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'रैगिंग की शिकायत करने पर किया फेल':एम्स के स्टूडेंट रहे डॉ. विक्रांत ने कहा- स्वतंत्र रूप से परीक्षा हुई तो हुए पास




देशभर के मेडिकल संस्थानों में छात्रों के मानसिक उत्पीड़न, रैगिंग और अकादमिक अन्याय के मामलों को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। इसी कड़ी में एम्स जोधपुर के एम.सीएच. न्यूरोसर्जरी (बैच 2020-23) के छात्र डॉ. विक्रांत शर्मा ने अपने साथ हुई कथित अकादमिक धांधली और उत्पीड़न को लेकर मीडिया से बात की है। उनका आरोप है कि वर्ष 2021 में रैगिंग की शिकायत करने के बाद विभाग के कुछ वरिष्ठ चिकित्सकों ने प्रतिशोध की भावना से उन्हें लगातार तीन बार फेल किया, जबकि बाद में स्वतंत्र परीक्षा में वे उत्तीर्ण साबित हुए। अब उन्हें चौथे प्रयास में उत्तीर्ण होने की डिग्री दी जा रही है, जबकि उनका दावा है कि उन्हें पहले ही प्रयास में पास घोषित किया जाना चाहिए था। डॉ. शर्मा का कहना है कि एम्स जोधपुर में आयोजित होने जा रहे दीक्षांत समारोह की मुख्य अतिथि केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण) अनुप्रिया पटेल हैं। उन्होंने स्वयं इस मामले में जांच करवाने का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक कोई प्रभावी जांच नहीं हुई। ऐसे में वे दीक्षांत समारोह से पहले पूरे मामले को मीडिया और देश के सामने रखना चाहते हैं, ताकि उन्हें न्याय मिल सके और उनका करियर बचाया जा सके। रैगिंग की शिकायत के बाद शुरू हुआ संघर्ष
डॉ. विक्रांत शर्मा के अनुसार वर्ष 2021 में उन्होंने अपने वरिष्ठ छात्र डॉ. नितिन कुमार द्वारा की गई रैगिंग की शिकायत संस्थान के अधिकारियों से लेकर उच्च स्तर तक की। उनका आरोप है कि इसी शिकायत के बाद विभाग के कुछ वरिष्ठ चिकित्सकों ने उनके प्रति पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाया और उनके पूरे शैक्षणिक मूल्यांकन को प्रभावित किया। उन्होंने अपने पत्र में विभाग के वरिष्ठ चिकित्सकों पर निष्पक्ष मूल्यांकन नहीं करने तथा जानबूझकर उनके करियर को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया है। पहले प्रयास में जानबूझकर फेल करने का आरोप
डॉ. शर्मा का कहना है कि जून 2023 में आयोजित एम.सीएच. न्यूरोसर्जरी की अंतिम परीक्षा में उन्हें जानबूझकर असफल घोषित किया गया। इसके बाद उन्होंने सूचना के अधिकार (RTI) के माध्यम से दस्तावेज प्राप्त किए। जिनसे उन्हें कथित रूप से तीन साल के आंतरिक थ्योरी मूल्यांकन को गलत तरीके से दर्शाने,तीन वर्ष के दौरान प्रैक्टिकल इंटरनल असेसमेंट नियमानुसार आयोजित ही नहीं करने, उनकी थीसिस, शोध कार्य, प्रकाशनों और पुरस्कारों का भी मूल्यांकन नहीं करने जैसी गंभीर अनियमितताओं की जानकारी मिली। स्वतंत्र परीक्षा में हुए पास डॉ. शर्मा का कहना है कि दिसंबर 2024 में सुरक्षा व्यवस्था और वीडियोग्राफी के बीच स्वतंत्र बाहरी परीक्षा आयोजित कराई गई, जिसमें वे सफल रहे और अंततः एम.सीएच. न्यूरोसर्जरी परीक्षा उत्तीर्ण कर ली। उनका सवाल है कि यदि वे स्वतंत्र और निष्पक्ष परीक्षा में पास हो सकते हैं तो जून 2023 में उन्हें असफल क्यों घोषित किया गया? सांसदों और केंद्रीय मंत्री तक पहुंचा मामला डॉ. शर्मा ने बताया कि उन्होंने अपनी पीड़ा राज्यसभा सांसद राजेन्द्र गहलोत और सांसद हनुमान बेनीवाल के माध्यम से केंद्र सरकार तक पहुंचाई। इसके बाद केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने 22 अप्रैल 2026 को राज्यसभा सांसद राजेन्द्र गहलोत को लिखे पत्र में स्वीकार किया कि उन्हें डॉ. विक्रांत शर्मा की ओर से रैगिंग संबंधी शिकायत प्राप्त हुई है तथा उन्होंने इस मामले को उचित कार्रवाई के लिए संबंधित विभाग को भेज दिया है। डॉ. शर्मा का कहना है कि मंत्री स्तर पर पत्र जारी होने के बावजूद आज तक निष्पक्ष जांच नहीं हुई और न ही उनकी शिकायतों का समाधान किया गया। चौथे प्रयास की डिग्री नहीं, पहले प्रयास का न्याय चाहिए। डॉ. शर्मा का कहना है कि वर्तमान में उन्हें चौथे प्रयास में उत्तीर्ण होने की डिग्री दी जा रही है, जबकि उनके अनुसार यदि निष्पक्ष मूल्यांकन होता तो वे जून 2023 में ही पहले प्रयास में सफल घोषित हो जाते। उनका कहना है कि मेडिकल शिक्षा में प्रयासों (Attempts) का सीधा प्रभाव चिकित्सक के भविष्य, सरकारी नियुक्तियों, सुपर स्पेशियलिटी अवसरों तथा निजी प्रैक्टिस की विश्वसनीयता पर पड़ता है। इसलिए चौथे प्रयास की डिग्री उनके पूरे करियर पर स्थायी नकारात्मक प्रभाव डालेगी। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की माग की है।



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