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मथुरा में करंट लगने से एक संविदा विद्युत कर्मी की मौत के बाद बुधवार को बिजली विभाग के संविदा कर्मचारियों ने विरोध प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में कर्मचारी कैंट बिजलीघर पर एकत्र हुए और विभाग के खिलाफ नारेबाजी करते हुए धरना दिया। कर्मचारियों ने सुरक्षा व्यवस्था में सुधार और कार्यप्रणाली में बदलाव की मांग की। शाम 5 बजे जिला पंचायत अध्यक्ष किशन चौधरी के आश्वासन के बाद धरना स्थगित कर दिया गया। संविदा कर्मचारी संघ के बैनर तले सुबह से ही कर्मचारी कैंट बिजलीघर पर जुटने लगे। प्रदर्शन की शुरुआत मृतक कर्मी को श्रद्धांजलि अर्पित कर की गई। इसके बाद कर्मचारियों ने विभागीय अधिकारियों के खिलाफ नारेबाजी करते हुए धरना शुरू किया। कर्मचारियों ने बताया कि हाल ही में लागू की गई नई वर्टिकल कार्य व्यवस्था के कारण संविदा कर्मियों पर अतिरिक्त कार्यभार बढ़ा है, जिससे काम के दौरान जोखिम में वृद्धि हुई है। आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा संघ के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि विभाग में पर्याप्त सुरक्षा उपकरण, प्रशिक्षित स्टाफ और आवश्यक संसाधनों की कमी है। इसके बावजूद कर्मचारियों से जोखिम भरे कार्य कराए जा रहे हैं। उनका कहना था कि यदि कार्य का स्पष्ट विभाजन और पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था होती तो इस तरह की घटना को टाला जा सकता था। कर्मचारियों ने विभाग को एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें कई मांगें रखी गईं। इनमें प्रत्येक कर्मचारी की जिम्मेदारी स्पष्ट रूप से निर्धारित करना, पहले की कार्य विभाजन व्यवस्था को बहाल करना, पर्याप्त संख्या में स्टाफ की तैनाती करना और सभी कर्मचारियों को उपकरण, सुरक्षा किट तथा अन्य आवश्यक सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराना शामिल है। साथ ही, कार्यस्थलों पर सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने की भी मांग की गई। प्रदर्शन की सूचना मिलने पर जिला पंचायत अध्यक्ष किशन चौधरी मौके पर पहुंचे। उन्होंने कर्मचारियों से बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनीं और विभागीय अधिकारियों से वार्ता कर उचित समाधान कराने का भरोसा दिलाया। इस आश्वासन के बाद कर्मचारियों ने शाम 5 बजे धरना स्थगित कर दिया। हालांकि, संघ ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
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मथुरा में संविदा कर्मी की करंट से मौत:दूसरे दिन बिजली कर्मचारियों का प्रदर्शन, सुरक्षा सुधार की मांग
