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राजस्थान के सरकारी हॉस्पिटल्स में ICU की चौंकाने वाली हकीकत:डॉक्टर-नर्स की कमी, वेंटिलेटर-मशीनें गायब, कई जगह आग बुझाने तक के इंतजाम नहीं




जिस इंटेंसिव केयर यूनिट (ICU) में मरीज जिंदगी बचने की आखिरी उम्मीद लेकर पहुंचते हैं, वहीं उनकी जिंदगी दांव पर है। राजस्थान के अधिकतर सरकारी हॉस्पिटल्स के इन आईसीयू में ट्रेंड डॉक्टर औन नर्स तक की कमी है। कहीं जरूरी मशीनें गायब हैं तो कई हॉस्पिटल्स के ICU में आग बुझाने तक के इंतजाम नहीं। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर प्रदेश के 55 जिला अस्पतालों में हुए गैप एनालिसिस में ये हकीकत सामने आई है। ज्यादतर ICU ऐसे ही मिले हैं, जहां तय मानक पूरे नहीं हो रहे। भास्कर टीम ने राजधानी जयपुर के कांवटिया हॉस्पिटल में जाकर जमीनी पड़ताल की। वहां भी ICU में बेड की संख्या तय मानकों से भी कम मिली। गंभीर मरीजों के शरीर की अहम जानकारी देने वाली मशीनें तक नहीं थीं। सबसे पहले देखिए- जयपुर के हॉस्पिटल के ICU की हकीकत 8 बेड की जगह 5, ABG मशीन भी नहीं जयपुर का कांवटिया हॉस्पिटल SMS मेडिकल कॉलेज से अटैच है। हॉस्पिटल में ICU दूसरी मंजिल पर बना है। हमने मौके पर जाकर देखा तो 5 बेड मिले, जबकि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार लेवल-1 मानकों के तहत यहां 6 से 8 बेड होने चाहिए थे। यहां दो मरीज भर्ती मिले। अस्पताल के डॉक्टरों ने खुद स्वीकार किया कि यहां ट्रेंड डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ की कमी है। SMS मेडिकल कॉलेज से तीन रेजिडेंट डॉक्टर रोटेशन से ड्यूटी करने आते हैं। एनेस्थीसिया विभाग के रेजिडेंट और कंसल्टेंट भी आते हैं, लेकिन उनकी ड्यूटी ऑपरेशन थिएटर में ज्यादा रहती है। ऐसे में ICU में उनकी उपलब्धता बहुत सीमित रहती है। ICU में भर्ती गंभीर मरीजों के फेफड़ों में ऑक्सीजन का दबाव, पीएच लेवल जैसी कई महत्वपूर्ण जानकरियां देने वाली ABG मशीन भी उपलब्ध नहीं थी। जांच में सामने आया कि अकेले जयपुर के कांवटिया अस्पताल में नहीं बांसवाड़ा, करौली, हिंडौन और धौलपुर के अस्पतालों के ICU में भी यही हालात हैं। 1. बांसवाड़ा: ICU में फायर NOC नहीं, जरूरी उपकरण भी कम गैप एनालिसिस रिपोर्ट के अनुसार बांसवाड़ा जिला हॉस्पिटल के ICU की जांच में फायर NOC नहीं मिली। स्वास्थ्य विभाग की चेकलिस्ट के मुताबिक पोर्टेबल मल्टी-पैरामीटर मॉनिटर के साथ ट्रांसपोर्ट वेंटिलेटर भी उपलब्ध नहीं है। इसके अलावा पोर्टेबल मल्टी-पैरामीटर मॉनिटर, ट्रांसपोर्ट वेंटिलेटर और बॉडी वार्मिंग डिवाइस जैसे बेहद जरूरी उपकरण भी वहां उपलब्ध नहीं हैं। 