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मथुरा से कानपुर जू आ रहे भावी डॉक्टर:7 दिन की इंटर्नशिप में सीखेंगे वाइल्डलाइफ मैनेजमेंट; शेर को डार्ट करने की लेंगे ट्रेनिंग




कानपुर प्राणी उद्यान (कानपुर जू) में अब सिर्फ आम पर्यटक ही नहीं, बल्कि भविष्य के डॉक्टर भी वन्यजीवों की देखभाल और उनके इलाज की बारीकियां सीखने आ रहे हैं। मथुरा वेटेरिनरी कॉलेज के छात्र अपनी इंटर्नशिप के तहत शनिवार को कानपुर जू पहुंच रहे हैं। 7 दिनों के इस विशेष ट्रेनिंग प्रोग्राम में छात्र किताबों की थ्योरी से बाहर निकलकर जंगल और बाड़ों के जानवरों का प्रैक्टिकल इलाज करना सीखेंगे। कानपुर जू के वरिष्ठ वन्यजीव चिकित्सक डॉ. नासिर ने बताया कि मथुरा वेटेरिनरी कॉलेज से हर साल छात्रों का बैच यहाँ इंटर्नशिप के लिए आता है। इस बार 20 से 22 छात्रों का यह बैच पहले 7 दिनों की ट्रेनिंग इटावा लायन सफारी में पूरी कर चुका है और अब अगले 7 दिनों की प्रैक्टिकल ट्रेनिंग के लिए कानपुर प्राणी उद्यान आ रहा है। बीमार जानवरों की पहचान से लेकर न्यूट्रिशन तक की मिलेगी जानकारी डॉ.नासिर ने शनिवार 12 बजे बताया कि, छात्रों ने कॉलेज में थ्योरी की पढ़ाई तो पूरी कर ली है, लेकिन वन्यजीवों (वाइल्ड एनिमल्स) को अप्रोच करना और उनकी साइकोलॉजी समझना बिल्कुल अलग होता है। ट्रेनिंग के दौरान भावी डॉक्टरों को सिखाया जाएगा कि बाड़े या जंगल में देखकर कैसे पहचानें कि कोई जानवर पूरी तरह स्वस्थ है या बीमार। इसके अलावा, अलग-अलग प्रजाति के जानवरों का न्यूट्रिशन चार्ट कैसे तैयार होता है, उनका खान-पान कैसा होना चाहिए और उन्हें बीमारियों से बचाने के लिए वैक्सीनेशन और डिवॉर्मिंग (पेट के कीड़े मारने की दवा) कैसे दी जाती है, इन सभी मैनेजमेंटल पहलुओं की बारीकियां समझाई जाएंगी। डार्टिंग और एनेस्थीसिया का सीखेंगे ‘प्रैक्टिकल डोज’ इस 7 दिवसीय इंटर्नशिप का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा जानवरों को सुरक्षित पकड़ने की तकनीक होगा। छात्रों को सिखाया जाएगा कि किसी खूंखार या घायल जानवर को पकड़ने के लिए ‘फिजिकल कैप्चर’ और ‘केमिकल कैप्चर’ का इस्तेमाल कैसे किया जाता है। इसके साथ ही गन या पाइप से डार्टिंग (निशाना लगाकर बेहोशी का इंजेक्शन देना) करने का तरीका, एनेस्थीसिया और सिडेशन की सही खुराक (डोज) तय करने की प्रैक्टिकल जानकारी दी जाएगी।



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