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झालावाड़ के बालकवि मनीष कुमार सेन ने राजस्थानी भाषा की उपेक्षा के विरोध में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और राज्यपाल हरिभाऊ बागडे को ‘काळी पाती’ भेजी है। यह विरोध सरकारी विश्वविद्यालयों में राजस्थानी भाषा का स्वतंत्र विभाग स्थापित न होने और लोक भवन (राजभवन) द्वारा ‘शास्त्रीय मराठी भाषा अध्ययन केंद्र’ खोलने के निर्देशों के बाद सामने आया है। झालावाड़ जिले के ग्राम सरड़ा निवासी बालकवि मनीष कुमार सेन ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को काले कागज पर सफेद स्याही से लिखी ‘काळी पाती’ भेजी। वहीं, महामहिम राज्यपाल एवं कुलाधिपति हरिभाऊ बागडे को संवैधानिक मर्यादा का पालन करते हुए सफेद कागज पर काली स्याही से विशेष पत्र भेजकर अपना विरोध दर्ज कराया। बालकवि मनीष कुमार सेन ने बताया कि उन्होंने पहले भी अपनी मातृभाषा के सम्मान में पत्र भेजे हैं। पूर्व में राजस्थानी भाषा दिवस पर देश के प्रधानमंत्री को ‘पीली चिट्ठी’ भेजी गई थी, जिस पर प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) द्वारा डाक से जवाब भेजकर मांग को यथोचित कार्रवाई के लिए आगे बढ़ाने की आधिकारिक सूचना दी गई थी। इसके बाद गत राजस्थान दिवस पर उन्होंने मुख्यमंत्री को ‘केसरिया पाती’ भेजकर उम्मीद जताई थी। हालांकि, हाल ही में राजभवन द्वारा राजस्थानी से पहले अन्य भाषाओं के केंद्र खोलने के निर्देशों से राजस्थानी भाषा प्रेमियों में निराशा है, जिसके चलते अब उन्हें काले कागज पर ‘काळी पाती’ लिखकर अपनी मातृभाषा के प्रति मौन विरोध दर्ज कराना पड़ रहा है।
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राजस्थानी भाषा की उपेक्षा पर बालकवि का विरोध:मुख्यमंत्री और राज्यपाल को भेजी 'काळी पाती'
