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सऊदी का यूरोप को अगले महीने तेल देने से इनकार:इराक से ड्रोन हमले के बाद पाइपलाइन तबाह हुई, मरम्मत में 5-6 हफ्ते लगेंगे




सऊदी अरब ने अपनी एक अहम तेल पाइपलाइन पर हुए ड्रोन हमले के बाद अगले महीने यूरोपीय ग्राहकों को कच्चे तेल की सप्लाई रोक दी है। ब्लूमबर्ग के मुताबिक, सऊदी अरामको ने कम से कम दो यूरोपीय रिफाइनिंग कंपनियों को इसकी जानकारी दी है। यह फैसला सभी यूरोपीय खरीदारों पर लागू होगा। पिछले हफ्ते हुए हमले में ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन के तीन पंपिंग स्टेशन क्षतिग्रस्त हुए हैं। सऊदी अरब ने इसके लिए इराक में सक्रिय ईरान समर्थित मिलिशिया के ड्रोन को जिम्मेदार ठहराया है। लाल सागर तक तेल पहुंचाती है यह पाइपलाइन सऊदी अरामको की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन करीब 1,200 किलोमीटर लंबी है। यह सऊदी अरब के पूर्वी हिस्से से तेल को लाल सागर तक पहुंचाती है। यहां से तेल को दूसरे देशों तक भेजा जा सकता है। हमले के बाद पाइपलाइन को बंद कर दिया गया। 17 सितंबर को सामने आई सैटेलाइट तस्वीरों और उद्योग से जुड़े लोगों की जानकारी के मुताबिक, इसके रास्ते में मौजूद तीन पंपिंग स्टेशन को नुकसान पहुंचा है। यूरोप की कंपनियां दूसरे रास्ते तलाशने लगीं पाइपलाइन बंद होने के बाद यूरोप की कुछ कंपनियों ने सऊदी तेल की जगह दूसरे देशों से कच्चा तेल खरीदना शुरू कर दिया है। पोलैंड की तेल कंपनी ऑर्लेन ने शुक्रवार से अब तक 10 से ज्यादा टेंडर जारी किए हैं, ताकि वैकल्पिक सप्लाई हासिल की जा सके। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के मुताबिक, OECD में शामिल यूरोपीय देशों ने जून में सऊदी अरब से रोजाना करीब 5.77 लाख बैरल कच्चा तेल खरीदा था। अगले महीने सऊदी सप्लाई नहीं मिलने पर यूरोपीय रिफाइनरियों को इस कमी को दूसरे स्रोतों से पूरा करना पड़ेगा। होर्मुज की रुकावट के बीच पाइपलाइन और अहम ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन ऐसे समय बंद हुई है जब पिछले छह महीने से होर्मुज स्ट्रेट में रुकावट के बीच मिडिल ईस्ट से तेल की सप्लाई प्रभावित हो रही है। सऊदी अरब इस पाइपलाइन के जरिए तेल को लाल सागर तक भेजकर होर्मुज स्ट्रेट पर अपनी निर्भरता कम कर सकता था। इसके जरिए रोजाना करीब 40 लाख से 50 लाख बैरल कच्चा तेल भेजा जा रहा था। यह मात्रा दुनिया की कुल तेल सप्लाई का करीब 4 से 5% है। इसी वजह से यह पाइपलाइन सऊदी अरब के लिए बेहद अहम रास्ता बनी हुई थी। अब इसके बंद होने से सऊदी तेल की सप्लाई के लिए वैकल्पिक रास्तों और स्रोतों पर दबाव बढ़ गया है। साथ ही, यूरोपीय खरीदारों को सऊदी तेल की जगह दूसरे स्रोतों पर निर्भर रहना पड़ेगा। होर्मुज के बाद बाब अल-मंदेब पर भी बढ़ा खतरा होर्मुज के बाद अब बाब अल-मंदेब स्ट्रेट पर भी संकट बढ़ गया है। यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने लाल सागर के किनारे तेजी से अपना कब्जा बढ़ाया है। हाल की रिपोर्टों के मुताबिक, हूतियों ने पेरिम द्वीप और यमन के पश्चिमी तट के कई इलाकों पर नियंत्रण कर लिया है। इससे बाब अल-मंदेब में जहाजों की आवाजाही पर खतरा बढ़ गया है। बाब अल-मंदेब एशिया और यूरोप के बीच जहाजों की आवाजाही का अहम रास्ता है। लाल सागर और स्वेज नहर के जरिए इसी रास्ते से तेल और दूसरे सामान से लदे जहाज यूरोप और दूसरे बाजारों तक पहुंचते हैं। हाल की स्थिति के कारण यहां से गुजरने वाले जहाजों की संख्या भी प्रभावित हुई है। भारत सऊदी से कितना तेल खरीदता है? भारत सऊदी अरब से हर साल करोड़ों टन कच्चा तेल खरीदता है। वित्त वर्ष 2024-25 में भारत ने सऊदी से 33.14 मिलियन टन यानी करीब 3.31 करोड़ टन कच्चा तेल खरीदा। यह भारत के कुल कच्चे तेल आयात का 13.58% था। यानी सऊदी की सप्लाई में बड़ी रुकावट आती है तो भारत को भी वैकल्पिक सप्लायरों से ज्यादा तेल खरीदना पड़ सकता है। हालांकि, भारत के पास रूस, इराक, अमेरिका, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका जैसे दूसरे स्रोत भी हैं, इसलिए सऊदी से सप्लाई घटने का मतलब यह नहीं है कि भारत में तुरंत तेल की कमी हो जाएगी। ————————-
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