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सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के चूरना में पहली बार हाथियों के बीच लड़ाई का मामला सामने आया है। इस लड़ाई में घायल हथिनी स्मिता की सोमवार शाम मौत हो गई। वन्यजीव चिकित्सक उस समय मौजूद नहीं थे। उपचार से पहले ही शाम करीब 5 बजे हथिनी ने दम तोड़ दिया। हथिनी की मौत की सूचना मिलते ही वन विभाग में हड़कंप मच गया। डिप्टी डायरेक्टर ऋषिभा नेताम, एसडीओ और रेंजर मौके के लिए रवाना हुए। स्मिता की लड़ाई हाथी कृष्णा से हुई थी। कृष्णा करीब चार साल पहले कर्नाटक से चूरना लाया गया था। 9 अगस्त की रात हुई थी लड़ाई सूत्रों के अनुसार, 9 अगस्त की रात हाथी कृष्णा ने हथिनी स्मिता पर हमला किया था। सोमवार सुबह जब महावत जंगल से हाथियों को वापस लेकर आए, तब स्मिता के शरीर पर गहरा घाव दिखाई दिया। इसके बाद मामले की जानकारी सामने आई। हथिनी की हालत को देखते हुए वन्यप्राणी चिकित्सक (वेटरिनियन) को सूचना दी गई। हालांकि, चिकित्सक शासकीय कार्य से बाहर थे। उनके पहुंचने से पहले ही सोमवार शाम करीब 5 बजे हथिनी स्मिता की मौत हो गई। जानकारी के अनुसार हाथी कृष्णा आक्रमक प्रवृत्ति का है। मादा हथिनी स्मिता प्रशिक्षित होनहार थी। जिसकी उम्र करीब 50साल थी। आक्रमक हाथी के साथ हथिनी को रखने और फिर घायल हथिनी की मौत से एसटीआर प्रबंधन की व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे है। अधिकारियों से नहीं हो सका संपर्क मामले में जानकारी लेने के लिए डिप्टी डायरेक्टर ऋषिभा नेताम और रेंजर बलवंत सिंह से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका।
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सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में 50 साल की हथिनी की मौत:नर्मदापुर में महावत ने जताई लड़ाई की संभावना, वेटरिनियन नहीं थे मौजूद
