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मुजफ्फरपुर में ‘मां की रसोई’ पिछले 5 साल से हर रात सैकड़ों गरीबों की मुफ्त में भूख मिटा रही है। यह सेवा शहर के सदर अस्पताल रोड स्थित जिला यक्ष्मा केंद्र के गेट पर बिना किसी रुकावट के चलाई जा रही है। इसके जरिए बेसहारा और जरूरतमंद लोगों को रात का भोजन मिलता है। इस काम को प्रकाश कुमार की संस्था ‘मां की रसोई’ करती है। उनके इस प्रयास से मुजफ्फरपुर रेलवे स्टेशन, सरकारी बस स्टैंड, सदर अस्पताल परिसर और आसपास के फुटपाथों पर रात गुजारने वाले सैकड़ों लोग भूखे नहीं सोते। हर रात जिला यक्ष्मा केंद्र के गेट के पास गरीब और दिहाड़ी मजदूर लाइन में लगकर सम्मान के साथ भोजन लेते हैं। रोज करीब 100 से ज्यादा जरूरतमंदों को भरपेट खाना दिया जाता है। यह खाना देने का काम आंधी, तूफान या तेज ठंड में भी कभी नहीं रुकता। ‘शुरुआत में यह काम काफी चुनौतीपूर्ण था’ संस्था के संचालक प्रकाश कुमार बताते हैं कि कुछ साल पहले शहर में गरीबी से जूझ रहे लोगों और फुटपाथ पर तड़पते बच्चों-बुजुर्गों की दयनीय हालत देखकर दिल पसीज गया था। मानवता के नाते मन में ख्याल आया कि क्यों न इन भूखे पेट सोने वालों के लिए कुछ किया जाए। बस इसी एक सोच के साथ सेवा की शुरुआत की। प्रकाश बताते हैं कि शुरुआत में यह काम काफी चुनौतीपूर्ण था, लेकिन धीरे-धीरे उनकी इस सच्चाई और लगन को देखकर स्थानीय लोग और समाज के सक्षम आम जन भी इस मुहिम से जुड़ने लगे। आज की तारीख में यह पूरी रसोई आम जनों के सहयोग और अपने निजी खर्च को मिलाकर सुचारू रूप से चलाई जा रही है।
शहर के लिए प्रेरणा का स्रोत ‘मां की रसोई’ का यह सेवा भाव आज पूरे मुजफ्फरपुर शहर के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुका है। यह इस बात का जीता-जागता प्रमाण है कि अगर मन में सच्ची संवेदना और समाज के प्रति कुछ करने का जज्बा हो, तो संसाधनों की कमी कभी आड़े नहीं आती। स्थानीय लोग प्रकाश कुमार और उनकी टीम के इस जज्बे को सलाम कर रहे हैं, जिसने मुजफ्फरपुर की सड़कों पर मानवता को जिंदा रखा है।
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