Headlines

समस्तीपुर के गांव में 8 फीट तक बाढ़ का पानी:बुजुर्गों-बच्चों को रिश्तेदारों के यहां भेज रहे, चूल्हा-अनाज डूबे, चापाकल से निकल रहा गंदा पानी




पानी हेलकर बहू को गांव से बाहर निकाला और उसे मायके भेज दिया। सड़कों पर आठ फीट से अधिक पानी है। घर में भी करीब दो फीट पानी भर गया है। चूल्हा और जलावन भी डूब गया है। पानी में पड़े घर की अकेले देखभाल कर रही हूं। पलायन के लिए नाव का इंतजार कर रही मोहनपुर प्रखंड की रहने वाली शीला देवी ने दैनिक भास्कर से बातचीत में बाढ़ से आई परेशानी का जिक्र किया। दरअसल, समस्तीपुर जिला मुख्यालय से करीब 60 किलोमीटर दूर मोहनपुर प्रखंड का चापर गांव गंगा नदी की बाढ़ में पूरी तरह घिर गया है। गांव के निचले इलाकों में छह से आठ फीट तक पानी भर गया है, जबकि कई घरों में दो से तीन फीट तक पानी प्रवेश कर चुका है। घरों में पानी घुसने से चूल्हा, अनाज और जलावन तक डूब गए हैं। कई चापाकल भी पानी में डूब चुके हैं। जो चापाकल बचे हैं, उनसे भी साफ पानी की जगह कचरा निकल रहा है। ऐसे में बाढ़ से घिरे लोगों के सामने पीने के पानी का संकट खड़ा हो गया है। पहले बाढ़ से जुड़ी 2 तस्वीरें… दैनिक भास्कर की टीम ग्रामीणों की मदद से नाव के सहारे फोरलेन से करीब एक किलोमीटर दूर धैचा के पेड़ों के बीच से गुजरते हुए चापर मोहल्ले तक पहुंची। गांव में चारों ओर पानी ही पानी नजर आ रहा था। कई घरों में लोग छतों पर रहने को मजबूर हैं, जबकि बड़ी संख्या में ग्रामीण सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन कर रहे हैं। घर डूबा, चूल्हा बुझा; पलायन के लिए नाव का इंतजार पलायन के लिए नाव का इंतजार कर रही शीला देवी ने बताया कि गांव की सड़कों पर आठ फीट से अधिक पानी है। उनके घर में भी करीब दो फीट पानी भर गया है। चूल्हा और घर में रखा जलावन भी डूब गया है। उन्होंने किसी तरह पानी हेलकर अपनी बहू को गांव से बाहर निकाला और उसे मायके भेज दिया। घर की सुरक्षा के लिए वह खुद रुकी हुई हैं। शीला देवी ने बताया कि जिस तेजी से पानी बढ़ रहा है, उसे देखते हुए गांव में रहना खतरे से खाली नहीं है। गांव के अंदर खाने-पीने की समस्या भी बढ़ गई है। एक दिन पहले गांव से करीब तीन किलोमीटर दूर डुमरी से लिट्टी मंगाई थी, लेकिन आज पानी और बढ़ जाने के कारण खाने-पीने का सामान भी नहीं आ सका। उनके पुत्र रंजन कुमार ने बताया कि चापाकल डूब चुका है। बचे हुए चापाकल से भी पानी के साथ कचरा निकल रहा है। मजबूरी में इसी पानी को उबालकर पीना पड़ रहा है। रागिनी देवी ने बताया कि जिन लोगों के पास छत वाले मकान हैं, वे छत पर खाना बना रहे हैं। चिलचिलाती धूप में भी लोगों को छत पर ही समय गुजारना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने आपसी सहयोग से नाव की व्यवस्था की है और सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन कर रहे हैं। यह स्थिति किसी एक-दो परिवार की नहीं, बल्कि चापर गांव के एक हजार से अधिक लोगों की है। खेत-खलिहान पहले ही पानी में डूब चुके हैं और अब घरों में भी पानी प्रवेश कर गया है। इसके बाद ग्रामीण जरूरी सामान लेकर सुरक्षित स्थानों की ओर