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सिद्धार्थनगर जिले में मानसून के सक्रिय होने के बावजूद प्रमुख नदियों का जलस्तर पूरी तरह नियंत्रण में है। ड्रेनेज खंड द्वारा शनिवार को जारी दैनिक गेज रिपोर्ट के अनुसार, बानगंगा, राप्ती, बूढ़ी राप्ती और कूड़ा सहित सभी प्रमुख नदियां खतरे के निशान से 3 से 6 मीटर नीचे बह रही हैं। जिले में फिलहाल कहीं भी बाढ़ जैसी स्थिति नहीं है। बानगंगा नदी बानगंगा बैराज पर 89.20 मीटर पर स्थिर है, जो खतरे के निशान से 4.22 मीटर नीचे है। राप्ती नदी बांसी पुल पर 81.30 मीटर और परसोहन घाट पर 89.83 मीटर दर्ज की गई, जो 3.60 मीटर और 5.72 मीटर खतरे के स्तर से नीचे है। बूढ़ी राप्ती नदी मुंहचोरवा घाट पर 4.26 मीटर और ककरही पुल पर 5.52 मीटर खतरे के निशान से नीचे है। इसी तरह, कूड़ा नदी आलमनगर पर 3.90 मीटर, उसका रेलवे पुल पर 5.60 मीटर और घोघी लोटन पुल पर 3.80 मीटर नीचे बह रही है। तेलार नाला 5.00 मीटर और जमुआर नाला 3.66 मीटर खतरे के निशान से नीचे दर्ज किया गया है। जुलाई के अंतिम दिन जिले के कुछ हिस्सों में हल्की बारिश दर्ज की गई। बांसी गेज स्टेशन पर 12 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई, जबकि अन्य गेज स्टेशनों पर कोई खास बारिश नहीं हुई। इस सीमित वर्षा के कारण नदियों के जलस्तर में कोई बड़ा परिवर्तन नहीं देखा गया। अगस्त के पहले दिन भी जिले में बाढ़ की स्थिति पूरी तरह सामान्य बनी हुई है। 1 जून से अब तक सिद्धार्थनगर में लगभग 280-290 मिमी वर्षा दर्ज होने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में कम है। अपर्याप्त बारिश के कारण नदियों का प्रवाह भी सामान्य बना हुआ है। मौसम विभाग के अनुसार, पूर्वी उत्तर प्रदेश में अगले कुछ दिनों तक रुक-रुक कर बारिश जारी रहने की संभावना है। नदियों के जलस्तर में उल्लेखनीय वृद्धि तभी होगी जब लगातार और व्यापक वर्षा हो। फिलहाल, सभी प्रमुख नदियां सुरक्षित स्तर पर बह रही हैं और प्रशासन लगातार स्थिति की निगरानी कर रहा है।
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सिद्धार्थनगर में मानसून की धीमी रफ्तार का असर:नदियां खतरे के निशान से नीचे, जून से अबतक 280-290 MM बरसात
