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बरनाला में बंद पोल्ट्री फार्म खोलने पर घमासान:हिरासत में लिए किसान नेताओं को चौकी घेरकर कराया आजाद, 'AAP' नेताओं पर आरोप




बरनाला के नाईवाला और कैरे गाँव की सीमा पर स्थित एक पुराने बंद पड़े पोल्ट्री फार्म को दोबारा शुरू करने के प्रयासों ने इलाके में भारी तनाव पैदा कर दिया है। वर्षों पहले प्रदूषण और अत्यधिक गंदगी के कारण प्रशासनिक आदेशों पर बंद कराए गए इस फॉर्म को फिर से खोलने के खिलाफ स्थानीय निवासियों में गहरा रोष है। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि सत्ता पक्ष के स्थानीय नेताओं के राजनीतिक दबाव में आकर प्रशासन और पुलिस जनहित को ताक पर रखकर इसे जबरन चालू करवाना चाहते हैं। यह विवाद शनिवार सुबह उस समय और गहरा गया जब पुलिस प्रशासन ने पोल्ट्री फार्म मालिकों का पक्ष लेते हुए विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे नाईवाला और कैरे गांवों के किसान नेताओं को हिरासत में ले लिया। इस गिरफ्तारी की खबर आग की तरह पूरे इलाके में फैल गई। गिरफ्तारी के विरोध में आसपास के विभिन्न गांवों से सैकड़ों ग्रामीण क्रांतिकारी किसान यूनियन और भारतीय किसान यूनियन (डाकोंदा-बुर्ज गिल) के झंडों तले एकजुट हो गए। गुस्साए ग्रामीणों ने पक्खो कैंचियां पुलिस चौकी को चारों तरफ से घेर लिया और जोरदार धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। पुलिस को पीछे हटना पड़ा, नेताओं की बिना शर्त रिहाई बढ़ते जन-आक्रोश और चौतरफा दबाव के आगे आखिरकार पुलिस प्रशासन को झुकना पड़ा। पुलिस ने हिरासत में लिए गए सभी किसान नेताओं को बिना शर्त तुरंत रिहा कर दिया। रिहाई के बाद किसान और ग्रामीण नेताओं ने विरोध मोर्चे को संबोधित किया। उन्होंने सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (AAP) के कुछ स्थानीय नेताओं और प्रशासनिक अधिकारियों की मिलीभगत पर तीखे सवाल उठाए। किसान नेताओं ने तर्क दिया कि घनी आबादी वाले इस रिहायशी क्षेत्र में पोल्ट्री फार्म के दोबारा संचालन से भयंकर दुर्गंध फैलेगी और घातक बीमारियों का खतरा पैदा होगा। यह सीधे तौर पर आम लोगों के स्वास्थ्य और जीवन के साथ खिलवाड़ है।” सत्ताधारी नेताओं के घेराव की चेतावनी किसान यूनियनों और ग्रामीणों ने प्रशासन को दोटूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि इस विवादित पोल्ट्री फार्म को स्थायी रूप से बंद नहीं किया गया और ग्रामीणों के खिलाफ एकतरफा कार्रवाई जारी रही, तो यह आंदोलन और उग्र होगा। नेताओं ने एलान किया है कि आने वाले दिनों में विरोध प्रदर्शन का रुख मोड़कर सत्ताधारी पार्टी के नेताओं के कार्यालयों और उनके घरों तक ले जाया जाएगा।



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