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लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने गुरुवार को छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों के चुनावों में वोट चोरी का आरोप लगाया। कांग्रेस मुख्यालय में करीब 55 मिनट की प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। राहुल ने कहा कि उनके टेक्निकल एक्सपर्ट ने चुनाव आयोग की गलती पकड़ी है। उन्होंने दावा किया कि चुनाव प्रक्रिया में गड़बड़ी के कारण वोट चोरी हुई। राहुल गांधी ने कहा कि उन्होंने ज्ञानेश कुमार की CEC के रूप में नियुक्ति का विरोध किया था, लेकिन सरकार ने उनकी आपत्ति नहीं मानी। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने मुख्य चुनाव आयुक्त को कानून से ऊपर रखा। राहुल ने कहा कि चुनाव आयोग को कार्यपालिका के प्रभाव से स्वतंत्र रहना चाहिए। छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों का जिक्र राहुल गांधी ने अपने आरोपों के दौरान छत्तीसगढ़ के साथ हरियाणा, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और गुजरात का भी जिक्र किया। उन्होंने सवाल उठाया कि इन राज्यों में सत्ता विरोधी रुझान अचानक कैसे खत्म हो गया। राहुल ने दावा किया कि 2024 के लोकसभा चुनाव और इसके बाद हुए विधानसभा चुनावों में चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित किया गया। हालांकि, ये सभी दावे राहुल गांधी और कांग्रेस की ओर से लगाए गए आरोप हैं। बोले- वोट चोरी के बाद कानून चोरी राहुल गांधी ने कहा कि अगर वोट चोरी के जरिए किसी को चुनाव में जीत मिलती है और उन्हीं वोटों से चुने गए सांसद कानून बनाते हैं तो यह मामला सिर्फ वोट चोरी तक सीमित नहीं रहता। उन्होंने इसे ‘वोट चोरी, कानून चोरी और संस्था चोरी’ से जोड़ा। SIR और वोटर लिस्ट पर भी सवाल राहुल ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि विपक्ष इस मुद्दे पर एकजुट है और सभी विपक्षी दल मिलकर इसके खिलाफ काम करेंगे। उन्होंने जेन-जी के युवाओं के लिए वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने में परेशानी होने का भी दावा किया। राहुल ने कहा कि पहले चुनावी व्यवस्था को दुरुस्त किया जाना चाहिए और इसके बाद पूरे मामले की जांच होनी चाहिए। 2 चुनाव आयुक्तों ने 4 अहम सवाल उठाए … 1. Form-6 में नया सवाल जोड़ा गया, जिसे आयुक्तों ने गैरकानूनी बताया नया वोटर बनने के लिए Form-6 में एक नया सवाल जोड़ा गया था। इसमें पूछा गया कि क्या आवेदक या उसके माता-पिता/दादा-दादी का नाम पिछली SIR वाली वोटर लिस्ट में था। इस सवाल का जवाब देना जरूरी था। जवाब न देने पर प्रोसेस आगे नहीं बढ़ती। विवेक जोशी ने मई में कहा कि नियम बदले बिना Form-6 में ऐसा बदलाव नहीं किया जा सकता। संधू ने भी सहमति जताई। इसके बावजूद बदलाव हुआ। 13 अगस्त को संधू ने इसे ‘अनधिकृत और गैरकानूनी’ बताते हुए हटाने की मांग की। 2. वोटर डेटाबेस का कंट्रोल किसके पास चुनाव आयोग के मुताबिक, वोटर लिस्ट तैयार करने की जिम्मेदारी विधानसभा स्तर के ERO की होती है। लेकिन संधू और जोशी ने सवाल उठाया कि क्या ERO की वोटर डेटाबेस तक पहुंच धीरे-धीरे सीमित की जा रही है? जोशी ने वोटर डेटाबेस के ‘धीरे-धीरे दिल्ली में केंद्रीकरण’ पर सवाल उठाया। संधू ने भी कहा कि कई राज्य अधिकारी ERONet पर पूरी पहुंच नहीं होने की बात कह रहे हैं। दोनों ने सिस्टम की सुरक्षा और किसे डेटा बदलने की अनुमति है, इसकी जांच की मांग की। कानून क्या कहता है संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है, जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त और दो चुनाव आयुक्त होते हैं। तीनों का दर्जा बराबर है। मुख्य चुनाव आयुक्त ‘बराबरों में पहले’ होते हैं, बाकी आयुक्तों से ऊपर नहीं। 2023 के कानून के मुताबिक आयोग को जहां तक संभव हो, सर्वसम्मति से फैसले लेने चाहिए। मतभेद होने पर फैसला बहुमत से होता है। काम और जिम्मेदारियों का बंटवारा भी तीनों की सहमति से होना चाहिए।
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राहुल गांधी बोले-छत्तीसगढ़ के चुनाव में वोट चोरी हुई:हमारे टेक्निकल एक्सपर्ट ने चुनाव आयोग की गलती पकड़ी; सरकार ने उन्हें कानून से ऊपर रखा
