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मोहाली पुलिस की FIR पर सवाल:परिवार का आरोप- मुख्य साजिशकर्ता को निकाला, DGP-SSP को शिकायत; आपत्ति लेडी इंस्पेक्टर का नाम नही




एयरोसिटी में लेडी पुलिस इंस्पेक्टर के परिवार पर हुए कथित हमले के मामले में FIR दर्ज होने के बाद अब पुलिस की कार्रवाई पर ही सवाल खड़े हो गए हैं। पीड़ित परिवार का आरोप है कि जीरकपुर पुलिस ने मामले में कमजोर धाराएं लगाईं और कथित मुख्य साजिशकर्ता महिला को FIR में आरोपी नहीं बनाया। परिवार की ओर से अब पंजाब के डीजीपी को ऑनलाइन शिकायत भेजकर FIR में उचित धाराएं जोड़ने और निष्पक्ष जांच की मांग की गई है। मामले में जीरकपुर थाने में FIR नंबर 451, दिनांक 15 अगस्त 2026 दर्ज की गई है। शिकायत के मुताबिक इसमें रूप लाल और सुखदीप कुमार को आरोपी बनाया गया है और BNS की धारा 351(3), 115(2) और 126(2) लगाई गई हैं। परिवार का आरोप- मुख्य साजिशकर्ता का नाम FIR से गायब पीड़ित गुरजीत कौर की ओर से दी गई शिकायत में आरोप लगाया गया है कि घटना के पीछे गीता रानी को मुख्य साजिशकर्ता बताया गया था, लेकिन उसका नाम FIR में शामिल नहीं किया गया। परिवार का कहना है कि पुलिस को दी गई शिकायत और घटना के पूरे तथ्यों को FIR में शामिल नहीं किया गया। शिकायत में साफ तौर पर कहा गया है कि पुलिस ने घटना के गंभीर पहलुओं को दर्ज नहीं किया और मौजूदा धाराएं घटना की प्रकृति और कथित अपराध की गंभीरता को पूरी तरह नहीं दर्शातीं। घर में घुसकर लाठी से हमला करने का आरोप परिवार का आरोप है कि हमलावर उनके घर में घुसे, गाली-गलौज की और लाठी को हथियार के तौर पर इस्तेमाल करते हुए मारपीट की, जिससे शारीरिक चोटें आईं। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि घटना घर के अंदर हुई और इससे परिवार की सुरक्षा तथा गरिमा प्रभावित हुई। इसी आधार पर पीड़ित पक्ष का कहना है कि सिर्फ मारपीट और धमकी से जुड़ी धाराएं पर्याप्त नहीं हैं और घटना के अन्य पहलुओं को भी FIR में शामिल किया जाना चाहिए। डीजीपी से तीन धाराएं जोड़ने की मांग गुरजीत कौर ने अपनी शिकायत में पुलिस से BNS की धारा 333, 74 और 61 जोड़ने की मांग की है। शिकायत के मुताबिक धारा 333 घर में घुसकर हमला करने, धारा 74 गरिमा/मॉडेस्टी से जुड़े आरोप और धारा 61 कथित साजिश से संबंधित बताकर जोड़ने की मांग की गई है। साथ ही गीता रानी का नाम FIR में शामिल करने की मांग भी की गई है। पुलिस को दिया अपना बयान भी रिकॉर्ड में शामिल करने की मांग पीड़ित महिला ने शिकायत में यह भी कहा है कि पुलिस को दिया गया उसका बयान FIR के रिकॉर्ड का हिस्सा बनाया जाए। इसके अलावा उसने मामले की निष्पक्ष और बिना किसी पक्षपात के जांच कराने की मांग की है। परिवार का सवाल- अगर शिकायत में गंभीर आरोप थे तो FIR में क्यों नहीं? पीड़ित पक्ष का मुख्य सवाल यही है कि अगर घटना में घर में घुसने, लाठी से हमला करने और कथित साजिश जैसे आरोप लगाए गए थे, तो FIR में इन पहलुओं को शामिल क्यों नहीं किया गया। परिवार अब चाहता है कि जांच के दौरान उसके बयान और उपलब्ध साक्ष्यों को भी रिकॉर्ड पर लिया जाए। शिकायत के साथ परिवार ने मौजूदा FIR, पुलिस को दी गई मूल शिकायत और संबंधित दस्तावेज/सबूत, जिनमें CCTV फुटेज और बयान शामिल हो सकते हैं, संलग्न किए जाने की जानकारी दी है।



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