बोकारो में शिक्षा विभाग में वेतन घोटाला पूरी तरह साजिश के तहत किया गया। मध्य विद्यालय सदमाकला, पेटरवार के शिक्षक संतोष कुमार शर्मा का निधन 14 अगस्त 2021 को हुआ। लेकिन बिल नंबर 77/2024-24 में 431852 रुपए की निकासी गई। यह वेतन वृद्धि राशि जुलाई 2007 से जून 2024 तक की है। इस तरह स्व. शर्मा के निधन के लगभग दो साल 10 महीने की अवधि को भी अंतर वेतन वृद्धि की गणना में शामिल कर राशि की निकासी कर ली गई। जो जान बूझकर की गई वित्तीय अनियमितता की ओर इशारा करता है। जबकि इस मामले में निकासी करने से पहले डीडीओ सह बीईईओ प्रतिमा दास ने सावधानी नहीं बरती, इसलिए इस घोटाले में वह संदेह के घेरे में हैं। जांच में यह बातें सामने आई है कि भुगतान प्रक्रिया में निर्धारित नियमों और कोषागार संहिता के नियमों का उल्लंघन किया गया है। डीडीओ पोर्टल की दो स्तरीय प्रकिया में निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी की स्वीकृति के बिना ऐसा भुगतान संभव नहीं है। गौरतलब है कि संतोष शर्मा के निधन के बाद उनके वेतन वृद्धि की राशि उनकी प|ी किरण शर्मा को मिलनी थी। लेकिन बिलिंग इंचार्ज ने तीन बार में 14.65 लाख रुपए अपने खाते जमा करवा लिया। शिक्षक की मौत के बाद भी कर दिया वेतन वृद्धि 14 अगस्त 2021 : शिक्षक संतोष कुमार शर्मा का निधन जुलाई 2024 तक : वेतन वृद्धि की गणना बिल संख्या 77/2024-25 : ₹4,31,852 की निकासी जांच : नियमों के उल्लंघन के संकेत मौत 2021 में 2024 तक निकाला वेतन सवाल जो उठ रहे हैं {मृत्यु के बाद वेतन वृद्धि कैसे जोड़ी गई? {डीडीओ ने भुगतान से पहले सत्यापन क्यों नहीं किया? {ट्रेजरी और डीडीओ पोर्टल की दो-स्तरीय मंजूरी कैसे मिली? इस भुगतान के लिए जिम्मेदार कौन? यह मामला डिजिटल रिकॉर्ड जांच के दौरान पकड़ में आया। जांच के दौरान डीडीओ पोर्टल के डिजिटल सत्यापन प्रक्रिया, भुगतान अभिलेखों व अन्य रिकॉर्ड की जांच की गई। तब यह मामला पकड़ में आया कि सरकारी राशि का अनधिकृत हस्तांतरण सुनियोजित ढंग से किया गया है। वास्तविक लाभुक को उसकी देय राशि से वंचित रखा गया। जब मामला पकड़ में आया, तो लाभुक को आरोपी द्वारा चेक के माध्यम से राशि का भुगतान किया गया, लेकिन इस दौरान राशि का ब्याज नहीं दिया गया। सरकारी नियमों के अनुसार घोटाला किए गए कुल 14.65 लाख रुपए का इस अवधि का ब्याज करीब 80 हजार रुपए हो सकता है। भुगतान का विवरण वेतन भरपाई पंजी में दर्ज नहीं किया स्व. संतोष शर्मा के वेतन वृद्धि की निकासी करने के बाद साक्ष्य छिपाने का पूरा प्रयास किया गया। भुगतान का विवरण वेतन भरपाई पंजी में दर्ज नहीं किया गया था। यह न केवल विभागीय वित्तीय अनियमितता का मामला है, बल्कि पूरी वित्तीय व्यवस्था के प्रतिकूल है। सरकारी वित्तीय लेन-देन में भरपाई पंजी मूल अभिलेख है, जिसका समसामयिक व सत्य संधारण अनिवार्य है। भुगतान के समय रिकॉर्ड में दर्ज नहीं करना जिम्मेवारों के कार्यशैली पर प्रश्नचिह्न खड़े करता है। जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि प्रथम दृष्टा गलत भुगतान को छिपाने व उसे वैध स्वरूप देने के लिए ऐसा किया गया है। यह कृत्य केवल विभागीय नियमों का उल्लंघन ही नहीं, बल्कि सरकारी अभिलेखों के संधारण में गंभीर लापरवाही है। साजिश के तहत की गड़बड़ी, डिजिटल रिकॉर्ड की जांच से पकड़ाया
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शिक्षा विभाग घोटाला… 34 माह पहले हुई मौत, फिर भी दिया लाभ, निकले 4.31 लाख
