी समझाई। उन्होंने बताया कि किसी प्रतिमा या कलाकृति को आकार देने के लिए तकनीक के साथ धैर्य, बारीकी और कल्पनाशीलता की भी जरूरत होती है। बच्चों ने प्रतिमा निर्माण के अलग-अलग चरणों को ध्यान से देखा और शिल्पकार के काम को समझा। किताबों की जानकारी को अनुभव से जोड़ने की पहल स्कूल के अनुसार, शैक्षणिक भ्रमण का उद्देश्य बच्चों को स्थानीय कला, संस्कृति और पारंपरिक हुनर से जोड़ना था। ऐसे अनुभवों के जरिए बच्चे किताबों में पढ़ी जानकारी को वास्तविक जीवन से जोड़ पाते हैं और स्थानीय कारीगरों की मेहनत एवं कौशल को करीब से समझते हैं। दो साल से सामूहिक रूप से हो रहा विश्वकर्मा जयंती आयोजन खुटपारा सोनाबाल की सार्वजनिक हस्तशिल्प कर्मशाला में पिछले दो वर्षों से विश्वकर्मा जयंती का सामूहिक आयोजन किया जा रहा है। इस आयोजन में आसपास के गांवों के साथ अलग-अलग समुदायों के युवा, बुजुर्ग, महिलाएं और पुरुष भी उत्साह के साथ शामिल होते हैं। इस आयोजन के जरिए पारंपरिक हस्तशिल्प और स्थानीय सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
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बच्चों ने करीब से देखा लौह हस्तशिल्प का हुनर:कोंडागांव में पहली से 5वीं के विद्यार्थियों ने विश्वकर्मा जयंती पर कर्मशाला में सीखी कलाकारी