निकलने लगे हैं। गांव में अब वही लोग रह गए हैं, जो अपने घरों की सुरक्षा के लिए रुके हुए हैं। नाव नहीं मिली तो बैलगाड़ी के ट्यूब से बना ली देसी नाव ग्रामीण उमेश कुमार ने बताया कि गांव के लोगों के लिए अभी तक सरकारी नाव का परिचालन शुरू नहीं किया गया है। इसके कारण ग्रामीणों ने बैलगाड़ी के ट्यूब में हवा भरकर उसके ऊपर तख्ता और बांस बांधकर उसे नाव का रूप दे दिया है। इसी के सहारे किसी तरह डुमरी से खाने-पीने का सामान गांव तक पहुंचाया जा रहा है। ग्रामीणों को गांव से करीब तीन किलोमीटर पानी के बीच चलने के बाद मुख्य सड़क तक पहुंचना पड़ता है। ग्रामीण सोगारथ राय ने बताया कि पानी काफी बढ़ गया है और चापाकल भी डूब चुके हैं। जो चापाकल अभी पानी से बाहर हैं, वहीं से पीने के लिए पानी लाया जा रहा है। गंगा के पानी का इस्तेमाल बर्तन आदि धोने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि अब तक प्रशासन की ओर से गांव में कोई व्यवस्था नहीं की गई है। रात के समय स्थिति और भयावह हो जाती है। ग्रामीण शिवशंकर राय ने बताया कि पिछले चार दिनों से गांव की स्थिति लगातार बिगड़ रही है। पानी लगातार बढ़ रहा है और सड़क पूरी तरह डूब चुकी है। ऐसे में नाव ही लोगों का सहारा है। सरकारी नाव नहीं मिलने के कारण निजी नाव के सहारे ग्रामीणों को गांव से बाहर निकाला जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई है। प्रशासन को तत्काल गांव में नाव की व्यवस्था करनी चाहिए, ताकि बाढ़ में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके। पशुचारे का संकट, गांव में फंसे पशु चापर गांव की आबादी करीब तीन हजार बताई जा रही है। गंगा का जलस्तर बढ़ने के बाद ग्रामीण अपने पशुओं को लेकर पहले ही सुरक्षित स्थानों पर चले गए थे। लेकिन अब पानी और बढ़ जाने के कारण गांव में बचे लोगों के साथ पशु भी फंस गए हैं। पशुओं को बाहर निकालना मुश्किल हो गया है। पानी बढ़ने से पशुओं के लिए चारे का संकट भी गहरा गया है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर जल्द पानी कम नहीं हुआ या प्रशासन की ओर से चारे और नाव की व्यवस्था नहीं की गई तो पशुओं के सामने भी संकट बढ़ सकता है। इन इलाकों में पहुंचा बाढ़ का पानी गंगा नदी में उफान के कारण मोहनपुर प्रखंड की धरनीपट्टी पश्चिम, दक्षिणी डुमरी, राजपुर जौनापुर और विशनपुर बेड़ी पंचायतों के निचले इलाकों में बाढ़ का पानी पहुंच गया है। वहीं, मोहिउद्दीननगर प्रखंड की रासपुर पतसिया पूरब व पश्चिम, हरैल, कुरसाहा, दुबहा, महमद्दीपुर, तेतारपुर और बोचहा पंचायतों के निचले इलाकों में भी पानी फैल गया है। गंगा का पानी फैलने के कारण मोहिउद्दीननगर प्रखंड में आनंदगोलवा-गोला पट्टी, दुबहा-अदलपुर, दियारा मोड़-चपरा और विशनपुर बेड़ी-मटिओर जाने वाली सड़कों पर भी पानी चढ़ गया है। स्थानीय लोगों के अनुसार, चापर गांव के वार्ड संख्या 9, 12, 13, 14 और 15 में पानी तेजी से फैल रहा है। ग्रामीणों के सामने अब घर बचाने के साथ-साथ भोजन, पीने के पानी, पशुचारे और सुरक्षित स्थान तक पहुंचने का संकट खड़ा हो गया है।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *