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सिकंदराराऊ समाधान दिवस में 65 शिकायतें, 3 का निपटारा:सांसद ने लेखपालों को फटकारा; सरकारी वाहनों से ईंधन की बर्बादी भी दिखी




सिकंदराराऊ तहसील सभागार में शनिवार को आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस में कुल 65 शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनमें से तीन का मौके पर ही निस्तारण किया गया। इस दौरान हाथरस के मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) पी.एन. दीक्षित ने अध्यक्षता की। कार्यक्रम में क्षेत्रीय सांसद अनूप प्रधान वाल्मीकि भी मौजूद रहे, जिन्होंने अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर नाराजगी व्यक्त की। वहीं, तहसील परिसर में कई सरकारी वाहनों को घंटों तक स्टार्ट रखकर एसी चलाने का मामला भी चर्चा का विषय बना। समाधान दिवस में राजस्व, भूमि विवाद, चकबंदी, मेड़ विवाद और पुलिस विभाग सहित विभिन्न विभागों से संबंधित शिकायतें प्राप्त हुईं। कुल 65 शिकायतों में से केवल 3 का ही तत्काल समाधान हो सका। शेष मामलों को संबंधित विभागों को समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण कार्रवाई के निर्देश के साथ भेजा गया। इस दौरान उपजिलाधिकारी धर्मेंद्र सिंह चौहान, तहसीलदार, विद्युत विभाग के एसडीओ, सीएचसी प्रभारी, बीडीओ, एडीओ सहित कई अधिकारी उपस्थित थे। क्षेत्रीय सांसद अनूप प्रधान वाल्मीकि ने फरियादियों द्वारा दिए गए प्रार्थना पत्रों पर दर्ज मोबाइल नंबरों पर स्वयं फोन कर फीडबैक लिया। इस दौरान कुछ शिकायतकर्ताओं ने लेखपाल और कानूनगो पर गुणवत्तापूर्ण निस्तारण न करने की शिकायत की। इस पर सांसद ने संबंधित कर्मचारियों को कड़ी फटकार लगाई और निर्देश दिए कि किसी भी मामले में लापरवाही या खानापूर्ति न की जाए। उन्होंने अधिकारियों को गंभीरता से कार्य करने को कहा, ताकि फरियादियों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। समाधान दिवस के दौरान तहसील परिसर में एक और तस्वीर चर्चा का विषय बनी। कई सरकारी वाहनों के चालक लंबे समय तक गाड़ियों को स्टार्ट कर एसी चलाते हुए बैठे रहे। स्थानीय लोगों ने बताया कि जब भी समाधान दिवस या किसी बड़े अधिकारी का दौरा होता है, तब अधिकांश सरकारी गाड़ियां घंटों तक इसी तरह स्टार्ट रहती हैं। लोगों ने इसे सरकारी ईंधन और धन का अनावश्यक दुरुपयोग बताया। यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब हाल ही में प्रधानमंत्री ने भी नागरिकों और सरकारी तंत्र से अनावश्यक रूप से वाहनों का उपयोग कम करने तथा ईंधन बचाने की अपील की थी। ऐसे में तहसील परिसर में दिखाई दिया यह नजारा सरकारी संसाधनों के जिम्मेदाराना उपयोग पर गंभीर सवाल खड़े करता है।



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