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सीतामाता अभयारण्य में लिया प्रकृति के बीच लिया आनंद:ग्रुप महर्षि वाल्मीकि आश्रम के बारे में भी जाना, आते वक्त बर्ड विलेज मेनार में पक्षियों को देखा,




ईको टूरिज्म को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक ग्रुप बीती रात प्रकृति भ्रमण पर उदयपुर पहुंचा। इस ग्रुप में शामिल प्रकृति प्रेमियों, पक्षी विशेषज्ञों और पर्यटकों ने सीतामाता वन्यजीव अभयारण्य और मेनार बर्ड विलेज का भ्रमण कर जंगल, ऐतिहासिक स्थलों और जलीय पक्षियों की दुनिया को करीब से देखा। यह दल रविवार की सुबह उदयपुर से रवाना होकर सबसे पहले सीतामाता वन्यजीव अभयारण्य पहुंचा। यहां पर्यटकों ने औषधीय वनस्पतियों और जैव विविधता से भरपूर जंगलों का अनुभव किया। भ्रमण के दौरान भागी बावड़ी और पौराणिक महत्व वाले महर्षि वाल्मीकि आश्रम का भी दौरा किया गया, जहां पर्यटकों ने प्राकृतिक वातावरण के बीच इतिहास और आस्था से जुड़े स्थलों को देखा। यह आयोजन वन विभाग के वन्यजीव प्रभाग की ओर से किया गया। इसके बाद दल ने बारह बीघा का बड़ला नाम से प्रसिद्ध विशाल वटवृक्ष का अवलोकन किया, जो अभयारण्य का प्रमुख आकर्षण माना जाता है। पर्यटकों ने सीता कुंड के प्राकृतिक जलस्रोत और प्राचीन सीतामाता मंदिर में दर्शन-पूजन भी किए। तस्वीरों में देखें प्रकृति के नजारे….
पर्यटकों ने मेनार बर्ड विलेज का किया अवलोकन वापसी के दौरान पर्यटकों को मेनार बर्ड विलेज ले जाया गया। मेनार झील के जलभराव क्षेत्र में दूरबीन और कैमरों की मदद से देसी और प्रवासी जलीय पक्षियों का अवलोकन कराया गया। विशेषज्ञों ने पक्षियों की विभिन्न प्रजातियों, उनके निवास और स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी भी शेयर की। वन विभाग की ओर से बताया गया कि ईको टूरिज्म के तहत आगे भी प्रकृति भ्रमण की श्रृंखला जारी रहेगी। अगली यात्राओं में गोरमघाट, भीलबेरी, सीतामाता अभयारण्य और फुलवारी की नाल अभयारण्य जैसी जगहों को शामिल किया गया है। इच्छुक पर्यटक इन यात्राओं में रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं और अधिक जानकारी के लिए 7568348678 पर संपर्क कर सकते हैं।



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