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बूंदी नगरपरिषद चुनाव में इस बार कई बड़े नेता हार गए। वहीं, मजदूर, युवा, छोटे व्यापारी और किसान वर्ग के प्रत्याशी चुनाव जीत गए। इन नतीजों में कई उलटफेर देखने को मिले। निर्दलीय रामवीर ने भाजपा के पूर्व सभापति के बेटे यश मोदी को हराया। नल फिटिंग का काम करने वाले महादेव ने भाजपा के शिवकरण को शिकस्त दी। मजदूरी करने वाले छोटू लाल वर्मा ने निर्दलीय अंजली वर्मा को हराया। किराने की दुकान चलाने वाले हंसराज नायक ने कांग्रेस के शंकरलाल को 990 वोटों से हराया। भाजपा और कांग्रेस के जिलाध्यक्ष अपने वार्ड हारे
भाजपा जिलाध्यक्ष रामेश्वर मीणा के निवास वाले नैनवां रोड स्थित वार्ड 40 से भाजपा प्रत्याशी हार गए। इस वार्ड में कांग्रेस के 28 वर्षीय मयंक ने भाजपा के गोपाल सिंह को 188 वोटों से हराया। मयंक ठेकेदारी का काम करते हैं और पहली बार पार्षद बने हैं। इसी तरह कांग्रेस जिलाध्यक्ष महावीर मीणा के वार्ड 37 में भी कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा। यहां भाजपा की 24 वर्षीय प्रीति गोचर ने कांग्रेस की ममता सैनी को 155 वोटों से हराया। प्रीति भी पहली बार पार्षद बनी हैं। भाजयुमो जिलाध्यक्ष की भी हार
बूंदी की नैनवां नगरपालिका के वार्ड 15 से भाजपा प्रत्याशी और भाजयुमो जिलाध्यक्ष अखिलेश जैन भी चुनाव हार गए। वे इस वार्ड में तीसरे नंबर पर रहे। यहां से किसान पुत्र निर्दलीय दिलखुश पोटर ने जीत दर्ज की। पूर्व सभापतियों के बेटों का प्रदर्शन मिला-जुला रहा। कांग्रेस से पूर्व सभापति मधु नुवाल के बेटे निशांत नुवाल वार्ड 47 से जीत गए। वहीं, पूर्व सभापति महावीर मोदी के बेटे यश मोदी वार्ड 6 से भाजपा प्रत्याशी के तौर पर हार गए।
निवर्तमान सभापति सरोज अग्रवाल के पति सुरेश अग्रवाल वार्ड 53 से चुनाव जीत गए।
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बूंदी में भाजपा-कांग्रेस के दोनों जिलाध्यक्ष अपने वार्ड हारे:पूर्व सभापति के बेटे को निर्दलीय ने हराया, भाजयुमो जिलाध्यक्ष भी हारे
