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किशनगंज में पर्युषण महापर्व के समवत्सरी के अवसर पर किशनगंज तेरापंथ समाज की महज 5 साल की विशा श्यामसुखा ने 36 घंटे का निराहार उपवास रखकर तप और संयम का उदाहरण प्रस्तुत किया। इतनी कम उम्र में लगातार 36 घंटे तक उपवास रखने की बात परिवार और जैन समाज में चर्चा का विषय बनी हुई है। समवत्सरी पर आत्मशुद्धि और क्षमायाचना
जैन धर्म में पर्युषण महापर्व के आठवें दिन समवत्सरी महापर्व मनाया जाता है। इस दिन जैन धर्मावलंबी आत्मशुद्धि, क्षमायाचना और संयम की साधना करते हैं। इसी क्रम में परिवार के सभी सदस्यों ने उपवास किया। इनमें विशा का 36 घंटे का उपवास विशेष रहा। दादी ने बताया, पीढ़ियों से निभा रहे परंपरा
विशा की दादी किरण देवी ने बताया कि जैन धर्म में संयम और आत्मानुशासन का विशेष महत्व है। उनके परिवार में पीढ़ियों से धार्मिक परंपराओं और उपवास का पालन किया जाता रहा है। परिवार के प्रत्येक सदस्य ने समवत्सरी का उपवास किया, लेकिन विशा का तप विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा। परिवार के आध्यात्मिक माहौल से मिली प्रेरणा
परिवार का धार्मिक और आध्यात्मिक वातावरण भी विशा की तपस्या से जुड़ा बताया गया। परिजनों के अनुसार, बचपन से ही उसे जैन धर्म की परंपराओं और संयम के संस्कारों से परिचित कराया जाता रहा है। दादाजी ने पिछले साल लिया था संलेखना व्रत
विशा के दादाजी संतोषचंद श्यामसुखा ने पिछले साल संलेखना/संथारा व्रत लिया था। जैन परंपरा में संलेखना को जीवन के अंतिम पड़ाव में सांसारिक मोह से दूरी और आत्मसंयम की साधना के रूप में देखा जाता है। समाज में चर्चा का विषय बना विशा का तप
समवत्सरी के मौके पर 5 साल की विशा द्वारा 36 घंटे का उपवास परिवार की धार्मिक परंपरा और संयम के संस्कारों को सामने लाता है। किशनगंज के तेरापंथ समाज में विशा के इस तप की चर्चा हो रही है।
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5 साल की विशा ने 36 घंटे का उपवास रखा:किशनगंज में पर्युषण महापर्व में तप-संयम की मिसाल