2. करौली और हिंडौन सिटी : फायर NOC और इमरजेंसी एग्जिट तक नहीं हिडौन सिटी हॉस्पिटल् के ICU के लिए भी फायर NOC नहीं है। इससे भी हैरान करने वाली बात ये है कि ICU में इमरजेंसी एग्जिट तक नहीं है। लेवल-1 के अनुसार मरीजों की संख्या के अनुपात में नर्सिंग स्टाफ की कमी भी सामने आई। करौली जिला हॉस्पिटल की फायर NOC के रिन्यूअल प्रोसेस में है। 3. धौलपुर: NOC के लिए आवेदन किया, अभी मिली नहीं धौलपुर जिला हॉस्पिटल् में भी ICU के लिए फायर NOC उपलब्ध नहीं है। अस्पताल की ओर से NOC के लिए आवेदन किया जा चुका है। राजस्थान में कितने अस्पतालों का गैप एनालिसिस हुआ? राजस्थान में 55 जिला अस्पताल हैं। स्वास्थ्य विभाग के अफसरों का कहना है कि इनमें से 16 अस्पतालों में जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जा रहा है। इसके अलावा 6 मेडिकल कॉलेजों के साथ राजमेस के मेडिकल कॉलेज भी संचालित हैं। स्वास्थ्य विभाग के कार्यवाहक निदेशक डॉ. नरोत्तम शर्मा के अनुसार सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर सभी अस्पतालों का ICU गैप एनालिसिस कराया गया है। अब जानते हैं लेवल-1 ICU में क्या-क्या होना जरूरी है? भारत सरकार ने आईसीयू के लिए तीन लेवल निर्धारित किए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने दो महिने पहले ICU को लेकर तैयार किए गए मानकों को स्वीकार करते हुए सभी राज्यों को लेवल-1 आईसीयू मानक लागू करने को कहा था। साथ ही तय समय सीमा में कमियां दूर करने की योजना पेश करने को कहा था। राजस्थान में भारत सरकार की गाइडलाइन के अनुसार स्वास्थ्य विभाग ने गैप एनालिसिस कराया है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद भारत सरकार ने ICU के लिए ये एक समान मानक तय किए हैं… इंफ्रास्ट्रक्चर: ICU में सामान्यतः 6 से 8 बेड, पर्याप्त स्पेस, इमरजेंसी और ऑपरेशन थिएटर (OT) के नजदीक लोकेशन, बिजली बैकअप, फायर सेफ्टी और इमरजेंसी एग्जिट जरूरी हैं। मेडिकल उपकरण और मशीनें : हर बेड पर ऑक्सीजन और सक्शन की सुविधा, मल्टी-पैरामीटर मॉनिटर, सिरिंज व इन्फ्यूजन पंप, वेंटिलेटर, डिफिब्रिलेटर, पोर्टेबल सक्शन, 12-चैनल ECG, ग्लूकोमीटर और अन्य जरूरी उपकरण होने चाहिए। ABG, एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड और जरूरी लैब सुविधाएं भी उपलब्ध होनी चाहिए। डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ : ICU की देखरेख के लिए क्रिटिकल केयर का अनुभव या ट्रेनिंग प्राप्त योग्य डॉक्टर होना चाहिए। 24 घंटे MBBS या उससे अधिक योग्यता वाला डॉक्टर ड्यूटी पर उपलब्ध रहना चाहिए। नर्सिंग स्टाफ: सामान्य मरीजों की निगरानी के लिए 2 से 3 मरीज पर एक नर्सिंग स्टाफ और गंभीर या वेंटिलेटर पर भर्ती मरीज के लिए एक मरीज पर एक नर्स का प्रावधान है। रिकॉर्ड मेंटेनेंस : मेडिकल रिकॉर्ड- जैसे डॉक्टर के नोट्स, नर्सिंग रिकॉर्ड, जांच रिपोर्ट और इलाज की फाइलें सुरक्षित रखी जानी चाहिए।



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