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जलगंगा संवर्धन अभियान के तहत जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने के दावों के बीच बिचौली मर्दाना तालाब प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार बना हुआ है। अभियान की सूची में शामिल होने के बावजूद बीते एक वर्ष में यहां संरक्षण या जीर्णोद्धार का कोई कार्य शुरू नहीं हो सका है। तालाब का अधिकांश हिस्सा सूख चुका है, जबकि शेष बचे जल में गंदगी और जलकुंभी फैल रही है। नगर निगम अधिकारियों के अनुसार, तालाब के संरक्षण और गहरीकरण के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की जानी है। इसके लिए तालाब की सीमाओं का स्पष्ट निर्धारण (सीमांकन) आवश्यक है। निगम द्वारा जिला प्रशासन को सीमांकन के लिए एक वर्ष पूर्व पत्र भेजा गया था, किंतु रिपोर्ट अप्राप्त रहने के कारण आगे की प्रक्रिया और डीपीआर निर्माण का कार्य रुका हुआ है। अतिक्रमण और प्रदूषण
बायपास निर्माण के बाद दो भागों में विभाजित हो चुके इस तालाब के आसपास अस्थायी गुमटियों और अतिक्रमण का दायरा बढ़ रहा है। जल आवक के मार्ग बाधित होने से पानी का स्तर लगातार गिर रहा है। वहीं, पानी में जलकुंभी फैलने और गंदे पानी के मिलने से जल गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। गहरीकरण, फेंसिंग और सफाई कार्य न होने से इसका जलग्रहण क्षेत्र और भू-जल पुनर्भरण चक्र प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है। मालूम हो, जलगंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत शहर की 27 जल संरचनाओं और तालाबों के संरक्षण की योजना तैयार की है। सीमांकन के लिए कहा है
बिचौली तालाब की सभी चैनल खत्म हो गई हैं। एक हिस्से में तो थोड़ी सी जगह है। सिर्फ बिचौली तालाब ही नहीं बल्कि सभी तालाबों के सीमांकन के लिए पत्र लिखा है।
– अभिषेक शर्मा, जलकार्य समिति प्रभारी हमने अतिक्रमण हटाए थे
तालाब एक साइड तो बाउंड्रीवॉल से कवर है। दूसरी साइड के अतिक्रमण कुछ दिन पहले ही हटाए हैं। दो महीने पहले इस क्षेत्र का कार्यभार संभाला है। सीमांकन रिपोर्ट का मामला मेरे संज्ञान में नहीं आया है।
– अनिल पटेल, तहसीलदार
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बिचौली मर्दाना तालाब:सीमांकन में अटका सुधार, न डीपीआर बनी न शुरू हुई सफाई; जलकुंभी, अतिक्रमण से बदहाल, ड्रेनेज मिला रहे
