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“घर की तंगी दूर करने निकला था मेरा समद… सोचा था दो पैसे कमाएगा तो परिवार की सांसें आसानी से चलेंगी। ब्याज पर कर्ज लेकर बेटे को परदेस भेजा था, लेकिन क्या खबर थी कि वहां खुशियों की जगह बदकिस्मती इंतजार कर रही है। मैं मरूं या जीऊं, बस एक बार बेटे को देख लूं” यह दर्द झुंझुनूं की गुलशन बानो का है। उनका छोटा बेटा अब्दुल समद (24) मार्च 2024 में रोजी-रोटी कमाने के लिए संयुक्त अरब अमीरात (UAE) गया था। परिवार के अनुसार, वहां कंपनी बदलने के बाद वह कथित धोखाधड़ी और कानूनी विवाद में फंस गया और पिछले ढाई साल से अजमान की सेंट्रल जेल में बंद है। परिवार अब भारत सरकार, विदेश मंत्रालय और राज्य सरकार से कानूनी मदद दिलाकर समद को वापस लाने की मांग कर रहा है। मां की आंखें बेटे की राह देख रही हैं गुलशन बानो ने कहा कि अब करीब तीन साल होने को आए हैं और उन्होंने अपने बेटे का चेहरा तक नहीं देखा। उनका कहना है कि रात कटती नहीं और दिन गुजरता नहीं है। परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए ब्याज पर कर्ज लेकर समद को विदेश भेजा था, लेकिन अब परिवार उसे जेल से बाहर लाने के लिए मदद का इंतजार कर रहा है। झुंझुनूं शहर की अंसारी कॉलोनी, वार्ड नंबर 58 निवासी मोहम्मद रफीक पठान के तीन बेटों में अब्दुल समद सबसे छोटा है। एजेंट को दिए थे 65 हजार रुपए समद के बड़े भाई शफीक ने बताया कि घर की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए समद को UAE भेजने का फैसला किया गया था। झुंझुनूं के ही एक एजेंट को 65 हजार रुपए दिए गए थे। एजेंट ने समद को UAE की एक PCC कंपनी में काम के लिए भेजा। शफीक के अनुसार, UAE पहुंचने के बाद शुरुआती चार महीने तक सब ठीक रहा। समद ने वहां काम किया और परिवार को उम्मीद थी कि वह कमाई कर घर की आर्थिक स्थिति सुधारने में मदद करेगा। लेकिन चार महीने काम करने के बाद कंपनी ने समद को किसी दूसरी जगह ट्रांसफर कर दिया। इसके बाद वह ऐसे कानूनी विवाद में फंस गया, जिसकी पूरी जानकारी आज तक परिवार के सामने साफ नहीं हो सकी है। परिवार का आरोप है कि समद कथित धोखाधड़ी और कानूनी दांव-पेच में फंस गया। इसके बाद उसे अजमान की सेंट्रल जेल भेज दिया गया। परिवार के अनुसार वह पिछले ढाई साल से जेल में बंद है। महीने में सिर्फ एक बार होती है फोन पर बात परिवार के अनुसार जेल के नियमों के तहत समद को महीने में केवल एक बार परिवार से फोन पर बात करने की अनुमति मिलती है। परिवार का कहना है कि इस फोन कॉल के लिए भी भारत से पैसे भेजने पड़ते हैं। इसके बाद ही समद परिवार से बात कर पाता है। हर महीने फोन आने पर समद अपनी मां से कहता है, “अम्मी, हिम्मत मत हारना… मैं जल्द घर लौटूंगा।” इसके बाद फोन कट जाता है और परिवार को अगली कॉल के लिए फिर करीब 30 दिन इंतजार करना पड़ता है। मां बोली- एक बार बेटे को देख लूं समद की मां गुलशन बानो ने कहा, “हमने तो सोचकर भेजा था कि बेटा मदद करेगा, लेकिन आज हम खुद इतने बेबस हैं कि अपने बच्चे को छुड़ा नहीं पा रहे। ढाई साल से इतना तापड़ा पीटा है, रात-दिन एक कर दिया। कोई रिश्तेदार जाता है तो मिलने नहीं दिया जाता।” उन्होंने कहा, “सरकार से, किसी भी मददगार भाई से बस यही हाथ जोड़कर गुहार है- मेरे मासूम बच्चे को सही-सलामत झुंझुनूं पहुंचा दो। बस एक बार अपने बेटे को देख लूं, फिर चाहे मेरी जान ही क्यों न निकल जाए।” परिवार ने सरकार से कानूनी मदद मांगी परिवार के अनुसार स्थानीय स्तर पर और जनप्रतिनिधियों के पास भी मदद की गुहार लगाई गई, लेकिन अब तक कोई ठोस मदद या समाधान नहीं मिला है। अब परिवार ने भारत सरकार, विदेश मंत्रालय और राज्य सरकार से मामले में उच्च स्तर पर हस्तक्षेप करने की मांग की है। परिवार चाहता है कि अजमान में बंद अब्दुल समद को सरकारी या कानूनी सहायता (Legal Aid) उपलब्ध कराई जाए, ताकि वहां चल रहे कानूनी मामले में उसकी मदद हो सके और उसे जेल से रिहा कराकर सुरक्षित भारत वापस लाया जा सके।
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मां बोलीं- 'बस एक बार बेटे को देख लूं':ढाई साल से UAE की अजमान जेल में बंद समद, परिवार ने सरकार से कानूनी मदद मांगी
