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रोशनी बिश्नोई मामले में SIT ने गोपनीय रिपोर्ट सौंपी:कुलदीप बिश्नोई की बहन की मुश्किलें और बढ़ीं; भगोड़ा मामले में 8 अक्टूबर को सुनवाई




हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत चौधरी भजनलाल की बेटी और पूर्व सांसद कुलदीप बिश्नोई की इकलौती बहन रोशनी बिश्नोई की मुश्किलें फिलहाल थमती नजर नहीं आ रही हैं। गुरुग्राम कोर्ट (राज्य बनाम अनूप बिश्नोई व अन्य) में मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान उन्हें भगोड़ा घोषित किए जाने के मुद्दे पर कोई अंतिम फैसला नहीं हो सका। न्यायिक मजिस्ट्रेट (प्रथम श्रेणी) श्रीदेव राय की अदालत ने इस मामले पर निर्णय सुरक्षित रखते हुए अगली सुनवाई 8 अक्टूबर 2026 निर्धारित की है। मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) के सदस्य श्री राज करण ने व्यक्तिगत रूप से पेश होकर अदालत में एक विस्तृत जवाब और सहायक दस्तावेज दाखिल किए। एसआईटी ने अदालत से गुहार लगाई कि इस रिपोर्ट को सीलबंद लिफाफे में ही रखा जाए और शिकायतकर्ता या आरोपी रोशनी बिश्नोई समेत किसी भी पक्ष को इसकी प्रति न दी जाए। एसआइटी का तर्क-रिपोर्ट खुली तो जांच बाधित होगी
एसआईटी का तर्क है कि जांच अभी संवेदनशील दौर में है और इस स्तर पर सामग्री का खुलासा होने से जांच बाधित हो सकती है। कोर्ट ने रिपोर्ट को देखकर वापस सीलबंद कर दिया है और एसआईटी की 6 सप्ताह तक रिपोर्ट गोपनीय रखने की अर्जी पर अगली तारीख पर विचार करने को कहा है। सुनवाई के दौरान कोर्ट में तीखी बहस देखने को मिली आरोपी विकास बिश्नोई के वकील: अधिवक्ता प्रवीन दहिया ने जोर देकर कहा कि रोशनी बिश्नोई के खिलाफ अदालत से उद्घोषणा जारी हुई थी। हालांकि वह बाद में पुलिस जांच में शामिल हुईं, लेकिन कोर्ट के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने में विफल रही हैं। इसलिए उन्हें कानूनन घोषित अपराधी (PO) करार दिया जाना चाहिए। रोशनी बिश्नोई के वकील: अधिवक्ता प्रशांत यादव ने इसका कड़ा विरोध किया। उन्होंने कहा कि रोशनी बिश्नोई जांच में शामिल हो चुकी हैं, पुलिस पूछताछ में सहयोग किया है और जांच एजेंसी ने उन्हें पुलिस जमानत पर रिहा भी किया है। ऐसे में उद्घोषणा की कार्रवाई को खत्म किया जाना चाहिए। रोशनी मामले में कोर्ट की अहम टिप्पणियां पुलिस जांच और कोर्ट में पेशी अलग: अदालत ने स्पष्ट किया कि पुलिस के समक्ष जांच में शामिल होना और अदालत के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना दो अलग-अलग बातें हैं। हालांकि, बाद में जांच में शामिल होने और पुलिस जमानत मिलने जैसे घटनाक्रमों को पूरी तरह नजरअंदाज भी नहीं किया जा सकता। वकील के जरिये हाजिरी व्यक्तिगत उपस्थिति नहीं: कोर्ट ने अपने आदेश में साफ किया कि केवल वकील के माध्यम से अदालत में पेश होने को उद्घोषणा का व्यक्तिगत पालन नहीं माना जाएगा। अगली तारीख पर होगा फैसला: कोर्ट ने कहा कि रोशनी बिश्नोई के खिलाफ उद्घोषणा की कार्रवाई जारी रहेगी, वापस ली जाएगी या उन्हें PO घोषित किया जाएगा, इस पर 8 अक्टूबर को फैसला लिया जाएगा।



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