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हिसार जिले के बालसमंद गांव में मनरेगा मजदूरी भुगतान पर सवाल उठे हैं। आरोप है कि एक व्यक्ति ने भारतीय नौसेना में भर्ती होने के बाद भी मनरेगा में काम किया और मजदूरी ली। शिकायतकर्ता ने पंचायत विभाग पर इस मामले को दबाने का आरोप लगाया है। गांव के सतीश कुमार ने आरटीआई और अन्य शिकायतों से यह मामला उठाया है। उनके मुताबिक, गांव के गुरमीत ने 2 मार्च 2024 को भारतीय नौसेना में ट्रेड्समैन मेट के पद पर भर्ती हुए थे। इसके बावजूद ग्राम पंचायत के मनरेगा रिकॉर्ड में उन्हें 12 मार्च से 25 मार्च 2024 तक मनरेगा के काम में मजदूरी करते दिखाया गया। नौसेना में भर्ती होने के बाद भी लगी हाजिरी शिकायतकर्ता का आरोप है कि नौसेना में भर्ती होने के बाद भी गुरमीत की मनरेगा में हाजिरी लगाई गई और उन्हें मजदूरी का भुगतान किया गया। यह हाजिरी मनरेगा मेट ने दर्ज की थी। इसे सरपंच, सेक्रेटरी और बीडीपीओ कार्यालय में जमा कराया गया था। मामला सामने आने के बाद हिसार के अधिकारियों से इसकी शिकायत की गई। शिकायत के बाद गुरमीत ने मनरेगा के तहत मिली राशि वापस जमा करा दी है। डीसी से मिलकर कार्रवाई की मांग करेंगे शिकायतकर्ता हालांकि, शिकायतकर्ता का कहना है कि राशि वापस मिलने के बाद भी इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की गई और इसे दबा दिया गया। उनका आरोप है कि पंचायत विभाग के अधिकारी अपने कार्यकाल के सरपंचों पर मेहरबान दिख रहे हैं। शिकायतकर्ता अब सोमवार को डीसी से मिलकर कार्रवाई की मांग करेंगे। कार्रवाई न होने पर वे कोर्ट में अपील दायर करने की बात कह रहे हैं। इसी तरह, डोभी गांव में भी जनता के टैक्स से लाखों रुपए का बिजली चोरी का बिल भर दिया गया था। उस मामले को भी दबाने का आरोप है। सरपंच बोलीं-रिकवरी अमाउंट जमा करवा दिया गया था इस मामले को लेकर बालसमंद गांव की सरपंच मंजू का कहना है कि मिस्त्री की हाजिरी में मजदूर की व्यक्तिगत उपस्थिति जरूरी नहीं होती। गलती से लगी हाजिरी की रिकवरी अमाउंट जमा करवा दिया गया था। वहीं सीईओ सुभाष चंद्र का कहना है कि मामले मेरे संज्ञान में नहीं था। अगर इस तरह नेवी के जवान की ड्यूटी के दौरान हाजिरी लगी है तो वह गलत है। मामले की जानकारी लेकर इसमें आगामी जो कार्रवाई बनेगी वो की जाएगी।
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बालसमंद में नेवी जवान की मनरेगा में हाजिरी, मिला मानदेय:शिकायत के बाद वापस जमा कराई राशि, पंचायत विभाग पर मामला दबाने का आरोप
