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इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने दृष्टिबाधित अभ्यर्थियों के लिए आरक्षित बैकलॉग पदों को भरने के अपने 2013 के आदेश का 13 साल से पालन न होने पर राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। न्यायालय ने पूछा है कि आदेश के बावजूद आरक्षित रिक्तियां क्यों नहीं भरी गईं और अनुपालन रिपोर्ट क्यों नहीं पेश की गई। यह आदेश मुख्य न्यायमूर्ति अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति जसप्रीत सिंह की खंडपीठ ने नेशनल फेडरेशन ऑफ द ब्लाइंड, उत्तर प्रदेश की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। न्यायालय ने सरकार को जवाबी शपथपत्र दाखिल करने का समय दिया है। मामले की अगली सुनवाई 8 सितंबर को निर्धारित की गई है। न्यायालय के समक्ष पेश रजिस्ट्री की रिपोर्ट से पता चला कि 17 जुलाई 2013 को दिए गए मूल फैसले में तत्कालीन मुख्य सचिव को छह महीने के भीतर व्यक्तिगत शपथपत्र के साथ अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया गया था। आदेश में सभी सरकारी विभागों, निगमों और स्थानीय निकायों में दृष्टिबाधित व्यक्तियों के लिए आरक्षित एक प्रतिशत बैकलॉग रिक्तियों को भी छह माह में भरने का निर्देश था। हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव को आदेश के अनुपालन की निगरानी के लिए एक समिति गठित करने का भी निर्देश दिया था। हालांकि, 13 साल बीत जाने के बाद भी न तो मुख्य सचिव का व्यक्तिगत शपथपत्र दाखिल किया गया और न ही आदेश के अनुपालन की कोई रिपोर्ट न्यायालय में पेश की गई। न्यायालय ने अब राज्य सरकार से स्पष्टीकरण मांगा है कि 2013 के आदेश का अब तक पालन क्यों नहीं हुआ और दृष्टिबाधित अभ्यर्थियों के लिए आरक्षित बैकलॉग रिक्तियां अभी तक क्यों नहीं भरी गई हैं।
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हाईकोर्ट के आदेश का 13 साल से नहीं हुआ पालन:नेत्रहीनों के बैकलॉग पदों पर सरकार से मांगा जवाब
