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सीरिया में पूर्व राष्ट्रपति असद को फांसी की सजा:लाखों लोगों की मौत के जिम्मेदार पाए गए; ममेरे भाई को पिंजरे में कोर्ट लाया गया




सीरिया की एक अदालत ने मंगलवार को देश के पूर्व राष्ट्रपति बशर अल-असद और उनके छोटे भाई माहेर अल-असद को फांसी की सजा सुनाई। दोनों को मानवता के खिलाफ अपराध और युद्ध अपराध के मामले में यह सजा मिली। इसी मामले में बशर अल-असद के मामा के बेटे अतीफ नजीब को भी फांसी की सजा सुनाई गई। बशर और माहेर दिसंबर 2024 में सत्ता गिरने के बाद रूस भाग गए थे। पुतिन सरकार ने उन्हें शरण दी हुई है। ऐसे में दोनों की गैरमौजदगी में यह सजा सुनाई गई। अतीफ नजीब रूस नहीं भाग पाए थे। उन्हें जनवरी 2025 में गिरफ्तार कर लिया गया था। अतीफ मंगलवार को अदालत में पेश हुए। सुनवाई के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। उनको कैदी की वर्दी पहनाकर पिंजरे में लाया गया था। दिसंबर 2024 में 53 साल पुराना राज खत्म हुआ यह बशर अल-असद के खिलाफ किसी आपराधिक मामले में आया पहला फैसला है। दिसंबर 2024 में विद्रोहियों ने दमिश्क पर कब्जा कर उनकी सरकार गिरा दी थी। इसके साथ ही 1971 से सीरिया पर शासन कर रहे असद परिवार का 53 साल पुराना राज भी खत्म हो गया था। सरकार गिरने से ठीक पहले बशर अल-असद ने देश छोड़ दिया था। इसके बाद सीरिया पर विद्रोही नेता अहमद अल-शरा का कब्जा हो गया। उनकी सरकार ने उनके शासन के दौरान लोगों पर हुए अत्याचार और हत्याओं के मामलों की जांच शुरू की। अतीफ के आदेश के बाद सीरिया में गृहयुद्ध भड़का था अतीफ नजीब सीरियाई सेना में ब्रिगेडियर जनरल रह चुके हैं। 2011 में वे दारा प्रांत में राजनीतिक सुरक्षा शाखा के प्रमुख थे। वह असद सरकार के सबसे बड़े अधिकारियों में से एक हैं, जिन पर अदालत में मुकदमा चला।

अतीफ पर आरोप है कि 2011 में सीरिया के दारा राज्य में प्रदर्शनकारियों पर सख्ती से निपटने का आदेश दिया था। उनके आदेश के बाद ही पूरे सीरिया में विरोध प्रदर्शन और उग्र हो गया जो बाद में 14 साल तक चलता रहा। इस गृहयुद्ध में करीब 5 लाख लोगों की मौत हुई। कैसे शुरू हुआ सीरिया का गृहयुद्ध? रूस और ईरान के दोस्त असद की सरकार कैसे गिरी 2011 में शुरू हुए गृहयुद्ध के बाद भी बशर अल-असद लंबे समय तक रूस, ईरान और हिजबुल्लाह की मदद से सत्ता में बने रहे। लेकिन 2024 में हालात बदलने लगे। इजराइल ने हिजबुल्लाह और ईरान से जुड़े कई ठिकानों पर लगातार हमले किए। इससे ये गुट कमजोर पड़ गए। वहीं रूस भी यूक्रेन जंग में उलझा था, ऐसे में उन्हें पहले जैसी सैन्य मदद नहीं मिल सकी। इसी मौके का फायदा उठाकर तुर्किये के समर्थन वाले विद्रोही गुटों ने उत्तर-पश्चिमी प्रांत इदलिब से बड़ा हमला शुरू कर दिया। कुछ ही दिनों में विद्रोहियों ने एक के बाद एक कई शहरों पर कब्जा कर लिया। विद्रोही 8 दिसंबर 2024 को राजधानी दमिश्क पहुंच गए। इसके बाद बशर अल-असद अपने परिवार के साथ रूस भाग गए। उनकी सरकार गिर गई और असद परिवार का 53 साल से ज्यादा पुराना शासन खत्म हो गया। रूस ने असद और उनके परिवार को शरण दी। ————-



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