Headlines

14 दिन बाद भी अंतिम दर्शन को तरस रहा परिवार:यमुनानगर के गुरप्रीत का शव नहीं पहुंचा इंडिया, यूक्रेन में मिसाइल हमले में गई जान




रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान यूक्रेन के ओडेसा बंदरगाह के पास क्रूज मिसाइल हमले में जान गंवाने वाले यमुनानगर के गांव पंजेटो निवासी मर्चेंट नेवी के नाविक गुरप्रीत सिंह बाठ का पार्थिव शरीर घटना के 14 दिन बाद भी भारत नहीं पहुंच सका है। परिवार की निगाहें हर फोन कॉल पर टिकी हैं, लेकिन अभी तक शव के भारत आने की कोई निश्चित तारीख नहीं मिली है। डीएनए रिपोर्ट शिपिंग कंपनी को भेजी जा चुकी है, फिर भी परिजनों का इंतजार खत्म नहीं हो रहा। परिवार लगातार सरकार से पार्थिव शरीर जल्द भारत लाने की मांग कर रहा है। परिवार लगातार शिपिंग कंपनी के संपर्क में गुरप्रीत के घर पर रिश्तेदारों, ग्रामीणों और परिचितों का लगातार आना-जाना लगा हुआ है। हर कोई परिवार को ढांढस बंधा रहा है, लेकिन इकलौते बेटे के इंतजार में बैठे पिता की पीड़ा कम नहीं हो रही। परिवार लगातार शिपिंग कंपनी के संपर्क में है और शव भारत लाने की प्रक्रिया की जानकारी ले रहा है। गुरप्रीत के मामा अमरीक सिंह ने बताया कि गुरप्रीत के पिता किर्तन सिंह के डीएनए की रिपोर्ट भी शिपिंग कंपनी को उपलब्ध करा दी गई है। इसके बावजूद अभी तक कंपनी की ओर से यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि गुरप्रीत का पार्थिव शरीर भारत किस तारीख को भेजा जाएगा। विस्फोट से शव बुरी तरह जले उन्होंने बताया कि मिसाइल हमले में चार भारतीय नागरिकों की मौत हुई थी। विस्फोट इतना भीषण था कि शव बुरी तरह झुलस गए, जिसके कारण उनकी सामान्य तरीके से पहचान संभव नहीं हो सकी। इसी वजह से चारों भारतीयों के परिजनों से डीएनए सैंपल मंगवाए गए हैं। जब तक सभी मृतकों की डीएनए रिपोर्ट शिपिंग कंपनी के पास नहीं पहुंच जाती और उनका मिलान पूरा नहीं हो जाता, तब तक शवों को भारत भेजने की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाएगी। परिजनों का कहना है कि वे हर दिन इस उम्मीद में बैठे हैं कि कंपनी से पार्थिव शरीर भेजने की सूचना मिलेगी, लेकिन अब तक सिर्फ इंतजार ही हाथ लगा है। उनका कहना है कि सरकार को इस मामले में हस्तक्षेप कर जल्द से जल्द गुरप्रीत का पार्थिव शरीर भारत लाने की व्यवस्था करनी चाहिए, ताकि पूरे सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जा सके। 19 जुलाई को मिसाइल हमले में गई जान गौरतलब है कि गांव पंजेटो निवासी गुरप्रीत सिंह बाठ 12 जून को मर्चेंट नेवी की ड्यूटी पर तुर्की गए थे। 19 जुलाई को उनका जहाज यूक्रेन के ओडेसा बंदरगाह से रवाना हुआ था। इसी दौरान जहाज पर क्रूज मिसाइल से हमला हुआ, जिसमें गुरप्रीत सहित चार भारतीय नागरिकों और कुल 10 लोगों की मौत हो गई थी। गुरप्रीत परिवार के इकलौते बेटे थे। करीब डेढ़ साल पहले उनकी शादी हुई थी और छह महीने पहले ही वह पिता बने थे। वर्ष 2016 में सड़क दुर्घटना में पिता किर्तन सिंह का एक पैर कट जाने के बाद पूरे परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी भी गुरप्रीत के कंधों पर ही थी। अब पूरा परिवार उनके पार्थिव शरीर के भारत लौटने का बेसब्री से इंतजार कर रहा है।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *