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रिटायरमेंट के बाद चौकीदार को थानाध्यक्ष ने पहुंचाया घर:जमुई में 25 साल तक दिया सेवा, थानाध्यक्ष बोले- मैंने अपनी वर्दी का फर्ज निभाया




जमुई में सोमवार देर शाम बरहट थाना के थानेदार कुमार संजीव खुद सरकारी गाड़ी चलाकर 25 साल तक पुलिस विभाग में सेवा देने वाले रिटायर चौकीदार रामाशंकर पासवान को उनके घर छोड़ने गए। इस घटना ने सड़क पर मौजूद कई लोगों को चौंका दिया। रामाशंकर पासवान बरहट थाना क्षेत्र के नुमर महाल के निवासी हैं। उन्होंने पुलिस विभाग में लगभग 25 वर्षों तक चौकीदार के रूप में अपनी सेवाएं दीं। सोमवार को उनकी सेवानिवृत्ति पर बरहट थाना परिसर में एक विदाई समारोह आयोजित किया गया। इस समारोह में पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों ने उन्हें माला पहनाकर तथा अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया। उनके सहयोगियों ने उनके लंबे सेवाकाल और योगदान की सराहना की। थानाध्यक्ष ने संभाली ड्राइविंग सीट आमतौर पर सेवानिवृत्त कर्मचारी विदाई के बाद अपने साधनों से घर लौटते हैं या उन्हें सरकारी वाहन से भेजा जाता है। हालांकि, बरहट थानाध्यक्ष कुमार संजीव ने एक अनूठी मिसाल पेश की। उन्होंने खुद सरकारी वाहन की ड्राइविंग सीट संभाली और रामाशंकर पासवान को अपने साथ बैठाकर उनके घर की ओर चल दिए। जब सरकारी गाड़ी रामाशंकर पासवान के दरवाजे पर पहुंची और परिजनों ने देखा कि वाहन खुद थानेदार चला रहे हैं, तो वे आश्चर्यचकित रह गए। थानेदार ने रामाशंकर को सम्मानपूर्वक गाड़ी से उतारा और घर तक पहुंचाया। परिजनों ने बताया कि उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की थी कि एक चौकीदार की सेवानिवृत्ति पर थानेदार स्वयं गाड़ी चलाकर उन्हें घर छोड़ने आएंगे। उनके लिए यह सम्मान किसी पुरस्कार से कम नहीं था। थानाध्यक्ष बोले- मैंने अपनी वर्दी का निभाया फर्ज बरहट थानाध्यक्ष कुमार संजीव अपने इस कार्य को कोई विशेष उपलब्धि नहीं मानते। उन्होंने कहा, “मैंने कुछ नहीं किया। यह मेरा कर्म है और मैंने अपनी वर्दी का फर्ज निभाया है।”उन्होंने कहा कि रामाशंकर पसवान एक बहुत ही सज्जन और शालीन व्यक्ति है। ईश्वर से कामना है कि यह हमेशा स्वस्थ रहें और खुश रहे सोमवार की रात बरहट में थानेदार की ड्राइविंग सीट और चौकीदार की बगल वाली सीट ने एक ऐसी तस्वीर बना दी, जिसका संदेश साफ था—पद भले छोटा-बड़ा हो, सम्मान में कोई फर्क नहीं होना चाहिए। सोमवार की रात बरहट में थानेदार की ड्राइविंग सीट और चौकीदार की बगल वाली सीट ने एक ऐसी तस्वीर बना दी, जिसका संदेश साफ था—पद भले छोटा-बड़ा हो, सम्मान में कोई फर्क नहीं होना चाहिए।



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