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बिजनेसमैन से ठगी करने वाले चार आरोपी गिरफ्तार:ठगी की रकम के लिए 10 अलग-अलग बैंक खाते खुलवाए थे, 500 रुपए रोज पर रखा युवक




अजमेर में पॉलिसी रिन्यू करने के नाम पर बिजनेसमैन से ठगी करने वाले चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। आरोपियों ने ठगी की रकम को अलग-अलग बैंक खातों में डालकर इस्तेमाल किया था। ठगी की रकम किन-किन बैंक खातों में पहुंची, इसकी कड़ी जोड़ते हुए पुलिस ने अपनी जांच को आगे बढ़ाया। इसके बाद दिल्ली में दबिश देकर आरोपियों को पकड़ा। मामले में दिल्ली निवासी विकास कुमार (23) पुत्र पुरण चंद, सूर्यांश (23) पुत्र नीरज वर्मा, अमृतराज (30) पुत्र ललितेश कुमार और आसिफ (33) पुत्र हसन अहमद को गिरफ्तार किया गया है। इनमें से अमृतराज और आसिफ ग्रेजुएट है। वहीं विकास कुमार और सूर्यांश 12वीं पास हैं। पॉलिसी रिन्यू करने के नाम पर बिजनेसमैन से हुई थी ठगी मामला 23 जुलाई 2026 का है। आनासागर लिंक रोड निवासी बिजनेसमैन राजकुमार हेड़ा ने साइबर थाने में रिपोर्ट दी थी। पीड़ित ने रिपोर्ट में बताया था कि आईसीआईसीआई पॉलिसी मैच्योर होने के बाद उसे रिन्यू करने के नाम पर कुछ लोगों ने उससे संपर्क किया था। उन्होंने अलग-अलग प्रक्रिया बताते हुए 6 लाख 50 हजार रुपए ठग लिए। इसके बाद पीड़ित ने साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत की और साइबर थाने में मुकदमा दर्ज करवाया। मामले की जांच हेड कॉन्स्टेबल महिपाल चारण को सौंपी गई। कपड़े की दुकान के नाम पर फर्म, फिर 10 बैंक खाते खुलवाए पुलिस जांच में सामने आया कि मुख्य आरोपी सूर्यांश ने विकास कुमार के नाम से आईजीएमएस फर्म खुलवाई थी। इसके बाद विकास के नाम से एक कपड़े की दुकान किराए पर ली। इसी फर्म और व्यक्ति के नाम का इस्तेमाल करते हुए अलग-अलग बैंकों में 4 करंट और 6 सेविंग अकाउंट खुलवाए गए। सूर्यांश ने विकास को अपने साथ 500 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से काम पर रखा था। साइबर ठगी से आने वाली रकम विकास के इन बैंक खातों में ट्रांसफर होती थी। इसके बाद सूर्यांश इन खातों से रकम निकाल लेता था। पहले 10% कमीशन, फिर आगे ट्रांसफर पुलिस के अनुसार- रकम निकालने के बाद सूर्यांश अपना 10 प्रतिशत कमीशन रखकर बाकी रकम आरोपी अमृतराज को देता था। अमृतराज भी रकम में से 10 प्रतिशत हिस्सा रखता था और बाकी पैसा आगे ट्रांसफर कर देता था। इस तरह ठगी की रकम कई खातों और आरोपियों के बीच घूमती थी। जांच में सामने आया कि अजमेर के बिजनेसमैन से हुई ठगी के करीब 4.30 लाख रुपए विकास कुमार के बैंक खातों में ट्रांसफर हुए थे। अकाउंट ब्लॉक होते ही नया आदमी तलाशते थे पुलिस जांच में गिरोह के काम करने का तरीका भी सामने आया है। पुलिस के अनुसार-सूर्यांश, अमृतराज और आसिफ मिलकर एक पूरी चेन चला रहे थे। गिरोह पहले ऐसे व्यक्ति को अपने साथ जोड़ता था, जिसके नाम पर फर्म और बैंक खाते खुलवाए जा सकें। इन खातों में साइबर ठगी की रकम मंगवाई जाती थी। जब किसी खाते में संदिग्ध लेन-देन के कारण बैंक कार्रवाई कर खाता ब्लॉक कर देता, तो गिरोह नया व्यक्ति तलाशकर उसके नाम से नए खाते खुलवा लेता था। इस तरह साइबर ठगी की रकम को लगातार अलग-अलग खातों में घुमाने का काम किया जा रहा था। नेटवर्क की तलाश जारी पुलिस के अनुसार चारों आरोपी 2025 से मिलकर इस तरह का काम कर रहे थे। जांच में सामने आया है कि इनके खातों से देशभर में दर्ज कई साइबर ठगी के मामलों से जुड़े लेन-देन हुए हैं। पुलिस अब आरोपियों से पूछताछ कर गिरोह से जुड़े अन्य लोगों, बैंक खातों और साइबर ठगी की रकम के नेटवर्क के बारे में जानकारी जुटा रही है।



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