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जिले के श्रीडूंगरगढ़ में प्रस्तावित ट्रॉमा सेंटर और उपजिला चिकित्सालय के निर्माण को लेकर विवाद गहरा गया है। विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के नगर, प्रखंड और जिला स्तर के कई पदाधिकारियों ने ट्रॉमा सेंटर का स्थान बदलने के कथित प्रयासों के विरोध में अपने दायित्वों से सामूहिक इस्तीफा दे दिया है। पदाधिकारियों ने आरोप लगाया है कि राजनीतिक प्रभाव के चलते 3 साल से निर्माण कार्य रोक रखा गया है। इसके पीछे ट्रॉमा सेंटर का स्थान बदलने की साजिश है। 1990 से चल रहे संघर्ष का दिया हवाला विहिप के निवर्तमान प्रखंड अध्यक्ष संतोष बोहरा ने बताया कि नेशनल हाईवे पर स्थित करीब सात बीघा विवादित भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए संगठन साल 1990 से संघर्ष करता रहा है। उनका दावा है कि वर्ष 2014-15 में इसी विवाद को लेकर श्रीडूंगरगढ़ में सांप्रदायिक तनाव हुआ था। उस दौरान सात दिन तक कर्फ्यू लगा, सैकड़ों युवाओं पर मुकदमे दर्ज हुए और कई लोगों को जेल भी जाना पड़ा। उन्होंने कहा कि तत्कालीन विधायक किशनाराम नाई की मध्यस्थता में दोनों समुदायों के बीच समझौता हुआ था। बाद में वर्ष 2023 में ट्रॉमा सेंटर और उपजिला चिकित्सालय की घोषणा होने पर दोनों समुदायों ने मानवता के आधार पर इस भूमि पर अपना दावा छोड़ दिया। जिससे क्षेत्र में सौहार्द का माहौल बना। सरकार बदली, निर्माण रूका पदाधिकारियों का आरोप है कि सरकार बदलने के बाद ट्रॉमा सेंटर के निर्माण में लगातार बाधाएं खड़ी की गईं और इसे दूसरी जगह स्थानांतरित करने के प्रयास किए गए। उनका कहना है कि इस मुद्दे को लेकर विधायक और संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारियों के सामने भी बात रखी गई, लेकिन समाधान नहीं निकला। इससे परेशान होकर उन्होंने अपने पद छोड़ने का निर्णय लिया। इन लोगाें ने छोड़े पद सामूहिक रूप से दायित्व छोड़ने वालों में विहिप के जिलाध्यक्ष जगदीश स्वामी, जिला उपाध्यक्ष प्रदीप जोशी, जिला सहमंत्री वासुदेव सारस्वत, जिला प्रशासन प्रमुख श्याम सुंदर जोशी, प्रखंड अध्यक्ष संतोष बोहरा, दीपक सेठिया, भीखाराम सुथार, त्रिलोकचंद, मुकेश प्रजापत, नगर अध्यक्ष मनीष नोलखा, लालसिंह, भूषण करवा, अशोक नाई तथा बजरंग दल के केके जांगिड़, पवन व्यास और श्याम गिरी सहित अन्य कार्यकर्ता शामिल हैं। ‘निजी लालच की भेंट चढ़ रहा संघर्ष’ विहिप पदाधिकारी संतोष बोहरा ने आरोप लगाया कि ट्रॉमा सेंटर का स्थान बदलने का प्रयास मानवता और वर्षों तक संघर्ष करने वाले युवाओं के त्याग को निजी स्वार्थ की भेंट चढ़ाने जैसा है। जिला प्रशासन प्रमुख श्याम सुंदर जोशी ने कहा कि नेशनल हाईवे पर महाविद्यालय के सामने स्थित सात बीघा भूमि ट्रॉमा सेंटर के लिए सबसे उपयुक्त है और इसी स्थान पर निर्माण होने से आमजन को सुविधा मिलेगी। आंदोलन फिर तेज करने की चेतावनी विहिप पदाधिकारियों ने कहा कि यदि ट्रॉमा सेंटर का निर्माण घोषित स्थान पर शुरू नहीं किया गया तो आंदोलन दोबारा तेज किया जाएगा। उनका कहना है कि संगठन की एकमात्र मांग है कि ट्रॉमा सेंटर और उपजिला चिकित्सालय का निर्माण उसी भूमि पर हो, चाहे सरकार कराए या भामाशाहों के सहयोग से। स्थान परिवर्तन किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। दो समुदायों ने मिलकर दी जमीन जिस जमीन पर ट्रोमा सेंटर बनाने की मांग की जा रही है, उस पर अर्से से विवाद था। दो समुदाय इस पर अपना अपना कब्जा जता रहे थे। इस बीच तत्कालीन विधायक किशनाराम नाई ने समझौता करवाया और दोनों को आधी आधी जमीन उपलब्ध कराई। बाद में दोनों समुदायों ने मिलकर ये जमीन ट्रोमा सेंटर के लिए देना तय किया। जिसका बकायदा पंचायत से पट्टा भी बना। इसके बाद भी जमीन को लेकर विवाद चल रहा है, जबकि नेशनल हाइवे पर ये जमीन पहले से उपलब्ध है। विधायक को घेर रहे विहिप नेता दरअसल, विहिप नेताओं को इस बात से नाराजगी है कि वर्तमान भाजपा विधायक बार बार ये कह रहे हैं कि ट्रोमा सेंटर के लिए जमीन और बजट दोनों सरकार देगी। विहिप नेता बोहरा का कहना है कि जब जमीन पहले से उपलब्ध है तो दूसरी जमीन की बात क्यों हो रही है? इस बारे में विधायक ताराचंद सारस्वत से पक्ष लेने का प्रयास किया गया लेकिन उन्होंने फोन पर रिप्लाई नहीं किया।
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श्रीडूंगरगढ़ ट्रॉमा सेंटर जमीन विवाद VHP का बड़ा कदम:भाजपा से नाराज होकर अध्यक्ष सहित पूरी कार्यकारिणी ने पद छोड़ा
