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हिमाचल कांग्रेस में घमासान, नोटिस के बाद खाची के तल्ख-तेवर:बोले-कांग्रेस का बब्बर शेर हूं; राजनीतिक षड्यंत्र से नहीं डरता, राठौर पर की थी टिप्पणी




हिमाचल कांग्रेस में घमासान छिड़ गया है। ठियोग का सियासी विवाद अब पार्टी के भीतर खुली राजनीतिक खींचतान का रूप लेता दिख रहा है। हिमाचल फॉरेस्ट कॉर्पोरेशन के वाइस चेयरमैन एवं प्रियंका गांधी के करीबी केहर सिंह खाची को पार्टी की ओर से कारण बताओ नोटिस जारी किए जाने के बाद उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए जिस अंदाज में जवाब दिया है, उससे मामला और गरमा गया है। केहर सिंह खाची ने लिखा- ‘वह कांग्रेस पार्टी के ‘शेर’ हैं और ऐसे-वैसे राजनीतिक षड्यंत्र से डरने वाले नहीं हैं। खाची के तेवर को पार्टी के नोटिस का जवाब देने से पहले ही उसे खुली राजनीतिक चुनौती के तौर पर देखा जा रहा है। प्रदेश कांग्रेस ने ठियोग से विधायक और पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता कुलदीप सिंह राठौर के खिलाफ सार्वजनिक मंच से की गई टिप्पणी को अनुशासनहीनता मानते हुए खाची से स्पष्टीकरण मांगा था। पार्टी ने पूछा है कि उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई क्यों न की जाए? खाची को सात दिन के भीतर लिखित जवाब देने को कहा गया था। नोटिस के बाद बदले तेवर, सीधे राजनीतिक संदेश खाची का ताजा बयान इस पूरे विवाद में सबसे अहम मोड़ माना जा रहा है। आमतौर पर कारण बताओ नोटिस के बाद नेता संगठन के सामने अपना पक्ष रखने तक सार्वजनिक प्रतिक्रिया से बचते हैं, लेकिन खाची ने सोशल मीडिया पर ‘शेर’ और ‘राजनीतिक षड्यंत्र’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर अपने तेवर साफ कर दिए हैं। इससे यह संदेश भी गया है कि वह इस विवाद को केवल संगठनात्मक अनुशासन का मामला मानकर पीछे हटने के मूड में नहीं हैं। खाची को माना जाता है प्रियंका गांधी का करीबी खाची का यह रुख इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि उन्हें कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा का करीबी माना जाता है, जबकि जिस नेता पर उन्होंने टिप्पणी की, वह भी कांग्रेस हाईकमान के करीबी और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में शामिल हैं। ऐसे में ठियोग का विवाद अब स्थानीय राजनीति से निकलकर कांग्रेस के भीतर अलग-अलग प्रभावशाली धड़ों की सियासी ताकत से भी जोड़ा जा रहा है। कैसे शुरू हुआ विवाद? विवाद की शुरुआत स्वतंत्रता दिवस पर ठियोग में आयोजित कार्यक्रम से हुई। यहां खाची ने विधायक कुलदीप सिंह राठौर को लेकर टिप्पणी करते हुए कहा था कि वर्ष 2022 तक ठियोग में 11 लोग भी राठौर को नहीं जानते थे और कांग्रेस नेताओं ने एकजुट होकर उन्हें चुनाव जिताया था। इस बयान के बाद कांग्रेस के भीतर ही खाची के बयान को लेकर विरोध के स्वर उठे। PWD मंत्री विक्रमादित्य सिंह खुलकर राठौर के समर्थन में उतरे। उन्होंने राठौर को कांग्रेस का कद्दावर और प्रतिष्ठित नेता बताते हुए उनके लंबे सांगठनिक सफर का हवाला दिया। राठौर एनएसयूआई अध्यक्ष से लेकर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष तक की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं और 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रहते हुए संगठन को मजबूत करने में उनकी भूमिका रही थी। ठियोग में चुनावी राजनीति से पहले शक्ति प्रदर्शन? इस पूरे विवाद का सबसे बड़ा राजनीतिक एंगल ठियोग विधानसभा क्षेत्र है। यहां कांग्रेस के दो प्रमुख नेताओं के बीच सार्वजनिक बयानबाजी ने पार्टी की अंदरूनी राजनीति को सतह पर ला दिया है। एक तरफ विधायक कुलदीप राठौर हैं, जो वर्तमान में विधानसभा में ठियोग का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं और राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी के प्रवक्ता भी हैं। दूसरी ओर खाची हैं, जिन्हें प्रियंका गांधी के करीबी नेताओं में गिना जाता है। ऐसे में सवाल केवल एक बयान या नोटिस का नहीं रह गया है। सवाल यह भी है कि ठियोग में कांग्रेस की राजनीतिक कमान और भविष्य की सियासत में किस धड़े का प्रभाव अधिक रहेगा। 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियां शुरू होने के बीच इस तरह की सार्वजनिक खींचतान पार्टी के लिए राजनीतिक रूप से असहज स्थिति पैदा कर रही है।



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