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बॉलीवुड कलाकार रणदीप हुड्डा ने पलवल के गांव रजोलका के रहने वाले अंतरराष्ट्रीय बीन वादक हवा सिंह नाथ को प्रतिष्ठित संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार-2024 से सम्मानित होने पर बधाई दी है। रणदीप ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर इसको लेकर एक वीडियो पोस्ट किया है। उन्होंने कहा कि यह हर हरियाणवी के लिए गौरव की बात है। ये हरियाणा और हरियाणवी कला का सम्मान है। 96 साल के हवा सिंह नाथ को 14 अगस्त को दिल्ली में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पुरस्कार देकर सम्मानित किया था। हवा सिंह नाथ सपेरा समाज से आते है और वह अपनी बीन का जादू देश ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी दिखा चुके है। उन्होंने बॉलीवुड के मशहूर कलाकार अमरेश पुरी, हेमा मालिनी , गुरूदासमान जैसे कलाकारों के साथ काम किया है। हवा सिंह ने 10 साल की उम्र से बीन बजाना शुरू किया था। लोक कला और विरासत का सम्मान बॉलीवुड कलाकार रणदीप हुड्डा ने कहा कि वो हवा सिंह नाथ को ये पुरस्कार मिलने पर बधाई देते है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के द्वारा दिया गया ये सम्मान हरियाणा की समृद्ध लोक कला और विरासत का सम्मान है। हवा सिंह नाथ की ये साधना और प्रतिभा यूं ही हरियाणा का नाम देश और दूनिया में रोशन करती रहे। हर हरियाणवी की तरफ से उनको बधाई और शुभकानाएं। अपने बड़े भाई को अपना गुरू बनाया पलवल जिला के गांव रजोलका में रहने वाले 96 साल के हवा सिंह नाथ पिछले करीब 40 सालो से वह पलवल के गांव रजोलका में रह रहे है। बीन वादक की ये कला प्राचीन समय से उनके कुल में चली आ रही है। उनसे पहले उनके बड़े भाई बीन वादन का काम करते थे। उन्होंने 10 साल की उम्र में बीन अपने हाथों में पकड़ी थी। हवा सिंह नाथ ने अपने बड़े भाई को अपना गुरू बनाया और उन्ही से इस कला को सीखा। 30 साल की उम्र में शादी हवा सिंह ने बताया कि 30 साल की उम्र में उनकी शादी हो गई। शादी के बाद परिवार को चलाना और इस कला के साथ आगे बढ़ना बहुत ही मुश्किल था। लेकिन उन्होंने हिम्मत नही हारी और वो इस कला से जुड़े रहे। वो शादियों , जगह -जगह बीन के प्रोग्राम करते थे। धीरे-धीरे उनकी बीन को लोग पसंद आने लगी और उनको स्टेजों पर अपनी बीन प्रोग्राम करने का मौका मिला। अमरीश पुरी और हेमा मालिनी के साथ किया काम हवा सिंह नाथ ने गांव की मिट्टी से लेकर बॉलीवुड तक का सफर किया है। उन्होंने बॉलीवुड के कई बड़े कलाकार अमरेश पुरी, हेमा मालिनी , गुरूदासमान के साथ काम किया है। कई फिल्मों में उन्होंने अपनी बीन से निकलने वाला संगीत दिया है। पांचों बेटे इसी कला से जुड़े उन्होंने कहा कि शादी के बाद उनके पांच बेटे है। जिनमें रणधीर नाथ, राजबीर नाथ , रामबीर नाथ , जयवीर नाथ , संजय नाथ है। उनको बेटो ने भी इसी कला को सीखा और सभी ने मिलकर अपनी टोली बना ली। उनके दो बेटे बीन बजाने का काम करते है बाकि तुम्बा ,चिमटा और ढोलक को संभालते है। विदेशों में बजाया बीन का डंका हवा सिंह के बेटे रणधीर ने बताया कि उनके पिता ने भारत में ही ब्लकि 5 बार विदेशों में जाकर बीन के प्रोग्राम किए है। टली, दुबई, अबू धाबी सहित UAE के अन्य देशों में अपनी प्रस्तुति दे चुके है। हांलाकि उनको कभी विदेश साथ में जाने का मौका नही मिला है। विदेश में उनके साथ दूसरे कलाकार जाते रहे है। हवा सिंह का गांव रजोलका में एक बड़ा परिवार है। उनके 5 बेटे है जो गांव में ही उनके साथ रहते है। हवा सिंह के 10 पोते ( बेटे के बच्चे) और 3 पोतियां है। लेकिन उनके बेटों के बाद कोई भी इस कला से जुड़ाना नही चाहता है। जिसका सबसे बड़ा कारण यही है कि इस कला के साथ परिवार चलाना बेहद मुशकिल है, इसलिए वो बच्चों को पढ़ा रहे है। उनके कई पोटे नौकरी भी कर रहे है। सरकार से पेंशन बनाने की मांग हवा सिंह के बेटे ने कहा कि सरकार के द्वारा अब से पहले उनकी कोई आर्थिक तौर पर मदद नही की गई है। गांव -गांव में जाकर प्रोग्राम करके उनके पिता ने घर चलाया है। वो चाहते है कि सरकार इस कला को आगे बढ़ाने के लिए सहयोग करे। उनके पिता की पेंशन सरकार के द्वारा बांधी जाए, ताकि दूसरे लोगों को प्रोत्साहन मिले।
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हवा सिंह नाथ को संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार:रणदीप हुड्डा ने दी बधाई; बोले- गांव की गलियों से राष्ट्रपति भवन तक पहुंची बीन
